सांसद कमलभान ने कहा…पहले अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म करें…फिर मुख्यमंत्री पूरी करेंगे लिपिकों की मांग..

अम्बिकापुर–सात सितम्बर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए छत्तीसगढ़ लिपिक शासकीय कर्मचारी संघ को सरगुजा सांंसद मनाने पहुंचे। सांसद कमलभान सिंह लिपिकों के धरना स्थल पहुंचकर आश्वासन दिया कि यदि हड़ताल खत्म कर दें तो मुख्यमंत्री दो सूत्रीय मांग को पूरा करने का एलान करेंगे। मांगों को पूरी करवाने की मेरी जिम्मेदारी है। जब कमलभान सिंह संबोधित कर रहे थे उस समय भारी संख्या में लिपिक कर्मचारी मौजूद थे।
                 सात सितम्बर से दो सूत्रीय मांग को लेकर लिपिक संघ कर्मचारी हड़ताल पर हैं। प्रदेश के सभी लिपिक ग्रेड पेमेन्ट सुधार किए जाने को लेकर लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं। एक दिन पहले ही भानुप्रतापपुर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान नारेबाजी को लेकर 600 से अधिक लिपिकों को घटों थाना में बैठाकर रखा गया। बावजूद इसके लिपिक अपने हड़ताल से वापिस लौटने को तैयार नहीं है।
                                 प्रदेश स्तरीय हड़ताल का असर कार्यालयों में दिखाई देने लगा है। अम्बिकापुर में धरना प्रदर्शन कर रहे लिपिकों को समझाने सरगुजा सांंसद कमलभान सिंह पहुंचे। उन्होने लिपिको को सन्बोधित किया। साथ ही हड़ताल खत्म करने के लिए कहा। उन्होने यह भी कहा कि लिपिकों की मांंग जायज है। लेकिन मांग पूरी होने के लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस लेना होगा।
                  पंडाल पहुंचकर लिपिकों को संबोधित करते हुए कहा कि सरगुजा सांसद कमलभान सिंह ने कहा कि आप लोग हड़ताल खत्म करें। लिपिकों की मांगों को शीघ्र ही मुख्यमंत्री के सामने रखूंगा। पूरा विश्वास है कि मुख्यमंत्री मांग के समर्थन में घोषणा भी करेंगे। मांगों को पूरी करवाने के लिए मैं दृढ़ संकल्पित हूं। मुख्यमंत्री भी चाहते हैं कि हड़ताल खत्म करने के बाद ही मांग पूरी का एलान किया जाएगा।
                अवकाश होने के कारण धरना प्रदर्शन स्थल पर काफी तदाद में लिपिक कर्मचारी उपस्थित थे। इस दौरान अखिलेश सोनी.आलोक कुशवाहा , चंद्रमणि मिश्रा, शोभा श्रीवास्तव, लक्ष्मी नायर समेत सभी लिपिक नेता विशेष रूप से मौजूद थे।
जल्दबाजी में नहीं करेंगे विचार
      लिपिक संघ प्रदेश महामंत्री रोहित तिवारी ने कहा कि हम जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेंगे। सभी कर्मचारियों और संघ नेताओं से पल पल की गतिविधियों पर चर्चा करेंगे। जो भी उचित निर्णय होगा लिया जाएगा। सांसद का बयान स्वागत योग्य है। लेकिन फैसला संगठन को लेना है।

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