PSC का एग्जाम देने आए हजारों छात्रों में केवल एक निकला संक्रमित,स्पेशल सेंटर में बैठकर दिया एग्जाम

कोविड-19 (covid-19) के प्रकोप के चलते दो बार टल चुकी मध्य प्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा (MPPSC) 2020 महामारी की दूसरी लहर के कमजोर पड़ने पर रविवार को आयोजित हुई. मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य की इस प्रमुख भर्ती परीक्षा में बैठने वाले हजारों उम्मीदवारों में से केवल एक परीक्षार्थी ने पर्यवेक्षकों को उसके कोरोना वायरस संक्रमित होने की जानकारी दी.एमपीपीएससी के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) रवींद्र पंचभाई ने भाषा को बताया कि, ‘हमें अब तक मिली सूचना के मुताबिक केवल कटनी में एक उम्मीदवार ने पर्यवेक्षकों को अपने कोरोना वायरस संक्रमित होने की जानकारी दी है. इस उम्मीदवार की विशेष केंद्र में बैठाकर परीक्षा ली गई.’

एमपीपीएससी ने राज्य में बनवाए थे 64 विशेष केंद्र

रवींद्र पंचभाई ने बताया कि इन दिनों राज्य में महामारी की दूसरी लहर का प्रकोप घटने के कारण संक्रमितों की तादाद बेहद कम हो गई है. लेकिन एमपीपीएससी ने एहतियात के तौर पर राज्य के 52 जिला मुख्यालयों में 64 विशेष केंद्र भी बनाए थे जहां संक्रमित उम्मीदवार अलग बैठकर परीक्षा दे सकते थे.उन्होंने बताया कि राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए कुल 1,011 केंद्र बनाए गए थे जिनमें संक्रमित उम्मीदवारों के लिए बनाए गए 64 विशेष केंद्र शामिल हैं.

पिछले साल 3.44 लाख उम्मीदवारों ने दिया था आवेदन

एमपीपीएससी के ओएसडी ने बताया कि मध्य प्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2020 में शामिल होने के लिए 3.44 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था. उन्होंने बताया, ‘हम अलग-अलग केंद्रों से मिल रही रिपोर्ट के आधार पर गिनती कर रहे हैं कि इनमें से कुल कितने उम्मीदवार रविवार को आयोजित परीक्षा में बैठे हैं गिनती खत्म होने के बाद ही परीक्षार्थियों की वास्तविक संख्या बताई जा सकेगी.

कैंडिडेट के बीच सोशल डिस्टेसिंग का रखा गया ख्याल

एमपीपीएससी अधिकारी ने कहा कि राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा महामारी से बचाव के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए आयोजित की गई और परीक्षा केंद्रों में उम्मीदवारों के बीच पर्याप्त दूरी रखी गई. उन्होंने बताया कि कोविड-19 के प्रकोप के चलते वर्ष 2020 की राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा दो बार टल चुकी थी. पहले यह परीक्षा 11 अप्रैल को होनी थी. लेकिन महामारी के बढ़ते मामलों के चलते इसकी तिथि बदलकर 20 जून कर दी गई थी. बाद में इसकी तारीख फिर बदलते हुए 25 जुलाई कर दी गई थी.

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