कोरोना पीड़ितों के घर गए नहीं…और पुनिया की भी नहीं सुनी-मंत्री के स्वागत में निकाल दी बारात…जमीन माफ़ियाओं को भी मिल गया मौक़ा,कांग्रेस अध्यक्ष केशरवानी भी सवालों के घेरे में

बिलासपुर।हाल ही में नए बनाए गए प्रभारी मंत्री जयसिंह अग्रवाल के स्वागत के दौरान सड़क पर उत्तरी लापरवाही को लेकर बिलासपुर जिला कांग्रेस कमेटी ( ग्रामीण)  के अध्यक्ष विजय केशरवानी सवालों से घिरने लगे हैं। यह मामला उन पर भारी पड़ सकता है। कांग्रेस के अंदरखाने से यह बात भी निकल कर आ रही है कि पार्टी की प्रदेश प्रभारी पी.एल. पुनिया ने कांग्रेस जनों को कोरोना की वजह से मृत लोगों के घर पहुचकर उनके परिवारज़न के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करने की  हिदायत दी थी। लेकिन ना तो कांग्रेस भवन में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ और नहीं कोई कोरोना पीड़ितों के घर गया।लेकिन पुनिया की बात भी नहीं सुनी गई….. उल्टा बिलासपुर में कोरोना की गाइडलाइन को खुलेआम ठेंगा दिखाकर बिलासपुर की सड़कों में स्वागत का प्रदर्शन कर दिया गया। जिसकी वजह से जमीन माफियाओं को करीब आने का मौका मिल गया और बिलासपुर को जमीन माफियाओं की राजधानी बताने वाली भाजपा को भी एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। इसके साथ ही अब जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष के खिलाफ और भी पुरानी शिकायतें उभरने लगी हैं।

जैसा कि मालूम है कि पिछले शुक्रवार को जिले के प्रभारी मंत्री यह नई जिम्मेदारी संभालने के बाद पहली बार बिलासपुर पहुंचे तो उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। सड़कों पर लोगों की भीड़ जमा हुई ,सड़क जाम हुई और गाजे-बाजे पटाखे के साथ अगवानी की गई। कोरोना काल में जब तमाम सार्वज़निक कार्यक्रमों में रोक लगी हुई है, तब इस सरेआम प्रदर्शन को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। साथ ही इस आयोजन की वजह से जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी सवालों में घिरते जा रहे हैं। लोगों के बीच अहम् सवाल यह है कि स्वागत के जरिए किस तरह का संदेश देने की कोशिश की गई है…?  क्या यह बताया गया है कि इसके पहले के प्रभारी मंत्री अलोकप्रिय थे……? और उन्हें हटाए जाने की ख़ुशी में ताकत की नुमाइश की गई है। सामान्य तौर पर प्रभारी मंत्रियों की अदला-बदली एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। लेकिन शुक्रवार के प्रदर्शन कुछ ऐसा था जिसके जरिए यह बताने की कोशिश की गई कि पहली बार किसी को प्रभारी मंत्री बनाया गया है।

कांग्रेस संगठन से जुड़े तमाम पदाधिकारियों को इस बात की पूरी जानकारी है कि हाल ही में कुछ दिन पहले कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने वर्चुअल बैठक ली थी। जिसमें प्रदेश संगठन के साथ ही जिला कांग्रेस के अध्यक्ष भी शामिल हुए थे ।इस बैठक में पीएल पुनिया ने हिदायत दी थी कि जिन परिवारों में कोरोना की वज़ह से लोगों की मौत हुई है,  उन सभी घरों तक कांग्रेस के लोग पहुंचे। कांग्रेस संगठन ने कुछ समय पहले कोरोना से मृत लोगों की सूची भी मंगाई थी। इधर कोरोना की दूसरी ल़ह़ऱ के दौरान बिलासपुर के पूर्व सांसद डॉ. खेलन राम जांगड़े ,वरिष्ठ नेत्री पूर्व सांसद श्रीमती करुणा शुक्ला और बसंत शर्मा जैसे कांग्रेस के लोगों का निधन हुआ। लोग उम्मीद कर रहे थे कि इन नेताओं के योगदान को याद करते हुए कांग्रेस भवन में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। लेकिन न तो कोई कोरोना पीड़ितों के घर गया और ना ही कांग्रेस भवन में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। ऊपर से कोरोना की गाइडलाइन को ठेंगा दिखाते हुए सड़क पर स्वागत – सत्कार का खुला प्रदर्शन कर दिया गया। साथ ही छत्तीसगढ़ भवन में सामूहिक भोज का भी आयोजन किया गया ।दिलचस्प सीन यह भी है कि टीआरपी बटोरने के लिए पेट्रोल – डीज़ल की मंहगाई के ख़िलाफ़ प्रदर्शन ख़टिया पर बैठ़कर किया जाता है और अपनी ही पार्टी के भीतर अपनी ताक़त की नुमाइश करने सड़क पर उतरने से भी गुरेज़ नहीं है। कांग्रेस के लोग मान रहे हैं कि इस प्रदर्शन से आम लोगों के बीच अच्छा संदेश नहीं गया है। वैसे भी इस समय जब लोगों को बारात निकालने की इजाजत नहीं है और दूसरे जुलूस – प्रदर्शन पर भी रोक है…. और सबसे अहम् बात यह है कि डेल्टा प्लस और तीसरी लहर से बचने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खुद भी सावधानी बरतने की अपील जारी की है। ऐसे समय में कांग्रेस के जिम्मेदार लोगों के दिमाग में यह बात कैसे नहीं घुस सकी कि इस तरह का आयोजन अभी नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि कांग्रेस के भीतरखाने से यह खबर भी मिल रही है कि प्रभारी मंत्री के ऐतिहासिक स्वागत के लिए संगठन के कुछ और बड़े पदाधिकारियों से भी सलाह मशविरा किया गया था। जिस पर उन्होंने सलाह दी थी कि सार्वजनिक रूप से स्वागत सत्कार की बजाए प्रभारी मंत्री कांग्रेस भवन में संगठन के प्रमुख लोगों से व्यक्तिगत मुलाकात कर सकते हैं। लेकिन संगठन में नई लकीर खींचने का उत्साह इतना अधिक ज़ोर मार रहा था  कांग्रेस के ही कुछ लोग अपनी इस इच्छा को नहीं रोक सके। जिससे इस तरह की स्थिति सामने आई ।

कांग्रेस के लोग इस बात को भी संजीदगी से ले रहे हैं कि जिला कांग्रेस कि इस चूक की वजह से जमीन माफियाओं को भी मंत्री के नजदीक आने का मौका मिला। जिन्होंने इश्तहार में भी अपनी खुशी का इजहार किया और महामाया चौक से लेकर बाकी के रास्ते में स्वागत का भरपूर इंतजाम किया। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि यह खर्च किसके कहने पर…. किसने किया इसका भी पता लगाया जाना चाहिए। कांग्रेसियों में इस बात की भी बड़ी चर्चा है कि इस आयोज़न के बहाने जमीन माफियाओं को नजदीक लाकर एक तरह से बीजेपी के उस आरोप को सही साबित करने की कोशिश खुद कांग्रेसियों ने कर दी …….. जिसमें बीजेपी ने बिलासपुर शहर को जमीन माफियाओं की राजधानी बताया है। भाजपाइयों की ओर से प्रचारित की जा रही “जमीन माफियाओं की राजधानी में नए राजा का स्वागत” भाजपाइयों को नई ताकत दे गया है । जिसका इस्तेमाल वे आगे भी करते रहेंगे।

राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि पहले से ही बिलासपुर में आपस में लड़ रहे कांग्रेस के दो खेमों के बीच एक तीसरे खेमे की बुनियाद रखने के मकसद से नई जुगलबंदी के साथ प्रदर्शन किए जाने के बाद जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष पर ही तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। भीतरखाने की खबर यह भी है कि अध्यक्ष के खिलाफ पुरानी शिकायतें फिर उभर रही हैं। ज़िससे पता लगता है कि  जिले के कांग्रेस संगठन में सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है। करीब सभी ब्लॉक में जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने खुद खेमेबंदी खड़ी कर रखी है ।जिसकी एक वजह यह भी है कि दूसरी पार्टियों से आए लोगों को पार्टी की कमान सौंपी गई है और पहले से ही ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे कांग्रेस के लोग इससे नाराज हैं। कोटा के पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ने खुले तौर पर रुपए की हेराफेरी का आरोप लगाया था। उन्हें अपने पद से हटा दिया गया । लेकिन उस आरोप का सच अब तक सामने नहीं आ सका है। मस्तूरी और बिल्हा ब्लॉक में भी कुछ इसी तरह के हालात हैं। स्टूडेंट पॉलिटिक्स के हिसाब से कांग्रेस को संगठन को चलाने की कवायद पार्टी के लिए भारी नुकसानदेह साबित हो रही है। हालत यह है कि अब तक जिला कांग्रेस कमेटी नई कार्यकारिणी की औपचारिक मीटिंग भी नहीं हो सकी है। कार्यकारिणी में शामिल करीब आधे लोग ऐसे हैं जो एक दूसरे को पहचानते भी नहीं ।  

ब्लॉक कांग्रेस की कार्यकारिणी का भी गठन नहीं हो सका है। लेकिन मंत्री के स्वागत में किसी तरह की कमी नहीं हुई। । गौरतलब़ यह भी है कि प्रभारी मंत्री की मौज़ूदगी में कांग्रेस भवन में किसी भी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष को बोलने का मौक़ा भी नहीं दिया गया और फ़ुल पेज के इश्तहारों में भी ब्लॉक अध्यक्षों को ज़गह नहीं मिल सकी।  आज के दौर में जब  सरकार और संगठन के तमाम कार्यक्रम वर्चुअल आयोजित किए जा रहे हैं। भीड़ से बचने के लिए समय-समय पर गाइडलाइन जारी की जा रही है। ऐसे समय में सड़क पर ताकत की नुमाइश के पीछे जो भी वजह रही हो। लेकिन शहर में जमीन का कारोबार और दलाली करने वालों को मौका मुहैया कराने की यह कोशिश सड़क पर आ गई। इससे कांग्रेस संगठन की किरकिरी ठीक उसी तरह हो रही है जैसे दूसरी लहर के पहले रायपुर में क्रिकेट के आयोजन को लेकर हुई थी। निश्चित रूप से यह मुद्दा आगे भी और गरमाएगा।  शुक्रवार को प्रभारी मंत्री के दौरे की तस्वीरें …..इस प्रदर्शन में खुलकर सामने आई खामियां, कोरोना गाइडलाइन की अनदेखी और जमीन माफियाओं को संरक्षण के मामले में सभी तथ्यों और तर्कों के साथ शिकायतें ऊपर तक पहुंचाए जाने की खबर मिल रही है। जाहिर सी बात है कि यह पूरा आयोजन कांग्रेस संगठन के दिशा निर्देशों को धत्ता बताकर किया गया है। लेकिन अब देखना यह है कि ऐसे मामले में संगठन किस तरह की कार्यवाही करता है। कांग्रेस संगठन के बड़े पदाधिकारियों को इस बात का भी एहसास है कि बिलासपुर में कांग्रेस संगठन के साथ विवादों का पुराना नाता रहा है। विवादों के चलते संगठन के कुछ पदाधिकारियों को हटाने की कार्यवाही हाल ही में की गई है।हाल के ही दिनों में ज़मीन विवाद भी सुर्ख़ियों में रहा है । ट्रेफ़िक सिपाही के साथ बदसलूकी के मामले में एक पदाधिकारी का नाम अब भी चर्चा में हैं ।  । ऐसे में आने वाले समय में संगठन को बेहतर करने और खामियों को दूर करने के लिए संगठन की ओर से बड़ा एक्शन लिया जा सकता है …..इसके संकेत भी मिल रहे हैं।

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