जहाँ !! बैंक के सामने लगती है..गमछा-चप्पल की लाइन..मुआवजे की राशि के लिए भटक रहे किसान..

लोरमी(योगेश मौर्य)।पिछले दिनों मौसम की खराबी और ओलावृष्टि की वजह से किसानों की फसल खराब हुई थी। जिसकी भरपाई के लिए सरकार ने किसानों के बैंक खाते में मुआवजे की राशि जमा कर दी है। लेकिन अब कई तरह की तकनीकि दिक्कतों की वजह से किसानों को बैंक से रुपए नहीं मिल पा रहे हैं। किसान भरी गरमी में बैंके के चक्कर लगा रहे हैं। बैंक का नजारा देखकर किसानों की परेशानियों का अँदाजा लगया जा सकता है। जहाँ पर भारी गरमी से बचने के लिए किसान अपने गमछा -चपप्ल वगैरह रखकर लाइन में लगे रहते हैं। लेकिन शाम गुजर जाने के बाद भी उन्हे राशि नहीं मिल पा रही है।
जैसा कि मालूम है कि अचानक हुए बारिश और ओलावृष्टि के कारण किसानों की फसल चौपट हो गई  थी ।

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शासन ने इसे लेकर किसानों को मुआवजा राशि देने की बात कही थी।  फसल नुकसान की मुआवजा राशि किसानों के बैंक खाता में जमा की गई ।  किसान अपने बैंक खाता से राशि निकालने के लिये जिला सहकारी बैंक के 7 दिनों से चक्कर काट रहे है ।  लेकिन बैंक से उन्हें सिर्फ चक्कर काटने को मिल रहा है । बताया जाता है कि बैंक के अधिकारी कभी सर्वर की परेशानी तो कभी बिजली बंद या अन्य समस्या बताते है ।  जिसके कारण सुबह से आये किसानों को  शाम रात तक खाली हाथ निराश लौटना पड़ता है।

किसान अपने पैसों के इंतजार के लिए बैंक के बाहर सुबह से लाइन लगाकर खड़े होते है   । वही देखा गया है गर्मी एवं तेज धूप पड़ने के कारण किसान छाँव की तलाश में रहते है  । किसान धूप से बचने के लिए अपने स्थान पर अपना गमछा, चप्पल या अन्य समान रखकर लाइन में इन्तेजार करते है। बैंक के बाहर ना ही धूप से बचने के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था की गई   है और ना ही पानी पीने का कोई इंतजाम किया गया है ।  जिससे किसानों को और मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।  वही किसानों ने आरोप लगया है कि बैंक के कमर्चारी पैसो की मांग करते है  । जो पैसा देते है उन्हें दूसरे दरवाजे से चुपचाप राशि निकाल कर दे दी जाती  है  । जो लाइन में खड़े रहते है उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।जिला सहकारी बैंक प्रबंधक माधव चौहान ने कहा किसानों ने पैसो की मांग करते  कहा है वह पूरी तरह गलत है ।  कुछ तकनीकी समस्या के कारण परेशानी ही रही है  । जल्द ही व्यवस्था में सुधार कर लिया जाएगा ।

Comments

  1. By Ganga keshri

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