नाराज दावेदारों ने कहा…रायशुमारी के नाम पर नौटंकी….स्क्रिप्टेड है बिलासपुर की सीट..अब अकेले लड़ें चुनाव…पार्षदों ने भी खोला मोर्चा

बिलासपुर—जिला कांग्रेस कार्यालय में 15 अगस्त को बिलासपुर विधानसभा दावेदारों के बीच रायशुमारी हुई। दावेदारों ने बूथ,सेक्टर और जोन कमेटी प्रमुखों के सामने अपनी बातों को रखा। इसके बाद कमेटी प्रमुखों के बीच रायशुमारी हुई। विधानसभा समन्वयक मंजू सिंह ने सभी की बातों को लिफाफे में बंद कर पीसीसी के सामने रखने को कहा । इधर रायशुमारी को लेकर दावेदारों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। नाराज दावेदारों ने कहा कि जब टिकट पहले से फायनल हो गया है तो फिर रायशुमारी की जरूरत ही नहीं थी।

                   दरअसल बिलासपुर विधानसभा टिकट के लिए रायशुमारी केवल नौटंकी है। इससे बेहतर होता कि पीसीसी सीधे उस व्यक्ति को टिकट दे दे…जिसके लिए तानाबाना बुना गया। कम से कम वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को अपमानित तो नहीं होना पड़ता। नाराज दावेदारों ने मामले की शिकायत पीसीसी से करने का फैसला किया है।

                                                  बिलासपुर विधानसभा के लिए 15 अगस्त को जिला कांग्रेस कार्यालय में रायशुमारी हुई। रायशुमारी के दौरान कांग्रेस कार्यालय के बाहर वरिष्ठ नेताओं के साथ पार्षद, दावेदार और संगठन पदाधिकारियों ने जमकर बवाल काटा। नाराज लोगों ने रायशुमारी को नौटंकी बताया। कई नाराज पदाधिकारी और पार्षदों ने तो कहा  जब किसी व्यक्ति विशेष को ही टिकट देना है तो इतनी  बडी नौटंकी की जरूरत ही नहीं थी।

                      नाराज कांग्रेस नेताओं और दावेदारों ने कहा कि रायशुमारी बैठक में बूथ,सेक्टर और जोन के मनपसंद प्रभारियों को ही बुलाया गया। पचास प्रतिशत बूथ,सेक्टर और जोन प्रभारियों को कार्यक्रम की जानकारी ही नहीं दी गयी। मुश्किल से पचास प्रतिशत बूथ,सेक्टर और जोन प्रभारियों को ही अन्दर जाने दिया गया।


पचास प्रतिशत कमेटी प्रभारियों ने लिया हिस्सा

तीन चार दावेदार और संगठन पदाधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान ही पता चल गया कि टिकट किसको दिया जाना है…स्क्रिप्ट पहले से ही  तैयार है।नाराज नेताओं के अनुसार बिलासपुर में कुल 226 बूथ और 56 सेक्टर हैं। बैठक में  बमुश्किल पचास प्रतिशत प्रभारियों को ही बुलाया गया। इसमें भी ज्यादातर प्रभारी ब्लाक एक क्षेत्र से थे। मामले में जब विरोध किया गया तो व्यक्ति विशेष के समर्थकों ने धक्का मारकर या फिर हाथ पकड़कर कांग्रेस कार्यालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया।कई वरिष्ठ कांग्रेसियों को तो अन्दर नहीं जाने दिया गया। कई दावेदार तो अपनी बात भी नहीं रख पाए। जिन्हें मौका मिला..उन्हें भी समय सीमा में बांध दिया गया। कई लोगों को तो बीच में ही भाषण रोकना पड़ा। एक नेता ने बताया कि मैने कांग्रेस के लिए संगठन पदाधिकारी रहते हुए बहुत आंदोलन किए। लेकिन रायशुमारी के दौरान मुझे ना केवल अपमानित किया गया। बल्कि उठने बैठने को लेकर भी सवाल उठाए गए। विरोध करने पर अपमानित किया गया। बाहर का रास्ता भी दिखाया गया।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पिछले 25 साल से राजनीति कर रहा हूं। इतना अपमानित कभी नहीं हुआ अब हुआ। पहले तो बोलने नहीं दिया गया। फिर बूथ सेक्टर,जोन पदाधिकारियों की जानकारी नहीं दी गयी। रायशुमारी में उन्हीं लोगों को बुलाया गया जो व्यक्ति विशेष के चहेते थे। रायशुमारी की जानकारी मिलने के बाद जब अन्य क्षेत्र के बूथ,सेक्टर और जोन कमेटी के सदस्य कार्यक्रम में शामिल होना चाहे तो उन्हें अन्दर जाने से रोक दिया गया।

बूथ,सेक्टर,जोन प्रभारियों की नहीं मिली जानकारी

नाराज दावेदारों ने बताया कि बिलासपुर की टिकट बिक चुकी है। विधानसभा समन्वयक किसी व्यक्ति विशेष के इशारे पर काम करती रहीं। बूथ,सेक्टर और जोन प्रभारियों की सूची भी लोगों ने देने से इंकार कर दिया। कुछ लोगों ने बताया कि रायशुमारी में सभी बूथ और जोन प्रभारियों को बुलाया गया था। लेकिन लोग नहीं पहुंचे। नाराज दावेदारों ने सवाल किया कि जब छूट गए कमेटियों के पदाधिकारी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंंचे तो उन्हें अन्दर जाने से क्यों  रोका गया।

एकजुट हुए पार्षद हुए-नाम नहीं लिखने की शर्त पर दो चार पार्षदों ने कहा कि हमे कार्यक्रम में शामिल होने से मना कर दिया गया। जबकि स्पष्ट निर्देश है कि समन्वयक, संगठन पदाधिकारी और पार्षद भी रायशुमारी में बैठ सकते हैं। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। शहर में कांग्रेस के कुल 24 पार्षद हैं…ज्यादातर पार्षदों को कार्यक्रम से दूर रखा गया। यह जानते हुए भी पार्षद पार्टी के दम पर नहीं..व्यक्तिगत स्तर पर चुनाव जीतता और हारता है। लेकिन इस बार जो कुछ हो रहा है …लेकिन इस बार जो कुछ हो रहा है उसे देखने के बाद फैसला किया है कि सभी  पार्षद घर बैठेंगे। स्क्रिप्टेड विधानसभा प्रत्याशी अपने स्तर पर चुनाव लड़ेगा। कोई भी पार्षद सहयोग नहीं करेगा।

पीसीसी से करेंगे शिकायत

एकजुट पार्षदों ने बताया कि निगम चुनाव में 10 से अधिक पार्षदों को जानबूझकर हराया गया। आज हम लोग 24 में से 20 पार्षद एकजुट हैं। गुटबाजी के शिकार बहुत कम अन्तर से हारने वाले करीब 10 पार्षद प्रत्याशी भी हमारे साथ है। हम लोगों ने फैसला किया है कि अव्यवस्था की जानकारी पीसीसी अध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के सामने रखेंगे। रायशुमारी की फिर से मांग करेंगे। बावजूद इसके हमें नहीं सुना गया तो घर बैठकर चुनाव में काम करेंगे। जिन लोगों ने धक्का मारकर और हाथ पकडकर कार्यालय से निकाला वही लोग प्रत्याशी को जिताएंगे।

पार्टी में हाथपायी-देर शाम एक हॉटल में एक कांग्रेस नेता ने जन्मदिन पार्टी का आयोजन किया। लोग रायशुमारी के दौरान होने वाली गतिविधियों को लेकर पहले ही नाराज थे। इसी बात चर्चा के दौरान शहर के दो बड़े नेताओं में कहासुनी हो गयी। मामला हाथापाई तक पहुंच गया। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच बचाव कर हाथापायी को रोका। इस दौरान दोनों ने एक दूसरे पर जमकर कीचड़ उछाला। लोगों की मानें तो दोनों के बीच गाली गलौच भी हुई।

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