सहायक शिक्षण सामग्री (TLM) के जरिए बच्चों में शिक्षा का विकास कर रही घोर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले की यह शिक्षिका,पढिए इनके द्वारा बनाये गये कुछ सहायक शिक्षण सामग्री विवरण

“सामने हो मंजिल तो रास्ते ना मोड़ना,जो भी मन में हो वो सपना मत तोड़ना |
कदम – कदम पर मिलेगी मुश्किल आपको, बस सितारे छूने के लिए जमीन मत छोड़ना ||”

छत्तीसगढ़ शासन के नित नए नए नवाचार से छत्तीसगढ़ के स्कूली बच्चों को नए, नए तरीकों से पढ़ने में आसानी हो रही है , जहाँ कोरोना वैश्विक महामारी ने स्कूलों में ताले जड़ दिए , वही छत्तीसगढ़ शासन की योजना,ष्पढई तुंहर दुआर, पोर्टल के माध्यम से छत्तीसगढ़ के सभी शिक्षक स्कूली बच्चों को नएनए तरीकों से पढ़ाई करवा रहे है ,आज हम आपको घोर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले की एक ऐसी ही शिक्षिका से परिचय करवाने जा रहे है,जो सहायक शिक्षण सामग्री के माध्यम से बच्चों में शिक्षा का दीप जला रही है ,असफलता ही सफलता की एक शुरुआत है, इससे घबराना नहीं चाहिये बल्कि पूरे जोश के साथ फिर से प्रयास करना चाहिये।

 वैशाली झंवर जो कि कक्षा 6 वीं से 8 वीं तक के बच्चों को अंग्रेजी एवं विज्ञान विषय का अध्यापन कराती है | किंतु इन्हें सहायक शिक्षक सामग्री बनाने में अत्यंत रुचि होने के कारण इन्होंने प्रत्येक विषय से संबंधित बहुत सारे सहायक शिक्षण सामग्री बनाया है एवं साथ ही जिला स्तर पर संपूर्ण जिले के शिक्षकों को सहायक शिक्षक सामग्री बनाने का प्रशिक्षण भी दिया है | इसके अलावा विभिन्न विषयों से संबंधित रीडिंग कॉर्नर जैसे मैथ्स रीडिंग कॉर्नर, साइंस रीडिंग कॉर्नर, हिंदी रीडिंग कॉर्नर, कैसा हो, कहां हो, किस प्रकार बनाया जाए | साथ ही विद्यालय में सीखने का वातावरण बनाने के लिए किन – किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इन सभी विषयों पर प्रशिक्षण दिया है |

लॉकडाउन के दौरान इन्होंने ऑनलाइन कक्षा एवं मोहल्ला कक्षा का संचालन भी किया है जिसमें इन्होंने अपने TLM की सहायता से बच्चों को पढ़ाया है एवं इससे बच्चों को बहुत लाभ हुआ है |

हिंदी – मुहावरों की दुनिया सहायक शिक्षण सामग्री के अंतर्गत मुहावरों को चित्र रुप में प्रदर्शित किया है एवं जब बच्चे कक्षा शिक्षण में रुचि नहीं ले रहे होते हैं | तब उन्हें इस चित्र को दिखाकर खेल-खेल में मुहावरों को पहचानने उसका अर्थ समझाने की कोशिश की जिसमें मुझे बहुत सफलता प्राप्त हुई |

गणित – पूर्णांकों का जोड़ घटाना सिखाने के लिए गतिविधि का सहारा लिया है | इसके अलावा ज्यामितीय आकृतियों की समझाने के लिए सहायक शिक्षण सामग्री बनाई ,जिसे देखकर बच्चे जल्दी ही आकृतियों के विषय में सीख जाते हैं |

विज्ञान – science puzzle बनाया जिसमें तत्व एवं संकेत की जानकारी मिलती है | इसके अलावा गुड़हल के फूल के रस द्वारा एवं अम्ल एवं छार की पहचान, सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण समझाने का वर्किंग मॉडल, वर्षा मापक यंत्र, पैराशूट, कंकाल तंत्र का कार्डबोर्ड से बना मॉडल, विज्ञान से संबंधित विभिन्न प्रयोगों को परिवेश में पाई जाने वाली सहायक शिक्षक सामग्री से समझाना |

English- preposition को चित्र द्वारा समझाना, opposite word watch की सहायता से opposite word को सिखाना ,months name Hindi and English, पेपर रोल की सहायता से alphabet disc, साथ ही साथ ही विद्यालय के प्रत्येक सामग्री पर हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों में नाम लिखना ताकि बच्चे आते जाते उसे पढ़े एवं सीख सके |

इनके द्वारा बनाये गये कुछ सहायक शिक्षण सामग्री का विवरण :-

(1) सहायक शिक्षण सामग्री का शीर्षक –  “सांप सीढ़ी”आवश्यक सामग्री – स्कूल का फर्श और विभिन्न प्रकार के कलर |

बनाने की विधि – सबसे पहले स्कूल के किसी भी फर्श पर सांप सीढ़ी की आकृति बना लेते हैं, जो एक से सौ तक संख्या में होते हैं | इसमें सांप एवं सीढ़ी दोनों बनायेंगे | कुछ खानों में जहां पर सांप एवं सीढी दोनों भी नहीं होंगे उस में विभिन्न विषयों से संबंधित प्रश्न जैसे पर्यायवाची शब्द, पहाड़ा, विज्ञान के तत्व यौगिकों के सूत्रों के नाम लिखेंगे |

उपयोग – बच्चे जब सांप सीढ़ी के समान इसमें खेलेंगे तो जिस खाने में उनकी गोटी जाएगी,वहां पर जो प्रश्न होगा ,उस प्रश्न को एक बच्चा पूछेगा और दूसरा बच्चा अगर उसका जवाब दे देता है, तो वह आगे बढ़ेगा नहीं तो वह खेल से आउट हो जाता है | इस प्रकार से हम विभिन्न विषयों को इस सहायक शिक्षण सामग्री की सहायता से सिखा सकते हैं |

लाभ –   इस सहायक शिक्षण सामग्री का उपयोग हम विद्यालय में उस समय कर सकते हैं, जब हम किसी अन्य कार्य कर रहे हो तो बच्चे आपस में खेल खेल में सीख सकते हैं एवं व्यस्त रहते हैं |

  (2) सहायक शिक्षण सामग्री का शीर्षक –  “ज्यामिति आकृति की समझ”

आवश्यक सामग्री – कलर, फेविकोल, कैची, कलरफुल टेप ,चार्ट पेपर, मार्कर पेन,पुट्ठा इत्यादि |

निर्माण विधि – सबसे पहले पुट्ठे पर विभिन्न ज्यामितीय आकृतियों को मिलाते हुए एक पुरुष आकृति बनाते हैं, उसके पश्चात पुट्ठे को उन आकृतियों के अनुसार काट कर उन पर कलर कर देते हैं एवं फेविकोल की सहायता से ड्राइंग शीट पर जिस पर कि हमने आकृति बनाई है,उस पर चिपका देते हैं |

उपयोग – इस प्रकार के शिक्षण सामग्री को कक्षा में ऐसे स्थान पर लगाते हैं, जहां पर बच्चे अपना अधिकांश समय व्यतीत करते हैं और बार-बार देखते हैं, जिससे आकृति उन्हें अच्छी तरह से याद रह जाती है |

लाभ – आकृति रंगीन एवं आकर्षक होने के कारण बच्चे आकर्षित होते हैं एवं आकृतियों को अच्छे प्रकार से समझते हैं |

(3) सहायक शिक्षण सामग्री  – “science puzzle”

आवश्यक सामग्री – पुराने अखबार, फेविकोल एवं विभिन्न प्रकार के वाटर कलर, मार्कर पेन ,गत्ते का आयताकार टुकड़ा, ड्राइंग शीट अलग-अलग रंगों में 2-3  इत्यादि |

निर्माण विधि – सर्वप्रथम गत्ते के आयताकार टुकड़े पर फेविकोल की सहायता से ड्राइंग शीट चिपका दीजिए उस पर अनियमित ढंग से तत्व यौगिकों के नाम लिख दीजिए | अब पुराने अखबार की सहायता से कैरम की गोटियों के समान पेपर रोल बना लीजिए | जितने तत्व यौगिक उनके नाम लिखे हैं ,उतने पेपर रोल बना लीजिए | हम उसके दोनों तरफ गोल-गोल ड्राइंग शीट चिपका दीजिए | अब पेपर रोल के ऊपर जिन तत्व एवं यौगिको के नाम लिखे हैं,उनके संकेत लिख दीजिए |

उपयोग – जिस प्रकार हम लूडो खेलते हैं, तो गोटी रखते जाते हैं, उसी प्रकार दो बच्चे इसे खेलते हैं, एक बच्चा तत्व या यौगिक का नाम कहता है, तो दूसरा बच्चा संकेत वाली गोटी पेपर रोल उसके ऊपर रखता जाता है, इस प्रकार खेल-खेल में वे सीखते हैं |

लाभ – इसके उपयोग से बच्चे खेल खेल में प्रतिस्पर्धा की भावना के कारण पढ़ने में रुचि लेते हैं, विषय के प्रति भी उनकी रुचि बढ़ती है, साथ ही साथ विद्यालय के प्रति भी आकर्षित होते हैं |

इसके अलावा इन्होंने शाला में बच्चों को पुरानी साड़ी चादर से डोर मेट बनाना, पुराने अखबार पेपर से पेन होल्डर बनाना, एवं कबाड़ से जुगाड़ अवधारणा पर आधारित उपयोगी सामग्री बनाना भी सिखाया है 

इन्होंने कोविड-19 के पिछले लॉकडाउन में स्वयं के व्यय से स्वयं अपने हाथों से लगभग 2000 मास्क घर पर बनाकर नि:शुल्क वितरित भी किए हैं एवं अपने शाला के बच्चों को भी मास्क बनाना मोहल्ला क्लास के दौरान सिखाया है | वर्तमान में कोविड-19 वार्ड नियंत्रक दल में अपने कर्तव्य का पालन कर रही हैं |

एक चीनी कहावत के अनुसार कहा जाता है कि – “जो चीजें मैं सुनता हूं शायद उनको भूल सकता हूं, जो चीजें में देखता हूं,शायद उनको याद रख सकता हूं, किंतु जो चीजें मैं स्वयं करता हूं, उनको कभी नहीं भूल सकता हूं |

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