निलंबित एडीजीपी सिंह ने ब्लैंकमेलिंग एफआईआर निरस्त करने की मांग पर याचिका लगाई

बिलासपुर। देशद्रोह व भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे निलंबित आईपीएस जीपी सिंह ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर दुर्ग जिले में एक कारोबारी की शिकायत पर अपने खिलाफ दर्ज ब्लैकमेलिंग की एफआईआर को निरस्त करने की मांग की है। हाईकोर्ट ने राज्य शासन और एफआईआर दर्ज कराने वाले कारोबारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।उल्लेखनीय है कि करीब दो माह पहले एक कारोबारी कमल कुमार सेन ने भिलाई के स्मृति नगर पुलिस चौकी में सिंह के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने बताया था कि उसके एक साझेदार ने एक करोड़ रुपये दबा दिये। उस साझेदार से जीपी सिंह की मित्रता थी, जो उस वक्त आईजी के रूप में पदस्थ थे। शिकायतकर्ता ने जब अपने रुपये वसूल करने की कोशिश की तो उसे फर्जी केस में फंसा दिया गया। इसके बाद केस को कमजोर करने के लिये सिंह की ओर से एक करोड़ रुपये की मांग की गई। उसकी पत्नी और परिजनों से एडवांस के रूप मे 20 लाख रुपये वसूल भी लिये गये।

अपनी याचिका में सिंह ने कहा है कि लेन-देन के जिस मामले का जिक्र शिकायतकर्ता कमलकुमार सेन ने किया है उसमें उसके खिलाफ महासमुंद पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में जुर्म दर्ज किया था और इस आरोप में उसे सात माह तक जेल में भी रहना पड़ा था। सिंह ने कहा कि पांच साल पहले भी मेरे विरुद्ध उसने शिकायत की थी जिसे आधार बनाकर अब एफआईआर दुर्ग पुलिस ने दर्ज की है। ऐसे मामले में एफआईआर दर्ज करना पुलिस व शासन की बदनीयती को दर्शाता है। 

ज्ञात हो कि एडीजीपी जीपी सिंह इन दिनों निलंबित चल रहे हैं। उनके और उनके परिचितों के छत्तीसगढ़ व राज्य के बाहर करीब 15 ठिकानों में छापेमारी के बाद ईओडब्ल्यू और एसीबी को 10 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का पता लगा था। सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया है, साथ ही उनके घर से मिले संदिग्ध आपत्तिजनक दस्तावेजों के आधार पर देशद्रोह का मामला भी रायपुर पुलिस ने दर्ज किया है। इस समय उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिली हुई है। सिंह की इस नई याचिका पर हाईकोर्ट में 28 सितंबर को अगली सुनवाई होगी। 

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