सरकार को लेना होगा फैसला वापस.. कर्मचारी नेता सुनील ने कहा..हमें पता है अधिकार और कर्तव्य..होगी जंग

बिलासपुर—-शासकीय लिपिक संघ कर्मचारी नेता सुनील यादव ने राज्य शासन से वेतन कटौती कर्मचारी विरोधी आदेश को वापस लेने को कहा है। सुनील यादव ने कहा कहा कि एक दिन पहले राज्य शासन ने आदेश जारी कर मितव्यता का जिक्र किया है। और निर्देश दिया है कि अनेक योजनाओं को बंद करने के साथ कर्मचारियों की वेतन में कटौती होगी। शासकीय लिपिक संघ कर्मचारी नेता सुनील यादव ने कहा कि राज्य शासन ने कर्मचारी विरोधी आदेश जारी किया है। इससे प्रदेश भर के लाखों कर्मचारी सीधे प्रभावित हो रहे है। covid-  19 कोरोना वैश्विक महामारी से बचाव के लिए शासन को क्रांतिकारी कदम उठाना चाहिए था। लेकिन उसने कर्मचारी विरोधी आदेश जारी कर दिया है। जबकि रात दिन एक कर कर्मचारियों ने  कंधे से कंधा मिलाकर सरकार के आदेश का पालन करते हुए कोरोना से लगातार दो दो हाथ कर रहे हैं। उन्हीं कर्मचारियों को अब राहत की जगह साज देने का फरमान सरकार ने जारी कर दिया है। सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप NEWS ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये
 
              सुनील यादव ने कहा कि पड़ोसी राज्य उड़ीसा में कर्मचारियों की महंगाई भत्ता 10 प्रतिशत कर दिया गया है। जबकि छतीसगढ़ शासन ने पहले ही लंबित डीए को नही दिया है। साथ ही सातवा वेतनमान का एरियर्स राशि की क़िस्त भी लंबित है। इसके अलावा इसके गृह भाड़ा भत्ता चिकित्सा भत्ता को भी सातवे वेतनमान में बढ़ाया जाना था..लंबित है। 
     
               सरकार सबको दरकिनार करते हुए राज्य के स्थापना व्यय में कमी लाने का प्रयास कर रही है। मालूम होना चाहिए कि ऐसा करने से राज्य शासन को विशेष लाभ नही होने वाला है। हां  कर्मचारियों पर बहुत ज्यादा आर्थिक बोझ जरूर बढ़ जाएगा। सुनील यादव ने कहा कि सरकार के फैसले से कर्मचारियों में भयंकर असंतोष है। राज्य शासन को तुगलकी फरमान वापस लेना होगा। यदि सरकार फैसला नहीं लेती है तो कर्मचारी अपने हक की लड़ाई लड़ना जानते हैं। ट्रेड यूनियन सिद्धान्त के तहत  कर्मचारियो के महंगाई भत्ता समेत वेतन वृद्धि पर लगे रोक हटाने आंदोलन करेंगे।
    
          सुनील ने कहा कि इसकी जवाबदेही शासन के कर्मचारियों के अहित वाले आदेश निकालने वालो पर होगी। हमारे अधिकार के तहत वेतन भत्ते शासन को देना ही होगा।

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