अचानकमार,क्यों नहीं दिखता टाइगर ?

caption_pranchaddha(प्राण चड्ढा)छतीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व का जंगल घना इतना कि रौशनी सीधे जमीं तक कई जगह नहीं पहुंचती विविध वन्य जीव हैं, पर सैलानियों को यहां कम ही टाइगर दिखता है। जबकि यहां टाइगर की संख्या दहाई में होने का पार्क के अधिकारी दावा करते हैं। कैमरा ट्रेप में टाइगर दिखता है। फिर आखिर वो कम ही क्यों दिखता है?
वन्यजीव की स्वाभविक आदत है, मानव को देख कर भागना,या कभी कभार हमला करना।। सन 1795 में कैप्टन जे टी ब्लंट 6 मार्च को छतीसगढ़ में जंगली दुर्गम राह से अमरकंटक जाने के लिए रतनपुर की राह उड़ीसा से पकड़ी, महतिंन के पास टाइगर ने बैल को मारा था, ब्लंट को गाँव वालों ने बताया यदि वो टाइगर को मारे तो जंगल के टाइगर बदला लेंगे और गाँव को वीरान कर देंगे। ये बात शम्भू दयाल गुरु ने अपनी किताब में लिखी है। आज दशा बदल गई है, अब बाघों को बचाने टाइगर रिजर्व के गाँव विस्थापन आवश्यक है।
bagh_atr                                                                  अचानकमार टाइगर रिजर्व एरिया में 19 गाँव का विस्थापन बाकी है।इसमें 4 हज़ार से अधिक परिवार और उनके पालतू गाय भैंस हैं। सबका भार इस जंगल पर है। इस आवाजाही के बीच टाइगर का अपनी चिंता होगी। यहां बांधवगढ़, कान्हा,ताडोबा सा अर्ध पालतू टाइगर नहीं की जो जिप्सी के करीब आ कर सैलानियों के करीब चले और हमला भी न करे। या जिप्सी की आड़ कर शिकार पर टूट पड़े।ये रिजर्व क्षेत्र बायोस्फियर भी है, पर गाँव वाले अपने उपयोग के लिये लकड़ी लेने रोज़ जंगल जाते हैं। सारसडोल, अचानकमार,लमनी बड़े गाँव है,जहां की वानिकी जरूरतें भी यही से पूरी होती है। विस्थापन के इस चरण में इनके नाम शामिल नहीं।
टाइगर रिजर्व के जंगल में वन्य जीव के लिए अब तक सही व्यवस्था नहीं, गर्मी के पहले मनियारी नदी सूख रही है। वन्यजीव आबादी की और पानी की तलाश में आते है। सभी गाँव में कुत्ते हैं, जो चीतल देख शिकारी बन जाते हैं। कुछ कुत्ते मनियारी नदी में चीतल, कोटरी की तलाश में घूमते रहते है।
इस रिजर्व के सीने से शिवतारई से लमनी तक गुज़रने वाली सड़क को 21 जनवरी से बंद कर दिया गया है। पार्क मेंनेज़मेंट के सामने ये परीक्षा की घड़ी है कि बसे रहवासियों को वन्यजीवों के प्रति गाँववालों का आक्रोश न बने। ये परिवार अब कुछ सहूलियतों से वंचित हैं, उनको शीध्र नई जगह में बसाना होगा।
जबतक गाँव है,और तरह तरह के कार्य आबादी के कारण इस जंगल में हो रहे हैं, टाइगर सड़क तक आने आने वाला नही, आया तो रुकने वाला नहीं। जंगल काफा घना है, कुछ दूर तक ही दिखाई दिया है। उधर,प्रकृति ने टाइगर का रंग भी इस तरह बनाया है कि, वो हमें कई बार सड़क पर देख सकता है, पर खुद वो जंगल के संग इस रंग की वजह घुल मिल जाता है। वैसे भी पहले से टाइगर कम हुए हैं होने का लाभ ये है, विशालकाय बाइसन यहां झुण्ड में दीखते है। क्योकि इनका शिकार टाइगर ही करता है।बाइसन का शो सैलानियों के मन जीत लेता है। टाइगर न् दिखे तो ये दिखना उससे कमतर नहीं। पॉर्क में अब जब तक विस्थापन का कार्य पूरा नहीं होता, टाइगर केवल रात ट्रेप कैमरों में ही कैद होगा ।

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  1. By प्राण चड्ढा

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