लोकसभा चुनाव मे आठ वीवीपैट मशीनों मे आई थी खराबी,विधानसभा चुनाव में खर्च की सीमा बढ़ाए जाने को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कही ये बात

नईदिल्ली।मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने शनिवार को कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान 22 हज़ार वीवीपैट की पर्चियों के मिलान में केवल आठ वीवीपैट में ही तकनीकी खराबी पायी गयी थी लेकिन उसका दूर- दूर तक कोई असर चुनाव के नतीजों पर नहीं पड़ा था।श्री अरोड़ा ने महाराष्ट्र तथा हरियाणा विधानसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा करने के वक्त एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन आठ वीवीपैट में मैकनिकल गड़बड़ियाँ थीं, उन क्षेत्रों में चुनाव में विजयी उम्मीदवार एक लाख से अधिक मतों के अंतर से जीते थे, इसलिए पर्चियों के मिलान में केवल 300-400 मतों के फर्क होने से नतीजे पर दूर-दूर तक प्रभाव नहीं पड़ा था। उन्होंने कहा कि फिर भी हम पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और इसे पूरी तरह ‘फुलप्रूफ’ बनाना चाहते हैं।उन्होंने बताया कि जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए थे तो उनके लिए बनाये गये एक लाख 36 हज़ार मतदान केंद्र में से केवल पांच या छह मतदान केन्द्रों पर ही गड़बड़ियाँ हुईं, जो बहुत कम हैं लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने दिन भर वही प्रसारित किया।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करे

लोकसभा चुनाव के दौरान सोशल मीडिया ने आचार चुनाव संहिता का उल्लंघन किया था, उसे देखते हुए आयोग इसके बारे में क्या कोई कानून बनाया जायेगा, मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि सोशल मीडिया के बारे में ब्रिटेन में कुछ कानून हैं। जर्मनी में कुछ कड़े कानून हैं लेकिन भारत में इसे नियंत्रित करने का कोई कानून नहीं है।उन्होंने कहा कि भारतीय दंड संहिता के कुछ प्रावधान हैं जिनका इस्तेमाल किया जा सकता है, पर कानून से कोई विशेष मदद नहीं मिलती लेकिन कोई लक्ष्मण रेखा पार करेगा तो कार्रवाई जरूर की जायेगी।

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यह पूछे जाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों को देखते हुए क्या कोई समय सीमा तय की जायेगी। श्री अरोड़ा ने कहा कि 99 प्रतिशत मामलों को 48 घंटे के अंदर निपटा दिया गया लेकिन उन्होंने श्री मोदी और श्री शाह के मामले का जवाब देने से यह कहते हुए कन्नी काट लिया कि अभी केवल हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव पर हम ध्यान केन्द्रित करें।यह कहे जाने पर कि शिवसेना ने विधानसभा चुनाव में खर्च की सीमा 28 लाख से बढ़कर 70 लाख करने की मांग की है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने दो टूक शब्दों में कहा कि 28 लाख से अधिक सीमा नहीं बढ़ाई जायेगी।

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