महामारी के समय कौन लेगा शिक्षकों के सुरक्षा की गारंटी….? सहायक शिक्षक फेडरेशन ने DEO को ज्ञापन सौंपकर उठाए कई सवाल

रायपुर- छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन द्वारा जिला बलौदा बाजार द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी बलौदा बाजार भाटापारा को ज्ञापन सौंपकर विभिन्न मांगों पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए कहा गया । ताकि महामारी के समय शिक्षक साथियों को असुविधा ना हो और वे अपने दायित्वों का निर्वहन भी सफलतापूर्वक कर सकें।

इस मौके पर संजय यादव जिला अध्य्क्ष, जिला महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष बुधनी अजय, आरके जोशी, प्रमोद ध्रुव,मूरित श्रीवास सहित फेडरेशन के  पदाधिकारियों ने जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित ज्ञापन में कहा कि संविलियन पूर्व के लंबित समयमान वेतन एव एरियर्स भुगतान  सहायक शिक्षकों को दिया जाय, सर्विस बुक का समय पर संधारण, निर्धारित समय पर वरिष्ठता सूची का प्रकाशन हो, एनपीएस की राशि शिक्षकों के खाते में डाली जाए और मोहल्ला क्लास की बजाए रोटेशन  स्कूलों में कक्षाएं शुरू की जाए एवं कोरोना ड्यूटी के नाम पर एक शिक्षक को अनेक स्थानों पर ना लगाया जाए।
मालूम हो कि बंद चल रहे स्कूल सत्र में ऑनलाइन और ऑफलाइन शिक्षा का जिले में बुरा हाल है पिछले दिनों सीजीवाल में हमने “डीईओ चला रहे हैं पढ़ई तुंहर दुआर को लगा पढई को लगा बुखार योजना” आलेख लगाया था। बावजूद इसके डीओ ध्रुव की कार्यशैली में कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिला एवं अब शिक्षक भी लामबंद होकर मोहल्ला कर   विरोध कर रहे हैं, इस स्थिति में शासन के निर्देश अनुसार ऑनलाइन क्लासेस में तेजी लानी होगी लेकिन आरामतलब  डी ई ओ ध्रुव की बेरुखी एवम जि परियोजना कार्या. रा ग शि मिशन की लापरवाही से शासन की योजनाएं गर्त में जा रही हैं।
सहायक शिक्षक संघ फेडेरेशन के जिला अध्यक्ष संजय यादव का कहना है कि शिक्षको का हित जिले में अब दिखाई नही दे रहा है। हमने समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौपा है और प्रदेश अध्यक्ष को शिक्षको की समस्याओं से अवगत करा दिया है। 

सहायक शिक्षक संघ फेडेरेशन  संघ के प्रांत अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने सीजी वाल से  बातचीत में कहा कि फेडेरेशन के साथियों की लंबित मांगे जायज है। दो वर्षों से सरकार ने डी ए भी नहीं दिया, इंक्रीमेंट लगाने में भी बाबुओं के आगे पापड़ बेलने पड़ते है। कोरोना काल मे सबसे ज्यादा शिक्षा विभाग के कर्मी ऑन ड्यूटी रहते  शहीद हुए। उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा और बीमा क्लेम नहीं दिया गया न कोरोना वारियर्स का दर्जा और सुविधाएं यह तक कि टीकाकरण के लिए  कोरोना ड्यूटी जाने वाले टीचरों को मशक्कत करनी पड़ रही है,ड्यूटी में मास्क और सेनेडाइजर भी टीचर को खुद कर ले जाना होता है । जबकि एनआरएचएम के द्वारा ड्यूटीरत सभी लोगों के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम और दैनिक भत्ता दिया जाता है किंतु यह शिक्षको के लिए कही खो जाता है।
 छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडेरेशन के अध्यक्ष मनीष मिश्रा का मानना है  कोरोना की तीसरीं लहर की आशंका को देखते हुए मोहल्ला क्लास बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। बच्चों और शिक्षकों को  संक्रमण के जाल में जानबूझकर झोंका जा रहा है। मोहल्लों में ग्रुप में बैठने पर कोरोना नही होगा इसकी  गारंटी कौन लेगा?  मोहल्ला क्लास के लिए स्थान चयन से लेकर के संसाधनों की व्यवस्था, बैठक व्यवस्था , साफ-सफाई, सहायक सामग्री की व्यवस्था आदि हेतु नए सिरे से कवायद करनी पड़ती है, अनेकों जगह में स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ता हैं। 
मनीष का कहना है कि मौहल्ला क्लास के लिए शासन की तरफ से कोई प्रावधान नहीं किया गया । विभाग का स्वैच्छिक आदेश है। पर जिला शिक्षा अधिकारी और रायपुर में बैठे अधिकारी ए सी चेंबर में बैठकर आदेश जारी करते हैं। सप्ताह में 3 दिन अधिकारी भी  मोहल्ले का चयन करके वह अपना ऑफिस लगाएं तो हकीकत का पता चल जाएगा। कोरोना के भय से मोहल्ला क्लास के निरीक्षण में भी अधिकारी वर्ग  तो दूर संकुल प्राचार्य और  संकुल समन्वयक भी फटकना पसंद नहीं करते और कोरे कागजों में जानकारी भेज कर वाहवाही लूटने में लगे हुए हैं। इसलिए बेहतर होगा युक्तिसंगत निर्णय लेते हुए रोटेशन में स्कूलों में कक्षाओं को लेने के आदेश किया जाय।

Comments

  1. By Anoop verma

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