बीज़ेपी – कांग्रेस की बालिंग में खुलकर बैंटिंग कर रहे धर्मज़ीत सिंह ….. किस टीम से खेलेंगे अगला मैच……?

रुद्र अवस्थी।धर्मजीत सिंह लोरमी विधानसभा सीट से कई बार के विधायक हैं । वे छत्तीसगढ़ और बिलासपुर इलाके की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान रखते हैं । धर्मजीत सिंह संघर्ष से निकले नेता हैं और आज भी संघर्ष से पीछे नहीं हटते ।धर्मज़ीत सिंह सियासी मैदान के पुराने -धुरंधर खिलाड़ी हैं।  इन दिनों खुली पिच पर खुलकर बैटिंग कर रहे हैं और अपनी बैटिंग तकनीका इस्तेमाल कर भाजपा और कांग्रेस दोनों तरफ के गेंदबाजों की फास्ट बोलिंग, फिरकी -गुगली सभी का कुशलता से जवाब दे रहे हैं।  हालांकि सियासत के इस मंजे हुए खिलाड़ी के साथ पिछले कुछ समय से यह सवाल भी नत्थी हो गया है कि कांग्रेस और फिर अजीत जोगी की जोगी कांग्रेस की ओर से लंबी पारी खेल रहे धर्मजीत सिंह अब अगला टेस्ट मैच किसके साथ – किस टीम की ओर से खेलेंगे । यही वजह है कि नेताओं के साथ उनकी मुलाकात सुर्खियां बन जाती हैं।  मरवाही उपचुनाव के दौरान आखिरी लम्हों में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के साथ उनकी मुलाकात से यह सवाल उछला कि क्या धर्मजीत सिंह अब भाजपा का दामन थामेंगे …? इसी हफ्ते बिलासपुर के दौरे पर आए डॉ रमन सिंह से मिलकर जब धर्मजीत सिंह ने गुलाब के फूलों से भरा गुलदस्ता सौंपा तो फिर यह तस्वीर वायरल हो गई और लोग इसे धर्मजीत सिंह के बीजेपी में दाखिल होने के रास्ते के रूप में देखने लगे । इत्तेफाक की बात है कि इस सियासी इवेंट के एक दो दिन बाद ही धर्मजीत सिंह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुलाकात हो गई । धर्मजीत सिंह के विधानसभा क्षेत्र लोरमी में लालपुर के गुरु घासीदास जयंती समारोह में शिरकत करने आए भूपेश बघेल ने जलसे के दौरान धर्मजीत सिंह से बंद कमरे में आधे घंटे से अधिक का समय गुजारा तो एक बार फिर सवाल लाज़िमी है  कि क्या अब धर्मजीत सिंह कांग्रेस में शामिल होंगे…? 

 इतना ही नहीं गुरु घासीदास जयंती समारोह के इस सार्वजनिक मंच से धर्मजीत सिंह ने सीएम भूपेश बघेल की जमकर तारीफ की और एग्रीकल्चर कॉलेज से लेकर लोरमी इलाके की दूसरी अन्य सुविधाओं के लिए उनका आभार माना । अब तक धुर विरोधी समझे जाने वाले धर्मजीत सिंह के बोल बचन से सवाल और भी गहराता गया कि क्या धर्मजीत सिंह अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में लौट जाएंगे।  अंदर खाने की खबर मिल रही है कि लोरमी इलाके से लगातार कई बार चुनाव जीत चुके धर्मजीत सिंह ने अब तक मन में नहीं बनाया है कि वे किस पार्टी में शामिल होने वाले हैं ।  लेकिन उनका रुख देखकर यह माना जा रहा है कि वह अपनी मौजूदा पार्टी से रुखसत होने की तैयारी कर चुके हैं ।  बहरहाल उनके लिए लोरमी के साथ ही तखतपुर , पंडरिया ,कोटा और कवर्धा जैसी कई  विधानसभा सीटों को सुरक्षित माना जा रहा है । फिलहाल वे क्रिज़ पर जमे रहकर खुलकर बैटिंग कर रहे हैं और आने वाला वक्त ही बता सकेगा कि वे अगला टेस्ट किस टीम के साथ रहकर खेलने वाले हैं….?

भूपेश सरकार के दो साल …. डॉ. रमन सिंह की नज़र में

छत्तीसगढ़ की मौजूदा भूपेश सरकार के 2 साल पूरे होने पर  अपने-अपने घर -आंगन -गली –सड़क- चौक -चौराहे –गांव- शहर में खड़े होकर लोग बूझ रहे हैं कि इन 2 सालों में क्या बदला और हमें क्या मिला ….? इस मौके पर बिलासपुर के दौरे पर आए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने लोगों को यह समझाने की कोशिश की कि 2 साल में छत्तीसगढ़ को कुछ नहीं मिला।  सरकार पटरी से उतर गई है । लिकर ,लैंड, सेंड और कोल माफियाओं का बोलबाला हो गया है ।  उन्होंने 15 साल बनाम 2 साल की तुलना कर सवाल उछाल दिया कि 2 साल में कितनी सड़क बनी,कितने उद्योग और अस्पताल खोले गए …..वगैरह-वगैरह….।  15 साल तक छत्तीसगढ़ में सरकार चला चुके डॉ रमन सिंह  अब विपक्ष में है और सरकार के कामकाज को लेकर उनकी यह प्रतिक्रिया स्वाभाविक है ।जाहिर सी बात है कि जैसे केंद्र की मोदी सरकार के कामकाज की आलोचना पर बीजेपी के लोग लोकसभा में अपनी 300 से अधिक सीटों की ओर इशारा करते हैं । वैसे ही छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लोग विधानसभा की अपनी 70 सीटों की ओर उंगली दिखा कर यह जवाब दे सकते हैं कि प्रदेश की जनता उनके साथ है । दोनों तरफ की दलीलें अपनी जगह है और जमीनी हकीकत अपनी जगह है।  सही गलत के फैसले के लिए जम्हूरियत में सियासतदानों की बजाय आम आदमी के स्टेटमेंट पर गौर करना पड़ेगा ही बेहतर होगा । जो सही वक्त आने पर अपना सही फैसला सुनाता है ।

 अमित जोगी की कहानी में फिर संतकुमार

मरवाही विधानसभा के चुनाव हो गए ।  कांग्रेस ने इसमें जीत हासिल कर ली । चुनाव के दौरान अमित जोगी और उनकी पत्नी ऋचा जोगी के पर्चे खारिज हो गए । करीब दो दशक के बाद पहला मौका है, जब मरवाही सीट से जोगी परिवार को नुमाइंदगी का मौका नहीं मिल सका । इस छोटी सी  सियासी कहानी यह छोटा सा स्क्रिप्ट दो – तीन महीने पहले लिख़ा गया था । इस नतीजे के साथ ही कहानी खत्म हो गई । कांग्रेस पार्टी और प्रशासन में बैठे लोगों के रवैया से तो कुछ ऐसा ही लगता है की जोगी की जाति के मामले में अब पूरी तरह से फुल स्टाप लग गया है । लेकिन जोगी की जाति के मामले को लेकर पिछले कोई दो दशक से सीधी और लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं आदिवासी नेता संत कुमार नेताम के रुख से लगता है कि वे  इसे कहानी का सुखांत या दुखांत नहीं मान रहे हैं।  उनके नजरिए से इस किस्से में और भी कई सीन आना बाकी है । तभी तो अब संत कुमार नेताम फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले में अमित जोगी के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं । उन्होंने इस हफ्ते गौरेला जाकर थाने में लिखित शिकायत दी और गौरेला -पेंड्रा -मरवाही जिले के पुलिस कप्तान से भी मिले।  उनकी दलील है कि छानबीन समिति की रिपोर्ट आने के बाद अब यह साफ हो गया है कि अमित जोगी आदिवासी नहीं है । ऐसे में अब तक आदिवासी जाति जाति प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने जो भी लाभ लिया है ,उसे देखते हुए अमित जोगी के खिलाफ धोखाधड़ी- फर्जीवाड़े का जुर्म दर्ज होना चाहिए। उनक़ा तो यह भी कहना है कि प्रशासन के लोगों को इस आधार पर खुद से आगे आकर धोखाधड़ी का जुर्म दर्ज कराना चाहिए था । लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद जब प्रशासन में बैठे लोगों ने इसकी सुध नहीं ली तो उन्हें फिर हमेशा की तरह आगे आना पड़ा है ।  संत कुमार नेताम को के इस नए आवेदन पर गोरेला पुलिस ने कोई रिस्पांस नहीं दिया । संत कुमार का कहना है कि जिले के एसपी ने उनसे आवेदन लेने से भी इनकार कर दिया । अब वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से मिलकर गुहार लगाने वाले हैं ।  अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद कि छत्तीसगढ़ इकाई के प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत से वह इस लड़ाई को और आगे ले जाने की तैयारी में है । इसमें उन्हें कब तक कामयाबी मिली मिल पाएगी यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

बीजेपी को नए तरीके की ट्रेनिंग की ज़रूरत

लोग अक्सर कहते हैं कि बीजेपी हमेशा चुनाव के मूड में रहती है और अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय –  गतिशील बनाए रखने के लिए समय-समय पर ट्रेनिंग भी देती रहती है । ऐसी ही ट्रेनिंग बिलासपुर में भी पार्टी कार्यकर्ताओं को दी गई । जिसमें सांसदों, विधायकों और बड़े नेताओं ने जमीनी कार्यकर्ताओं को केंद्र सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही प्रदेश सरकार की खामियों को उजागर करने की समझाइश दी ।  इत्तेफाक से इसी हफ्ते छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह का दौरा भी हुआ।  आयोजन के बीच में पार्टी के दो नेताओं के बीच तनातनी की खबरें खूब वायरल हुई । जिसके जरिए यह समाचार बाहर आया कि पार्टी के बड़े नेता  और प्रदेश में बड़े पद पर रहे अल्पसंख्यक समुदाय के एक नेता के बीच बैठने की जगह को लेकर तनातनी हो गई । हालांकि जलसे के बाद मीडिया से बात करते हुए दोनों नेताओं ने एक दूसरे को अपना बड़ा और छोटा भाई बता दिया।  साथ ही किसी तरह के विवाद से साफ-साफ इंकार भी कर दिया । अगर दोनों की बात सही है तो पार्टी के अंदर कहीं कोई विवाद की स्थिति नहीं है।  लेकिन अगर कोई खबर चर्चा में आई है तो उस पर बात तो होगी ही और लोगों को यह कहने का मौका भी मिल रहा है कि भाजपा के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है । जिस तरह इस कार्यक्रम के बाद ….” अभी तो यह अंगड़ाई है …..” का नारा लगा । उससे लगता है कि संगठन पदाधिकारी को लेकर कार्यकर्ताओं और छोटे पदाधिकारियों के बीच सुलग रहा गुस्सा आगे भी फूट सकता है। ज़िससे पार्टी को बचाने के लिए अलग तरह की ट्रेनिंग की ज़रूरत होगी । ताकि पार्टी संगठन के ओहदेदार अपने ज़मीनी कार्यकर्ताओँ के साथ सही में भाई जैसा वर्ताव कर सकें।

ग्रीन पार्क में वारदात के बाद उठ रहे सवाल

पुलिस महकमे से खबर आई की ट्रैफिक पुलिस की पेट्रोलिंग पार्टी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया । पुलिस कर्मियों को वायरलेस भी बांटे गए और इस दस्ते को अपडेट भी किया गया ।  जिससे ट्रैफिक की व्यवस्था सुधारी जा सके।  कुल मिलाकर पुलिस टीम को और अधिक मुस्तैद बनाने की कवायद की जा रही है । यह शहर के लोगों के लिए अच्छी खबर है । लेकिन इसी हफ्ते एक ऐसी खबर भी आई .जिसने लोगों का दिल दहला दिया । खबर के मुताबिक रात की पहली पहर में शहर के व्यस्ततम इलाके ग्रीन पार्क में तीन लोगों ने एक मकान में घुसकर लूटपाट की । बुजुर्ग महिला को तार से बांधा ।  उस पर हमला किया और लूटपाट कर फरार हो गए।  आसपास इलाके में पॉश कालोनियां हैं और वहां रहने वाले लोगों की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है । लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि कहीं ना कहीं कानून व्यवस्था में ऐसी खामियां हैं जिसके चलते लूटपाट जैसी वारदात करने वालों पर व्यवस्था का खौफ नजर नहीं आ रहा है ।  लोगों ने पुलिसिया गस्त पर भी सवाल उठाए हैं । शहर के नेताओं ने भी मौके पर जाकर पीड़ितों  का हालचाल पूछा और पुलिस के आला अफसरों से मिलकर बदमाशों को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग की है ।  अब पुलिस की ओर से ही ऐसे कदम उठाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है . जिससे ऐसे वारदातों पर समय रहते लगाम लगाया जा सके और सिस्टम को चाक-चौबंद बनाने की पहल भी सार्थक हो सके ।

किसान आंदोलन में हिस्सेदारी

राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मांगों को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं । कांग्रेस किसानों की मांगों का समर्थन कर रही है । राष्ट्रीय स्तर पर इसे लेकर कोई हलचल भले ही नजर ना आए लेकिन कोई भी मौका सामने आने पर कांग्रेस के लोग इस आंदोलन के साथ अपने जुड़ाव को जाहिर करने में पीछे नहीं रहते। इसी सिलसिले में कांग्रेस के एक आयोजन के दौरान प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष अटल श्रीवास्तव ने आंदोलन का खुलकर समर्थन किया ।  साथ ही इस आंदोलन में सहयोग के लिए 51 हजार  रुपए देने का ऐलान भी किया । उनका कहना था कि इस साल उन्हें धान बेचने पर 51 हज़ार रुपए का फायदा होगा । जिसे वे आंदोलन के लिए समर्पित कर रहे हैं । पीसीसी उपाध्यक्ष ने प्रदेश के किसानों से भी निवेदन किया कि वे किसान आंदोलन के समर्थन में अपनी तरफ से एक-एक बोरा धान मुख्यमंत्री के जरिए किसानों को समर्पित करें । उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की भूपेश सरकार हमेशा किसानों के साथ खड़ी है । हर एक किसान से एक –एक बोरा धान समर्पित करने की इस अपील का छत्तीसगढ़ के किसानों पर कितना असर होगा यह तो नहीं कहा जा सकता।  लेकिन अगर सही में प्रदेश के किसान राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे आंदोलन के साथ हैं तो उनकी हिस्सेदारी का अंदाजा इससे लगाया जा सकेगा।  

बिलासपुर की लगातार उपेक्षा का दर्द

हवाई सुविधा के जरिए बिलासपुर को महानगरों से जोड़ने की मांग और चकरभाटा हवाई अड्डे के उन्नयन की मांग को लेकर हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति का धरना आंदोलन लगातार जारी है । इस सिलसिले में समिति के लोगों ने हाल ही में प्रदेश की राज्यपाल से भी मुलाकात की । उन्हें ज्ञापन सौंपा । साथ ही यह भरोसा लेकर लौटे की राज्यपाल की ओर से केंद्र सरकार के स्तर पर यह मांग पुरजोर तरीके से रखी जाएगी । धरना आंदोलन में शामिल लोगों का बार-बार कहना है कि छत्तीसगढ़ बनने के बाद से बिलासपुर की लगातार उपेक्षा हुई है । यहां नियमित हवाई सेवा की शुरुआत काफी पहले हो जानी चाहिए थी ।  लेकिन व्यवस्था के जिम्मेदार लोगों ने इस ओर इमानदारी से पहल नहीं की ।  जिससे बिलासपुर काफी पीछे चला गया है । हालांकि इस बीच हवाई अड्डे के लिए जमीन अधिग्रहण ,बाउंड्री वाल और दूसरी सुविधाओं को लेकर काम चल रहे हैं । लेकिन लोगों के उठ खड़े होने के बाद जो तत्परता दिखाई देनी चाहिए ,उसकी झलक अभी तक नहीं मिल रही है । यह हकीकत भी इस आंदोलन के जरिए सामने आ रही है कि बिलासपुर ने अब तक जो कुछ हासिल किया है ,वह जन संघर्ष और आंदोलन के जरिए ही उसे मिला है। मौजूदा आंदोलन की कामयाबी भी इसी कड़ी का एक हिस्सा हो सकती है । लेकिन यह तभी होगा जब बिलासपुर के लोगों की भावनाओं को समझते हुए सरकार कोई ठोस कदम उठाएगी।

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