हवाई सेवा संघर्षः वक्ताओं ने कहा…हम जनआंदोलन को तैयार..छात्र नेताओं ने बोला..अन्याय बर्दास्त नहीं करेंगे

बिलासपुर—-हवाई सुविधा जन आंदोलन अखंड धरना के 48 वें दिन छात्र संगठन आशीर्दवाद पैनल ने राघवेन्द्र सभा भवन पहुंचकर समर्थन किया। आंदोलन का नगर की सामाजिक संस्थाओं ने समर्थन किया। सभी ने अपने संबोधन में बिलासपुर के लिए हवाई सेवा की मांग की दोहराया। साथ ही हवाई सेवा को बिलासपुर से दिल्ली, बंबई, बैंगलुरू और कोलकाता की मांग करते हुए आंदोलन को लक्ष्य हासिल होने तक चलाने को कहा । 

                    हवाई सेवा आंदोलन के 48 वें दिन धरना स्थल पर आशीर्वाद पैनल ने समर्थन किया। धरना में समाजिक संगठनों ने भी हिस्सा लिया। आशीर्वाद पैनल के  सदस्यों ने कहा कि बिलासपुर का इतिहास रहा है कि बिना जनसंघर्ष किये कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। इसलिए हवाई सुविधा के लिए सबको एक बार फिर मिलकर संघर्ष करना होगा। खुशी की बात है कि ऐसा हो भी रहा है। लोगों का संघर्ष अब इस जन आंदोलन का स्वरूप लेता जा रहा है।

           आशीर्वाद पैनल के अविनाश सेठी ने कहा कि बिलासपुर क्षेत्र व्यवसाय में बहुत पिछड़ गया है। हवाई सुविधा नहीं होने से बडी कंपनियां बिलासपुर आने से कतराती हैं। जिसके कारण निवेष नहीं हो रहा है। नतीजन स्थानीय युवकों को रोजगार के लिए बाहर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। हवाई सुविधा होने से एक साथ कई समस्या सुलझेंगी। रोजगार के दरवाजे खुलेंगे। बिलासपुर का तेजी से विकास होगा।

                           आषीर्वाद पैनल के सचिव दिनेश और आदित्य जोशी ने बिलासपुर एयरपोर्ट की
मांग को जोर शोर से उठाया। दोनों वक्ताओं ने कहा कि छत्तीसगढ और खासकर बिलासपुर राजस्व देने में अग्रणी है। लेकिन हम रायपुर से विकास के दौड़ में बहुत पीछे छूट गए हैं। यहां भी रायपुर की तरह सर्वसुविधायुक्त एयरपोर्ट बनाया जा सकता था। लेकिन बिलासपुर अन्जाने साजिश का शिकार हो गया।  

                 पैनल के धनेश और शिखा पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान में बिलासपुर एयरपोर्ट के आधे अधूरे कार्यों को तत्काल पूर्ण किया जाए। राशि भी आ चुकी है। इसके बाद महानगरों के लिए उड़ान की सेवाएं भी दी जाएं।

           धरना में शामिल शिक्षाविद् सहायक प्राध्यापक आभा तिवारी, सहायक प्राध्यापक सुषमा  ने जोश के साथ अपनी बातों को पेश किया। दोनों वक्ताओं ने दुहराया कि पिछले कई सालों से हवाई सुविधा अब प्रारंभ होगी तब प्रारंभ होगी सुनते आ रहे है। लेकिन परिणाम सामने नहीं आया।  इसलिए जन आंदोलन का विस्तार किया जाना जरूरी है। टीकेश प्रताप सिंह ने कहा कि बिलासपुर में केन्द्रीय विष्वविद्यालय है।  अमरकंटक में राष्ट्रीय आदिवासी विश्ववविद्यालय है। संभाग में बहुत से बडे कार्यक्रमों में विख्यात लोगों का एयरपोर्ट कमी के कारण आना नहीं होता है। धरने को प्रोफेसर आशीष शर्मा ने भी संबोधित किया। इसके अलावा सहायक प्राध्यापक  एम.एस.तम्बोली, रूपेन्द्र शर्मा, प्रदीप जायसवाल, किरण दुबे, तपोविंद सेठी, जितू ठाकुर, शिवा गेंदले, पुरूषोत्तम राजपूत, विनय अग्रवाल, चित्रकान्त निरद्वार, विकास सिंह, बृजेष बोले, हर्ष  सिंह, हिमेंश साहू, मनीश मिश्रा, राजा वर्मा, मनोज मेश्राम, समर्थ मिरानी, अमिताभ वैष्णव, नीरज गोस्वामी, शारदा श्रीवास, शिखा पाण्डेय, ऐन्जल, पायल, लिपिका, नेहा शर्मा , काजल, श्वेता कांत, अंषिका माहेश्वरी पारूल शर्मा, नंदनी शर्मा , पूजा रजक ने भी सभा को संबोधित किया।

                       धरने में उपस्थित समिति के सदस्य आषीश ठाकुर ने 1500 मीटर लंबे
बिलासपुर एयरपोर्ट रनवे को 2500 मीटर करने को कहा। आशीष ने कहा कि 78 सीटर विमान सेवा दिए जाने की बात कही। संबोधन में आशीष ने बताया कि ना केवल राज्य सरकार, केन्द्र सरकार बिलासपुर एयरपोर्ट के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध करा सकते है बल्कि एस.ई.सी.एल. और एन.टी.पी.सी. जैसे सार्वजनिक संस्थान भी  सीएसआर मद से आवश्यक राशि उपलब्ध करा सकते है।

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