तीन दिवसीय तातापानी महोत्सव में शिरकत करेंगे मुख्यमंत्री भूपेश बधेल

रामानुजगंज (पृथ्वीलाल केशरी बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की पहचान बन चुके तातापानी महोत्सव में इस वर्ष जहां लोक कला की छटा बिखरेगी,वहीं बालीवुड का अंदाज भी स्टेज पर नजर आएगा। प्रशासन द्वारा महोत्सव को एक पहचान देने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। तातपानी महोत्सव को लेकर जिला प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव को लेकर अब प्रदेश सहित आसपास के राज्य के लोगों में भी आकर्षण रहता है। लोगों की उम्मीद पर खरा उतरने के लिए इस आयोजन को प्रदेश ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने के लिए प्रशासन युद्ध स्तर पर तैयारी कर रहा हैं।

तातापानी तातापानी महोत्सव 2019 का शुभारंभ 14 जनवरी मंकर संक्रांति को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा किया जायेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास,लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण,चिकित्सा शिक्षा,योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी,20 सूत्रीय वाणिज्यिक कर मंत्री टी.एस.सिंहदेव करेंगे।

विशिष्ठ अतिथि के रूप में लोक निर्माण,गृह एवं जेल,धर्मस्व,पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहु,विधायी कार्य,कानून,कषि और जैव प्रोद्योगिकी,पशुपालन,मत्स्य पालन,आयकट,जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे,स्कूल शिक्षा,अनुसूचित जाति,जनजाति,अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण,सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम,परिवहन,आवास और पर्यावरण,वन खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षक मंत्री मोहम्मद अकबर,वाणिज्यिक कर आबकारी,वाणिज्य और उद्योग मंत्री कवासी लखमा,नगरीय प्रशासन एवं विकास,श्रम मंत्री डॉ.शिव कुमार डहरिया, महिला एवं बाल विकास,समाज कल्याण मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया,राजस्व और आपदा प्रबंधन,पुनर्वास,वाणिज्यिक कर पंजीकरण और मुद्रांक मंत्री जयसिंह अग्रवाल,उच्च शिक्षा,तकनीकी शिक्षा और रोजगार,कौशल विकास,विज्ञान और प्रोद्योगिकी,जनशक्ति नियोजन,खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल,लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग,ग्रामोद्योग मंत्री गुरू रूद्र कुमार, सरगुजा सांसद कमल भान सिंह,राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम,रामानुजगंज विधायक बृहस्पत सिंह,सामरी विधायक चिंतामणी महाराज एवं जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पुषा नेताम उपस्थित रहेंगी।

तातापानी महोत्सव का शुभारम्भ 13 जनवरी को करेंगे स्कूल शिक्षा मंत्री 
तातापानी महोत्सव 2019 संक्रांति परब के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव कार्यक्रम का शुभारम्भ 13 जनवरी 2018 को होगा। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्यअतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा,अनुसूचित जाति,जनजाति,अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण,सहकारिता मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम द्वारा किया जायेगा।
तातापानी महोत्सव में होंगे रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम
तीन दिवसीय तातापानी संक्रांति परब के अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। 13 जनवरी को सांय काल 7.00 बजे से छत्तीसगढ़ी गायक दीपक चंद्राकर एवं लखनलाल देवांगन द्वारा छत्तीसगढ़ी कार्यक्रम की प्रस्तुति दी जायेगी। साथ ही स्थानीय कलाकार आदित्य एवं चंद्रिका झनक द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी जायेगी। 14 जनवरी को सांयकाल 7.00 बजे से छत्तीसगढ़ी लोक कलाकार अनुज शर्मा एवं ग्रुप,गायक  अनिल श्रीवास्तव,भोजपुरी गायक राकेश मिश्रा,नृत्यकला मोनिका रॉय एवं स्थानीय प्रस्तुति स्तुति जायसवाल एवं ग्रुप तथा 15 जनवरी को भोजपुरी प्रस्तुति पवन सिंह एवं ग्रुप,अमृता दीक्षित,आनंद मोहन, सुधीर सिंह छोटू एवं स्थानीय गायक दिपेन्द्र मंडल द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। साथ ही इस तातापानी महोत्सव में एडवेंचर गेम,पैरासिलिंग एव अन्य आकर्षण का केन्द्र रहेगा।
अवैध पार्किंग पर होगी कार्रवाई  
नोडल अधिकारीयो में जिला पंचायत सीईओ शिव अनंत तायल एवं एसडीएम रामानुजगंज दुर्गेश वर्मा  ने बताया कि पिछले वर्ष महोत्सव के दौरान पार्किंग स्थल के अलावा अन्य जगहों पर पार्किंग व मेला में दो पहिया व चार पहिया वाहन के प्रवेश से हुई अव्यस्था की शिकायत मिली थी। इसे ध्यान मे रखते हुए प्रशासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि इस वर्ष महोत्सव के दौरान अवैध पार्किंग व भीड़ में वाहन ले जाने वालों के खिलाफ एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। बिना पंजीयन के दुकान लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
प्राचीन काल से है मेले की परम्परा
गर्म पानी निकलने के कारण ही इस क्षेत्र का नाम तातापानी पड़ा है। प्राचीन समय से सरगुजा संभाग में शैव संप्रदाय का वर्चस्व रहा है। भगवान शिव को मानने वाले इस क्षेत्र में काफी हैं। यहां भगवान शिव की काफी प्राचीन मूर्ति है। गांव में ऐसी दंत कथा प्रचलित है  कि हजारो वर्ष पूर्व यहां भगवान शिव व पार्वती सहित अन्य देवी-देवता भी यहां पहुंचे थे। उन्होंने ही यहा गर्म जल का कुंड छोड़ा था। इस कारण से यहां गर्म पानी निकलता है। ठंड के दिन में इस गर्म पानी से स्नान करने की परंपरा चली आ रही है। शैव सम्प्रदाय में मेले का काफी महत्व था और राजसी समय से यहां मेले का आयोजन किया जाता रहा है। मेले में आसपास के लोग यहां एकत्रित होकर पूजा-अर्चना करने के साथ सप्ताह भर मेले का मजा लेते थे। उसी परम्परा का निर्वहन आज तक किया जा रहा है। इसे अब प्रशासन ने व्यापक स्वरूप प्रदान कर दिया है।

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