छत्तीसगढ़ में श्रमवीरों की वापसी पर विशेषः “स्वागत है आगत का….”

भारतीय संस्कृति के सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय,…..वसुदेव कुटम्बकम ….परहित सरिस धर्म नही भाई पर पीड़ा सम नही अधमाई….मुख्य आधार रहे है । भारतीय समाज की स्थापना ओर भारतीय लोकतंत्र के आधार भी संस्कृति के यही सिद्धान्त है ,इसलये भारतीय समाज और दर्शन आज भी पूरी दुनिया को ज्ञान की भिक्षा दे रहा । भारतीय समाज मे आज भी दूसरे के दर्द को दूर करने वाले  भिक्षु को भी महान कहा जाता है वही उसकी तुलना में स्वा हित साधने वाले करोड़पति व्यक्ति को भी  समाज मे निम्न स्थान प्राप्त होता है । भारतीय समाज के इन्ही आदर्शो के कारण उसे अनेकानेक बार परीक्षा का सामना करना पड़ता है , 21 वी सदी के प्रारंभ में किसी ने ये कल्पना भी नही की थी कि सम्पूर्ण मानव सभ्यता के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लग जायेगा , उस प्रश्न चिन्ह के कारण आज भारतीय समाज को पुनः परीक्षा की घड़ी से गुजरना पड़ रहा है …. कोरोना विश्व महामारी का रूप ले लिया ,देखते ही देखते सम्पूर्ण विश्व इसकी चपेट में आ गया । विश्व की महाशक्ति होने का दम्भ भरने वाले अमिरिका में ही मौत का तांडव हो रहा, जर्मनी इटली रूस स्पेन कोई भी इसके प्रकोप से अछूते नही रहे । भारत भी इसकी चपेट में आ गया , भारत सरकार द्वारा पिछले लगभग 2 माह से लगातार लॉक डाउन कर दिया गया है , भारत मे भी विकास का पहिया रुक गया है , इसका सर्वाधिक प्रभाव पड़ा समाज की पंक्ति में सबसे अंत मे खड़े उस व्यक्ति पर जिसके पास दो जून की रोटी नही है जो हजारो किलोमीटर अपने घरों से दूर जा कर मजदूरी करता है अपने ओर अपने परिवार को दो वक्त की रोटी मुहैय्या कराने के लिए, जो अपने पड़ोसी ,रिश्तेदार,बूढ़े माता पिता को छोड़ कर रोजगार की तलाश में हजारों किलोमीटर दूर चला जाता है, अपनी सामाजिक परम्परा की तिलांजली दे कर सिर्फ दो वक्त की रोटी के लिए हजारो किलोमीटर दूर चला जाता है  , ये किसी एक प्रदेश की कहानी नही है ये पूरे देश की कहानी है ,इनकी संख्या हजारो में नही अपितु करोड़ो में है , समाज के इस व्यक्ति ने भी इस महामारी में मानव सभ्यता को बचाने के लिए बहुत धैर्य का परिचय दिया पर अब वो भूख के आगे बेबस हो गया ,उसका धैर्य जवाब दे दिया तो उसे अपनो की याद आने लगी , कहते है न जब व्यक्ति को सबसे बड़ी पीड़ा होती है तो वो अपनी माँ को याद करता है , इन्हें भी अब अब अपनी माँ ,अपनी मातृभूमि की याद आने लगी ,उन्हें अपने की याद आने लगी जो हर परिस्थितियों में उसके साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़े हो जाते है , उन्हें अपने मित्रों की याद आने लगी जो सुख में कम और दुख में ज्यादा उनका साथ देते आये है , उन्हें अपने माता पिता की चिंता सताने लगी कि इन परिस्थितियों में उनका क्या हाल होगा,उन्हें गांव के अपने पंच , सरपंच, जनपद सदस्य ,जिला पंचायत सदस्य याद आने लगे जो हर पल वो अपने साथ खड़ा पाते है , उन्हें गांव का हर वो व्यक्ति याद आने लगा जिसके साथ उन्होंने जीवन के कुछ अच्छे दिन उसके सानिध्य में बिताए है, उन्हें अपने प्रदेश के मुखिया याद आने लगे जो उनको हजारो किलोमीटर दूर भी अपने साथ हमेशा खड़े नजर आते है , इस परिस्थिति में इन लोग ने मांग कर दी कि उनको वापस अपने गाँव ,अपने देश जाना है ।छत्तीसगढ़ की सरकार उन सरकारों में से एक है जिसने इस महामारी के प्रारंभिक चरण में ही इससे देश मे होने वाली विभीषिका को समझा ही नही वरन इससे लड़ने के कारगर कदम भी उठाए , छत्तीसगढ़ सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी योजनाओं और उसके क्रियान्वयन से ये सिद्ध कर दिया कि वे नाम के माटी किसान पुत्र नही है , छत्तीसगढ़ सरकार देश की उन सरकारों में से एक है

जिसके मुखिया ने सबसे पहले लॉक डाउन का निर्णय लिया , भुखमरी ओर बेरोजगारी से जब पूरे देश जूझ रहा था तो छत्तीसगढ़ में सभी को खाद्यान्न प्रदाय किया गया , मनरेगा के माध्यम से करोड़ो रूपये का कार्य प्रारंभ कर हजारो लोगो को रोजगार दिया गया , गौठान का गांव गांव में निर्माण करवा कर ग्राम को सशक्त करने की सोच को पूर्ण किया गया । स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा की गई और उसको सुदृढ़ करने के प्रयास किये गए । इस बीच कोरोना महामारी ने बारम्बार प्रदेश को झकझोरा पर सशक्त नीतियों और क्रियान्वयन ने विश्व मे कही न हार मानने वाले कोरोना ने छत्तीसगढ़ में पराजय मान ली ,प्रदेश में कोरोना मरीजो की संख्या को कम से कम रखने में भूपेश सरकार सफल रही,गावो तक इसका फैलाव रोकने में सफल रही, आम जनता का सहयोग इस महामारी के विरुद्ध लेने में भूपेश सरकार सफल रही,सामाजिक संगठनों से सरकार ने हर मुकाम में सहयोग प्राप्त किया ,इसी का आज परिणाम है कि 59 कोरोना के मरीजों में 53 स्वस्थ हो कर अपने घर वापस जा चुके है ये चमत्कार रातो रात नही हुआ है ,इसमे भूपेश सरकार और उनकी टीम की इच्छा शक्ति ,कुशल रण नीति, सही समय पर सही निर्णय लेने ,ओर दिन रात की मेहनत का परिणाम है।आज छत्तीसगढ़ लाखो मजदुर एक आस ओर विश्वास ले कर वापस आने की मांग किये ,छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुखिया किसान पुत्र भूपेश बघेल ने उनकी मांग को स्वीकार ही नही किया बल्कि उनके आने के लिए भारत सरकार से 28 ट्रेनों की स्वीकृति हासिल कर ली । गाव गाव में इसोलेशन सेंटर बनाये गए है जहाँ पर आने वाले मजदूर भाइयो को पूरी सुविधाओं के साथ 14 दिन तक रखा जायेगा । स्टेशन में उनके स्वागत के लिए प्रशासन अपनी पूरी शक्ति के साथ खड़ा है जिसका उदाहरण हमे बिलासपुर में पहली ट्रैन के आगमन के साथ मिला । बिलासपुर स्टेशन अपने नए रूप में नजर आ रहा था ,हरतरफ प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी लगे हुए थे जिससे आने वालों को किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो, पूरे स्टेशन में सफेद डब्बे बनाये गए थे जिससे सोशल  डिस्टनसिंग का पालन हो सके, सभी को मास्क व सेनेटाइजर उपलब्ध कराए गए ,सभी के स्वास्थ जांच की व्यवस्था की गई थी जिससे सभी की स्क्रीनिंग की गई व डेटा तैयार किया गया ,सभी को व्यवस्थित बसों में बैठा कर उनके गावो तक रवाना किया गया । गावो में ग्राम के लोगो की सजगता समिति व सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की समिति बनाई गई है जो ये देखेगी की आने वाले सभी लोग शासन द्वारा जारी निर्देशो का 14 दिन तक पालन करे व उनको उनकी आवश्यकता की पूर्ति की जा सके।      अपनो से एक आस ,विश्वास के साथ ये समाज के अंतिम पंक्तियों में खड़े, राष्ट्र के आधार, हमारे बीच आ रहेहै ,शायद इनके पास अब खोने के लिए कुछ नही शेष है, शेष है तो इनका विश्वास की उनके गांव के मित्र,पड़ोसी,पंच, सरपंच,जनपद सदस्य,जिला पंचायत सदस्य ,गांव के लोग जो हर परिस्थितियों में अब तक साथ दिए थे आज जब उनके अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लग गया है तो भी उनका साथ ही देंगे, छत्तीसगढ़ सरकार ने उनको सुरक्षित उनके गांव उनकी मातृभूमि तक पहुच दिया ,अब बारी है समाज की , समाज की परीक्षा की घड़ी है , छत्तीसगढ़िया समाज निश्चित ही अपनी संस्कृति के अनरूप इन्हें आत्मसात करेगा और इन्हें नई शक्ति देगा और उनके विश्वास को सशक्त से सुदृढ़ बना देगा क्योकि भारत मे ही नही पूरे विश्व मे छत्तीसगढ़िया जाना जाता है “छत्तीसगढ़िया ले सबसे बढ़िया के लिए “….. ।

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