न्याय के लिए अमीर-गरीब का भेद नही होना चाहिए-ठाकुर

2901-A♦छत्तीसगढ़ की करीब 33 प्रतिशत आबादी जनजाति वर्ग की ♦आदिवासियों को मैं प्रकृति का पुत्र मानता हूॅ
रायपुर।सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री टी.एस.ठाकुर शनिवार को रायपुर के भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान (आई.आई.एम.) के प्रेक्षागृह मंे राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर द्वारा ‘‘आदिवासियों के अधिकारों का संरक्षण और प्रवर्तन‘‘ विषय पर आयोजित देश की पहली कार्यशाला मे शामिल हुए।टी.एस.ठाकुर ने कहा है कि बाहर से लोग छत्तीसगढ़ को गरीब और पिछड़ा राज्य के रूप में देखते है, परंतु यहां आने के बाद चमचमाती सड़कें, ऊंची-ऊंची खूबसूरत बिल्डिंग और विकसित होते देशव्यापी संस्थानों को देख कर यह साबित होता है कि छत्तीसगढ़ आज तेजी से तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और इस तरक्की का श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को जाता है।

                                                                           न्यायमूर्ति टी.एस.ठाकुर और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने दीप प्रज्वलित कर इस एकदिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। न्यायमूर्ति ठाकुर ने आगे कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) का मुख्य उद्देश्य है कि न्याय के लिए अमीर-गरीब का भेद नही होना चाहिए। पिछड़े, कमजोर और अशिक्षित लोगों को न केवल न्याय के लिए आवश्यक विधिक सहायता दी जाए बल्कि उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर उन्हें उनके अधिकार भी दिलाया जाए।

                                                           इसके लिए नालसा ने 2015 में 7 नियम भी बनाए है। जिसमें असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों, बच्चों, मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों, नशा पीड़ितों, तस्करी एवं वाणिज्यिक यौन शोषण पीड़ितों को विधिक सेवाएं मुहैया कराना तथा आदिवासियों के अधिकारों का संरक्षण एवं प्रवर्तन को शामिल किया गया है।

                                                                    मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव की बात है कि इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए देश के प्रधान न्यायाधीश छत्तीसगढ़ आए है। न्यायमूर्ति ठाकुर ने 2015 में नालसा के जो 7 नियम दिए है, वह पूरे देश में कमजोर व पिछड़े वर्ग के लोगों के अधिकारों की रक्षा के साथ ही राज्य सरकारों द्वारा योजनाओं के बेहतर तरीके से क्रियान्वयन की जिम्मेवारी भी सुनिश्चित करता है। आदिवासियों को मैं प्रकृति का पुत्र मानता हूॅ। जिन्होंने पेड़ों, जंगलों, पर्यावरण और प्राचीन परंपरा व संस्कृति को बचा के रखा है।

                                                            आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करना मुख्यमंत्री होने के नाते मेरी और मेरे सरकार की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा-स्कूल, अस्पताल और पुल-पुलियों को तोड़ने वाले या उनका समर्थन करने वाले हमारे आदिवासियों के हितैषी नहीं हो सकते। ऐसे लोग या संगठन किसके अधिकारों की रक्षा की बात करते है समझ में नही आता । मुख्यमंत्री ने कहा-आज बस्तर करवट ले रहा है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए प्रयासों से बस्तर के बच्चे अब आई.आई.टी.,आई.आई.एम., एन.आई.टी. जैसी अखिल भारतीय परीक्षाओं में अपना परचम लहरा रहे है।

                                                           छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने अपने यहां के लोगों को खाद्य सुरक्षा और कौशल उन्नयन का अधिकार प्रदान किया है। प्रदेश के सभी लोगों को 50 हजार रूपए तक की स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच मुहैया कराया गया है। जनजाति वर्ग के लिए ग्राम पंचायतों तथा विधानसभा में आरक्षण के साथ ही आदिवासी मंत्रणा परिषद, जनजाति सलाहकार परिषद तथा अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन कर उनके अधिकारों की रक्षा की जा रही है। राज्य सरकार ने बस्तर और सरगुजा में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों में स्थानीय लोगों की नियुक्ति तथा विषेष पिछड़ी जनजाति के युवाओं को 12 वीं पास होते ही सरकारी नौकरी देने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नालसा ने जो नियम दिए है वह देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाऐंगे।

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  1. By Varun Sharma

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