टीएस सिंहदेव ने लिखी डॉ.रमन को चिट्ठी:नक्सली मामले में आर-पार की लड़ाई का नतीजा शून्य

रायपुर।प्रदेश की नक्सल उन्मूलन नीति के संबंध में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को पत्र लिखा है।टीएस सिंहदेव ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रदेश में नक्सली वारदातों में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है।जिनमें आए दिन आम नागरिकों सहित सुरक्षा बल के जवानों की शहादत हो रही है।देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं।ऐसे में बेखौफ नक्सली अपने मंसूबों को वारदातों के रूप में अंजाम दे रहे हैं।जो नक्सलियों के बढ़ते हुए हौसले और प्रभाव की पुष्टि करता है।पिछले 15 सालों से हर नक्सली घटना के बाद सरकार की ओर यह बयान आते रहे हैं।कि सरकार नक्सलियों से आर-पार की निर्णायक लड़ाई लड़ने जा रही है।हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं या नक्सलियों की कायराना हरकत है।नक्सली बौखला गए हैं।इत्यादि बयान अब महज जुमले बनकर ही रह गए हैं।वास्तविकता में नक्सली समस्या कम होने की बजाय और बढ़ गई है। इसका रूप पहले से ज्यादा विभत्स और हिंसात्मक हो गया है ।पुलिस का सूचना तंत्र लगातार फेल साबित हुआ है।

अपने पत्र में टीएस सिंहदेव ने आगे लिखा है कि साल 2010 में चिंतलनार में 76 जवान शहीद हुए साल 2013 में जिलों में बड़े कांग्रेस नेताओं समेत 33 लोगों को नक्सलियों ने मौत के घाट उतारा।अप्रैल 2017 में 25 जवान नक्सली हमले में शहीद हुए ।मार्च 2018 में 9 जवान शहीद हुए और मई में 7 जवान शहीद हुए।यह घटनाएं लगातार हो रही हैं हर बार शासन स्तर से निर्णायक और आर-पार की लड़ाई की बात की जा रही है पर परिणाम शून्य ही रहा है ।

राज्य सरकार नक्सल समस्या को राष्ट्रीय समस्या बताती है विगत 4 सालों से केंद्र और राज्य में एक ही राजनीतिक पार्टी है। बावजूद इसके नक्सल समस्या का समाधान हल नहीं हो पाया है।हाल ही में केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित जिलों की जारी सूची में बस्तर के सभी जिले शामिल हैं।

महोदय नक्सल समस्या गंभीर समस्या है इसके निदान के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं पर अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो पाए हैं ।नक्सल उन्मूलन के लिए बनाई गई नीतियां अभी तक स्पष्ट नहीं है इस मामले में हाल में हुई बैठक चर्चाओं इत्यादि में विपक्ष को साथ नहीं लिया गया है।

मेरा अनुरोध है कि नक्सल समस्या के स्थाई निदान के लिए राजनैतिक महत्वकांक्षाओं से ऊपर उठकर सभी को विश्वास में लेते हुए दृढ़ता के साथ सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए ताकि प्रदेश के लिए नासूर बन चुके नक्सल समस्या को जड़ से उखाड़ फेंका जा सके।

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