झीरम हत्याकाण्डः पिता की मौत में सरकार जिम्मेदार…कर्मा की सुरक्षा में हुई लापरवाही

R_CT_RPR_545_30_JHEERAM_SUNWAI_VIS_VISHAL_DNGबिलासपुर– झीरम घाटी हत्याकाण्ड विशेष न्यायालय में आज कांग्रेस नेता स्वर्गीय महेन्द्र कर्मा के बेटे दीपक कर्मा से सुनवाई हुई। एक दिन पहले तो एडीजी इन्टेलिजेन्ट मुकेश गुप्ता का क्रास एक्जामिन हुआ था। आज विशेष न्यायालय में सरकारी वकील और जस्टिस प्रशान्त मिश्रा ने भी दीपक कर्मा से सवाल जवाब किए।

                     न्यायालय को दीपक कर्मा ने बताया कि झीरम नक्सलकाण्ड में बेशक प्रदेश ने नेता को खोया। लेकिन मैने अपने पिता को खोया है। दीपक कर्मा ने शपथ के साथ पिता का एक पत्र भी न्यायालय को दिया। दीपक कर्मा ने बताया कि महेन्द्र कर्मा ने हमेशा नक्सलियों के खिलाफ संघर्ष किया। नक्सलियों की गतिविधियों में महेन्द्र कर्मा सबसे बड़े बाधक थे। इसलिए मेरे पिता हमेशा नक्सलियों के निशाने पर रहे। मौका पाते ही नेता प्रतिपक्ष को नक्सलियों ने मार दिया।

                              जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने सवाल किया कि पहले एनआईए से क्यों नहीं शिकायत की या अपनी बातों को एनआईए के सामने क्यों नहीं रखा। दीपक कर्मा ने बताया कि उस पूरे घर में मातम और गम का माहौल था। मुझे इस मामले को लेकर बहुत अधिक जानकारी भी नहीं थी। ना ही मुझे ने एनआईए ने ही बुलाया। जानकारी नहीं होने के कारण एनआईए के सामने नहीं गया।

       जस्टिस प्रशांत ने दीपक कर्मा से फिर पूछा इस बार भी न्यायिक आयोग ने नहीं बुलाया। तो फिर क्यों और कैसे चले आए।कर्मा ने बताया कि रायपुर स्थित पिता जी के कार्यालय गया था। जांच पड़ताल के दौरान मुझे एक चिठ्ठी मिली। चिठ्ठी आंख खोल देेने वाली और जांच कार्रवाई में मददगार हो सकती है। इसलिए शपथ पत्र के साथ न्यायालय में पत्र जमा किया। गवाही देने आया हूं। कर्मा ने बताया कि पिता जी के जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया था। जानकारी नहीं होने से एनआईए नहीं गया।

                   ,कर्माा ने आयोग से कहा कि रायपुर पिता के आफिस में गया। वहीं सामानों के बीच एक ऐसा पत्र मिला। जिससे सुनवाई को मदद मिल सकती है। पत्र को कोर्ट में पेश कर दिया है। इस दौरान सरकारी वकील ने भी दीपकर कर्मा से जरूरी सवाल किए। दीपक कर्मा ने कहा कि पिता की सुरक्षा में लापरवाही हुई है। मेरे पिता को सरकार ने मार डाला।

                       खबर लिखे जाते समय दूसरे सत्र की सुनवाई चल रही थी।

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