कोरोना महामारी ओर प्रशासनिक दायित्वों का बदलता स्वरूप….

रायपुर।स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन होना निश्चित हो चुका था , स्वतंत्रता के बाद भारत मे लोकतंत्र की स्थापना हुई । लोकतंत्र का मुख्य उद्देश्य लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना व नागरिको को आवश्यकता की समस्त सुविधा मुहैया कराना हो गया । प्रशासन लोककल्याण के साथ मुख्यतया नियंत्रण और योजनाओं के क्रियान्वयन में ही नजर आया , स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात शायद ही ऐसी विकट स्थिति का सामना प्रशासन या शासन ने कभी किया हो जिस समस्या का कोई ओर छोर नजर नही आता । वास्तव में कोरोना महामारी की रोक थाम में शासन जितना भी कर ले वो कुछ समय मे ही कम लगने लगता है , रोज नित नए लक्ष्य तय किये जाते है और जैसे ही हम लक्ष्य के करीब पहुचते है हमको लक्ष्य दूर नजर आने लगता है।

छत्तीसगढ़ उन प्रदेशो में से एक था जहाँ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस महामारी की विभीषिका को समझते कठोर एवम कड़े निर्णय लिए, सबसे पहले लॉक डाउन करने वाले प्रदेशो में से एक छत्तीसगढ़ राज्य रहा है ,इसी का परिणाम है कि यहाँ इस महामारी ने अभी तक अपना तांडव नही मचा सका हैं।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस कोरोना महामारी को एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया है , जहाँ एक ओर लॉक डाउन का कठोर निर्णय लिया वही रोजगार के अवसरों का सृजन ,भुखमरी से लोगो को बचाने के लिए मुफ्त खाद्यान्न का वितरण, स्वास्थ्य सविधा का विकास,आम आवश्यक वस्तुओं की घर पहुच सुविधा,कोरोना से बचाव के उपाय कोग्रामीण ओर शहरी जन जन तक पहुचने , इसोलेशन सेंटर की स्थापना, श्रमिक सहायता टोल फ्री नंबर , कृषि कार्य मे छूट ओर सहयोग,e पास की सुविधा, इमरजेंसी स्वास्थ्य हेल्प लाइन सुविधा , पार्षद निधि ओर ग्राम पंचायतों से मुफ्त सेनेटाइजर ओर मास्क का वितरण, ऑन लाइन शिक्षा ,आगनबाड़ी कार्यकताओ के माद्यम से घर घर पोषण आहार का वितरण ओर वीडियो के माध्यम से बच्चों का बोद्धिक विकास,सामाजिक संगठनों का सहयोग लेने में भूपेश शासन सफल होता नजर आ रहा ।

कोटा राजस्थान से अपने बच्चों की वापसी को सफलतापूर्वक अंजाम देने के बाद हमारे प्रदेश के आधार हमारे श्रमिको की घर वापसी की चुनौती को भूपेश प्रशासन ने स्वीकार किया है और राज्य सरकार ने लगभग 50 से अधिक ट्रेनों जो विभिन्न प्रदेशों से आएंगी उनकी स्वीकृति दी है।

छत्तीसगढ़ सरकार शासन और प्रशासन के लिए ये परीक्षा की घड़ी है ,जहाँ प्रशासन को अपने मूल काम से ज्यादा श्रमिको के आगमन की सम्पूर्ण व्यवस्था में ध्यान केंद्रित करना है , श्रमिक रेल दिल्ली अहमदाबाद,लखनऊ, पुणे, प्रयागराज, ओर देश के हर कोने से आ रहे । लगभग 15 हजार से अधिक श्रमिक ट्रेनों ओर अन्य साधन से आ चुके है । प्रशासन द्वारा उनको ट्रैन से उतरते साथ भोजन कराया जा रहा है,मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राज्य की सीमा तक अन्य राज्यो के श्रमिकों के लिए भी आवागमन ओर भोजन की व्यवस्था की जा रही है , हर आने वाले श्रमिक का स्वास्थ जांच व डेटा तैयार किया जा रहा है , हर श्रमिक के ज्ञातव्य के लिए साधन की व्यवस्था भी प्रशासन द्वारा ही कि गई है, गांव पर पहुचने पर उन्हें इसोलेशन सेंटर में 14 दिन के लिए रुकवाने की व्यवस्था और स्वास्थ्य जांच प्रतिदिन की जाती है , गांव गांव में स्वास्थ्य जांच करने हेतु टीम का गठन किया गया है।

सबंधित श्रमिक 14 दिन इसोलेशन सेंटर में रहे इसके लिए ग्रामवार ग्राम के गणमान्य नागरिकों की समिति गठित की गई है,प्रशासन अपने मुखिया प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में दिन रात काम कर उनकी चुनौती अपनी चुनौती मान कर काम कर रहा ।इस समाज की विड़बना है कि कुछ विघ्नासन्तोषी इस व्यापक व्यवस्था में भी छिद्रानिवेषी प्रव्रत्ति या राजनीतिक द्वेष वश या अपने को सुर्खियों में रखने की आदतानुसार दोष ढूढ लेते है ,ऐसे लोगो को बस यही निवेदन है कि जब इस चुनौती ओर महामारी को जड़ से उखाड़ फेंकने में प्रदेश का हर जन लगा है तो अपनी प्रव्रत्ति का कुछ समय के लिए ही त्याग कर प्रदेश के प्रशासन का सहयोग करे।

प्रशासन के सामने सिर्फ व्यवस्था गत कार्य ही नही है ,उसे समाज के हर वर्ग को साथ रख कर कार्य करने की भी चुनौती है । ग्रामीण परिवेश में बाहर से आने वाले श्रमिको को आत्मसात करने के लिए एक सुदृढ़ वातावरण तैयार करने का कार्य भी प्रशासन गांव के सरपंच , पंच, गणमान्य नागरिकों के माध्यम से कर रहा , भूपेश सरकार द्वारा हर आने वाले परिवार के हर सदस्य के मान से मुफ्त खाद्यान्न की व्यवस्था ने श्रमिको के मन मे आत्मविश्वास का संचार किया है , आज शासन की हर योजना और हर आदेश का प्रशासन अपनी तरफ से सीमित साधनों के बावजूद अमली जामा पहना रहा है ,जरूरत है प्रशासन को ओर अधिक सहयोग और विश्वास की क्योकि हजारो की संख्या में आने वाले श्रमिको की सम्पूर्ण व्यवस्था इसके अभाव में नही की जा सकती ।

छत्तीसगढ़ नक्सली समस्या के झंझावातों से लगातार जूझा है और सफलता पूर्वक जय हासिल किया है ,हजारो श्रमिको ओर उनके परिवारों की दुआओ ओर प्रशासन की रात दिन की मेहनत से अपने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में इस महामारी से भी छत्तीसगढ़ विजय ही प्राप्त करेगा ओर सिद्ध कर देगा कि
“छत्तीसगढ़िया ले सबसे बढ़िया”

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