निगम कर्मचारियों ने घेरा विकास भवन…रैली निकालकर विरोध…17 सूत्रीय मांग के साथ आंदोलन की दी चेतावनी

बिलासपुर—नगर निगम के विभाग में काम करने वाले अस्थाी कर्मचारियों ने आज जुलूस निकालकर निगम प्रशासन पर दबाव बनाया। रैली की शक्ल में विकास भवन पहुंचकर 17 बिन्दु वाला मांग पत्र दिया। मांग पूरी नहीं होने की सूरत में सभी अस्थायी कर्मचारियों ने उग्र आंदोलन और काम काज बंद करने का भी एलान किया। निगम कर्मचारियों की मांग पर जनता कांग्रेस,आम आदमी पार्टी समेत सभी दलों ने कर्मचारियों की मांग का समर्थन किया।

                       रैली की शक्ल में निगम प्रशासन के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने विकास भवन पहुंचकर 17 सूत्रीय मांग को पेश किया है। कर्मचारी नेता सीताकांत जोशी,जनता कांग्रेस नेता विश्वम्भर गुलहरे और आम आदमी पार्टी  बिलासपुर लोकसभा अध्यक्ष जसबीर सिंग ने बताया कि ठेका प्रथा समाप्त किया जाए। कर्मचारियों को महीनों वेतन नहीं दिया जाता है। ठेकेदारी प्रथा में काम करने वाले कर्मचारियों को सालों से शोषण किया जा रहा है।

                                     रैली में शामिल नेताओं ने बताया कि सीमित वेतन और संसाधनों में मजदूरों से काम लिया जाता है। हमने प्रशासन को 17 बिन्दु का मांग पत्र निगम प्रशासन को दिया है। मांग पत्र में महीने की तीन तारीख तक वेतन दिए जाने के अलावा ठेकेदारी प्रथा को बंद किए जाने को कहा है। इसके अलावा निगम में लम्बे समय से काम करने वाले कर्मचारियों को नियमितीकरण,पेंशन,वर्दी,समय वेतनमान,पदोन्नति,अनुकम्पा नियुक्त कर्मचारियों के लिए की मांग मंगला और मधुबन क्षेत्र के खाली जमीन में की है।

                      नेताओं ने बताया कि ठेकेदार मजदूरों का शोषण करते हैं। कोर्ट के निर्देशानुसार ऐसे ठेकेदारों से 1 करोड़ की राशि वसूलकर कर्मचारियों को देने को कहा गया है। निगम के सभी विभागों में ड्रायवर के पद पर काम करने वाले सभी ड्रायवरों की पद्दोन्ति पात्रता अनुसार किया जाए। सम्पत्ति कर की वसूली ठेके पर ना करवाकर निगम कर्मचारियों के माध्यम से हो। ठेके में काम करने वाले कर्मचारियों का ईपीएफ काटा जा रहा है। काटे गए वेतन का विवरण पत्र सभी कर्मचारियों को दिया जाए।

                             कर्मचारी नेताओं के साथ आम आदमी पार्टी और जनता कांग्रेस के नेताओं ने मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।  रैली में भारी संख्या में महिला और निगम कर्मचारी शामिल थीं।

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