नौकरी के लिए प्रदर्शनः युवक पहुंचा अस्पताल

1(4)बिलासपुर–रेलवे भर्ती बोर्ड आरआरसी ग्रुप डी की परीक्षा में उत्तीर्ण परीक्षार्थियों को शारीरिक योग्यता परीक्षा, मे़डिकल सत्यापन के बाद भी अब तक नौकरी नही दी गई है। 2010 में परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यार्थियो को पांच साल बीतने के बाद भी काल लेटर मिला है। परेशान अभ्यर्थियों ने डीआरएम कार्यालय के सामने भूख हड़ताड़ कर प्रशासन पर दबाव बनाया है। अपनी मांगो के लेकर भूख हड़ताड़ पर बैठे युवको में से एक की हालत आज यकायक बिगड़ गयी। जिसे जिला उपचार के लिए चिकित्सालय में दाखिल किया गया है। रेलवे प्रबंधंन के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में जांच के दौरान थोडी बहुत देरी होती है। बिना जांच के किसी को नौकरी नहीं मिलती है।

                 2010 में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने  ग्रुप डी के लिए आवेदन मंगवाया। लाखो अभ्यार्थियो ने परीक्षा में हिस्सा लिया था। लेकिन आज तक किसी अभ्यर्थी को नौकरी पर नहीं रखा गया है। जबकि जांच की सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसा हड़ताल पर बैठे लोगों का कहना है। हड़ताल पर बैठे युवकों ने बताया कि  2010 में भर्ती प्रक्रिया में उत्तीर्ण होने के बाद उन्होने अन्य किसी जगह नौकरी के लिए प्रयास नहीं किया। क्योंकि मेडिकल और अन्य चयन प्रक्रिया में भी उन्होने क्वालिफाई कर लिया था। बावजूद इसके पांच साल गुजर जाने के बाद भी रेलवे प्रबंधन ने उन्हें ज्वाइन करने के लिए आदेश नहीं दिया। इस दौरान हमारी उम्र भी अधिक हो गयी है। हम लोग अब दूसरी नौकरी के लिए आवेदन भी नहीं कर सकते हैं।

                सारी औपचारिकताओं को पास करने के बाद भी उन्हें नौकरी पर नहीं रखा जा रहा है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की गैरजिम्मेदार रवैया से उनका जीवन अंधकार में जाता हुआ दिखाई दे रहा है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि विभाग में अब भी एक हजार से ज्यादा पद रिक्त हैं। उनकी भर्ती हो सकती है। हम लोगों सारी प्रक्रियाओं को पास किया है। बावजूद इसके उन्हें काल लेटर नहीं दिया जा रहा है। जो समझ से परे हैं। विभाग हर बार उन्हें जांच का हवाला देकर टाल देता है।

                  प्रदर्शनकारियों के बाद उनका मेडिकल परीक्षण हो गया है। उन्हे क्वालीफाई भी किया गया। दस्तावेजो की भी जांच हो चुकी है। फिर भी उन्हें नौकरी पर नहीं रखा जा रहा है।   वे मानसिक रूप से परेशान हैं। अब अधिकार के लिए भूख हड़ताल कर रहे हैं।

                        भूख हड़ताल पर बैठे चार युवको में से आज एक युवक विजन कुमार की हालत बिगड़ गयी जिसे उपचार के लिए जिला चिकित्सालय भर्ती कराया गया है। हडताल पर बैठे बिहार निवासी एक युवक की हालत काफी बिगड़ गई। जिसे आज चिला चिकित्सालय में भर्ती किया गया है। युवक का नाम विजय कुमार बताया जा रहा है। भूख हड़ताल पर बैठे दो अन्य युवकों का नाम हेमन्त जोशी और सुधीर कुमार है। हेमन्त महाराष्ट्र का रहने वाला है जबकि सुधीर बिहार का निवासी है। उनकी हालत भी दिनों दिन बिगड़ती जा रही है। वहीं उनका कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता है भूख हड़ताल खत्म नहीं करेंगे।

                जोन के सीपीआरओ राजेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि ग्रुप सी और डी की भर्ती के लिए आवेदन मंगवाए गये थे। परीक्षा भी हो चुकी है। रिजल्ट भी निकल चुका है। बिलासपुर में अब केवल ग्रुप सी की भर्ती होती है। इस भर्ती प्रक्रिया में हजारो लोग पास होते है। उनका मेडिकल और दस्तावेजो की जांच भी की जाती है। कुछ दस्तावेज जाली पाये जाते है तो कुछ में अन्य गड़बड़ियां भी होती है।जांच के दौरान विलंब होना स्वाभाविक है। हर किसी को नौकरी नही दी जाती। बावजूद इसके यह हड़ताड़ कर रहे है।

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