आंदोलन के पहले शिक्षाकर्मियों में सोशल जंग…लोगों ने कहा बनाफर स्वार्थी…20 नवम्बर तक मुंह बंद रखें

BHASKAR MISHRA
5 Min Read
shikshakarmiबिलासपुर— शिक्षाकर्मियों की सोशल साइट्स में जंग शुरू हो गयी है। भूपेन्द्र बनाफर को स्वार्थी बताया जा रहा है। कुछ शिक्षाकर्मी संजय शर्मा पर भी निशाना साध रहे हैं। मौकापरस्त होने का आरोप लगा रहे हैं। 20 नवम्बर को होने वाले आंदोलन को लेकर बनाफर और संजय शर्मा के लोगों में आरोप प्रत्यारोप जमकर हो रहा है।
                     मालूम हो कि तीन चार दिन पहले शिक्षाकर्मी संघ का संयुक्त मोर्चा प्रतिनिधिमंडल सांसद अभिषेक सिंह के प्रयास से मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह से मुलाकात महत्वपूर्ण मांगो को सामने रखा था। मुलाकात के दौरान शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति,समय वेतनमान,क्रमोन्नति,पदों का शासकीय करण, अनुकम्पा नियुक्ति में प्रवेश टेस्ट से छूट को पर चर्चा हुई थी। सीएम ने शिक्षाकर्मी प्रतिनिधिनमंडल को सकारात्मक जवाब भी दिया। शिक्षाकर्मियों का मोर्चा प्रतिनिधिमंडल सीएम को प्रांतीय अधिवेशन में शामिल होने का न्योता भी दिया। सीएम ने बताया कि न्योता को स्वीकार करते हुए बाद में तारीख बताने की बात कही।

शिक्षाकर्मी संघ के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बैठक को सकारात्मक बताया था। पंचायत और नगर निगम शिक्षक कल्याण संघ वर्ग तीन के शिक्षाकर्मियों ने बैठक को नेतागिरी चमकाने वाला कहा। संगठन प्रमुख भूपेन्द्र बनाफर ने कहा कि संजय शर्मा का संगठन से प्रभाव खत्म हो चुका है। नेतागिरी को बचाने सीएम से मुलाकात का सहारा लिया गया। संजय शर्मा और उनकी टीम ने हमेशा शिक्षाकर्मियों को ठगा है।

() एडीईओ परीक्षा की नई तारीख..आवेदकों को मिला सात दिन का समय

() कालेज छात्रों ने बनाया वर्षामापी यंत्र…प्रयोग के बाद शिक्षकों ने की तारीफ

                                          भूपेन्द्र बनाफर के अनुसार संजय शर्मा के नेतृत्व में वर्ग तीन की हमेशा उपेक्षा हुई। जबकि संगठन में शिक्षाकर्मी वर्ग तीन की संख्या सवा लाख से अधिक है। शिक्षाकर्मियों के आंंदोलन में वर्ग तीन का सबसे ज्यादा योगदान है। लेकिन आंदोलन का फायदा  वर्ग तीन को कभी नहीं मिला। लेकिन अब वर्ग तीन के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा। जो भी संगठन शिक्षाकर्मी वर्ग तीन और उसकी मांगों का सहयोग करेगा…उसका हम भी सहयोग करेंगे। इस बार हम लोग मुगालते में नहीं रहने वाले हैं।
वर्ग तीन के लोग दूध-भात
                    बनाफर के बयान और संगठन खड़ा करने के बाद सोशल मीडिया में जंग शुरू हो गयी है। कुछ लोगों ने बनाफर को वर्ग 3 का स्वयं भू नेता कहा है। भूपेन्द्र बनाफर से सवाल किया है कि अब तक वर्ग तीन के लिए उन्होने क्या किया। यदि नहीं किय तो अब तक चुप क्यों बैठे रहे। कितना आंदोलन किया इसकी जानकारी दें। वर्ग तीन के हित में उन्होने कितना आदेश जारी करवाये हैं..बताएं तो बेहतर होगा। क्या बनाफर 20 नवंबर से पहले अपने अकेले दम पर अनिश्चित कालीन आंदोलन कर सकते हैं। यदि नही कर सकते तो बताएं…हम लोग वर्ग तीन के साथियों को दूध-भात समझकर उनकी हितों की लड़ाई लड़ेंगे।

एक शिक्षक ने लिखा है कि बनाफर और उनके साथी क्या क्या घास छिल रहे थे? जब प्रदेश के सभी शिक्षाकर्मी संगठन एक होकर आँदोलन का बिगुल फूँक चुके हैँ…तो बनाफर जैसे स्वार्थी  लोग आंदोलन को असफल बनाने पैदा हो जाते हैं। बनाफर से निवेदन है कि शिक्षाकर्मियो के मन मे वर्गवाद, जातिवाद का जहर ना घोलें।  30 अक्टूबर और  20 नवँबर को शिक्षाकर्मियो का जनसैलाब उमड़ेगा। हम चाहते हैं कि बनाफर गुट शिक्षाकर्मी वर्ग तीन आंदोलन का समर्थन करे।

बीस नवम्बर को आंदोलन

                                                 एक शिक्षक ने कहा है कि बनाफर शिक्षाकर्मी वर्ग 3 के हितैषी हैं तो 20 नवंबर तक चुप रहेंं। दिसम्बर में आंदोलन करेंगे। बयानबाजी कर आंदोलन को कमजोर ना करें। अन्यथा शिक्षाकर्मियों की हालत 2012-13 की तरह हो जाएगी। यदि आंदोलन प्रभावित हुआ तो 5 साल तक हाथ मलने के अलावा कुछ हासिल नहीं होने वाला है। बनाफर और उनके संगठन को 20 नवंबर तक चुप रहना चाहिए। आंदोलन के बाद बनाफर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करें किसी को एतराज नहीं होगा।
 खबरें और भी हैं- आज की
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

close