जिला पंचायत में वेतन का टोंटा…ब्याज की राशि से चल रहा परिवार…DRDA कर्मचारियों का, हो रहा ब्याज के पैसों से गुजारा

BHASKAR MISHRA
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बिलासपुर—एक तरफ कर्मचारी केन्द्रीय कर्मचारियों के बरबार महंगाई भत्ता को लेकर उग्र है..।। तो दूसरी तरफ प्रदेश सरकार का बिलासपुर में एक ऐसा भी विभाग है जहां कर्मचारियों को वेतन देने के लिए खजाने में एक रूपया भी नहीं है। मजेदार बात है कि इसमें राजपत्रित अधिकारी भी हैं। एक अधिकारी ने बताया कि पिछले पांच महीने से शासन से वेतन के नाम पर एक रूपया नहीं मिल रहा है। कर्मचारियों का वेतन जैसे तैसे संचित राशि के व्याज से दिया जा रहा है। कर्मचारियों के सामने विकट समस्या है कि आखिर वह करें तो क्या करें। जबकि वेतन के लिए जमकर लिखा पढ़ी हर महीने होती है। लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं होता है।

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जिला पंचायत के विभाग डीआऱडीए में कुल 17 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनका वेतन शासन से हर महीने अलग से विभाग के खाते में आता है..। या फिर हर सात आठ महीने में एक शासन कुछ लाख रूपये खाते में जमा कर देता है। और इसी से कर्मचारियों को वेतन भुगतान होता है। इसके अलावा फण्ड से अन्य काम भी होते हैं। कहने का मतलब डीआरडीए कर्मचारियों का वेतन ट्रेजरी से नहीं होकर कार्यालय के संचित कोष से होता है। अब तो कोष में एक रूपया भी नहीं है।

विभाग के एक बड़े कर्मचारी ने बताया कि आधा महीना बीतने के बाद सभी कर्मचारियों को चिंता सताने लगती है कि इस बार उनका वेतन मिलेगा भी या नहीं। क्योंकि पिछले पांच महीनों से फण्ड में एक रूपया नहीं है। बहरहाल जैसे तैसे बैंक में संचित राशि की ब्याज से कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है। चूंकि रूपया नहीं है इसलिए कोई धाम भी नहीं हो रहा है।

अधिकारी ने बताया कि कुल 17 कर्मचारियों का प्रति महीने लाखों रूपयों से अधिक वेतन भुगतान किया जाता है।

सात महीने से लिखा पढ़ी..हर बार आश्वासन

अधिकारी ने बताया कि पिछले पांच महीनों से वेतन को लेकर शासन स्तर पर लिखा पढ़ी होती है। अभी तक उन्हें एक भी रूपया नहीं मिला है। जाहिर सी बात है कि अधिकारियों को वेतन देने में बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं। पांच महीने पहले शासन ने रूपया भेजा था। सब खत्म हो गया है। नई सरकार के आने के बाद एक बार भी वेतन के लिए रूपया नहीं आया है।

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