चायनीज सामान बहिष्कार का असर.. खरीदी में 80 फीसदी गिरावट..बच्चों ने भी मोड़ा मुंह..व्यापारी फिर भी खुश

बिलासपुर— सीमा पर तनाव ने भारत में चायनीज सामान का बाजार बेरंग कर दिया है। बहिष्कार का ऐसा असर की बिलासपुर में चायनीज खिलौनो का बाजार पूरी तरह से चौपट हो गया है। व्यापारियों के लाखों रूपए फंस गए है। अस्सी फीसदी से अधिक खरीदारों ने मुंह मोड़ लिया है। बावजूद इसके लाखों रूपए की घाटे में होने के बाद भी व्यापारी और व्यापार जगत चायनीज सामानों की बिक्री नहीं होने पर खुश हैं।

                                 लद्दाख में 15 जून की घटना के बाद भारतीयों में चीन के प्रति जबरदस्त आक्रोश है। भारत के 20 जवानों के शहीद होने के बाद पूरे देश में चीन के प्रति आक्रोश ही नहीं बल्कि हद सीमा तक नफरत फैल गयी है। जिसके चलते देश प्रदेश समेत बिलासपुर में भी आम से खास तक सभी लोग चायनीज सामान से परहेज कर रहे हैं। व्यापारी से लेकर कर्मचारी तक चीनी सामान का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बहिष्कार कर रहे हैं।

प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से व्यापिरयों ने किया बहिष्कार

      अग्रसेन चौक स्थित चायनीज खिलौने के थोक और फुटकर बिक्रेताओं ने बताया कि 15 जून के पहले लाकडाउन के चलते व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ। उम्मीद थी कि लाकडाउन के बाद बाजार में रौनक लौटेगी। बाजार जब धीरे धीरे चलने लगा तो लद्दाख की घटना ने देश को  झकझोर कर रख दिया। बिलासपुर भी इससे अछूता नहीं रहा। 

                      घटना के बाद व्यापारियों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से चायनीज सामान के बहिष्कार का फैसला किया। साथ ही निर्णय लिया गया कि यदि कोई व्यक्ति कुछ सामान खरीदने दुकान आता है तो उसे सबसे पहले चायनीज सामान बेचने से बचेंगे। यदि ग्राहक खरीदना भी चाहेंगे तो एक बार जरूर सलाह देंगे कि चायनीज सामान का बहिष्कार करें। और हम ऐसा ही कर रहे हैं। बहिष्कार का असर भी दिख रहा है। अब ग्राहक पहले ही कह देता है कि चायनीज सामान के अलावा सभी सामान दिखा सकते हैं। हमें बहुत खुशी होती है।

  खिलौना का बाजार हुआ चौपट

                         अग्रसेन चौक स्थित थोक और फुटकर चायनीज खिलौना सामान के विक्रेता श्याम ट्वाय हाउस के संचालक शत्रुघन देवांगन ने बताया कि बहिष्कार और सीमा तनाव के चलते चायनीज खिलौना बाजार बेनूर हो गया है। कुछ महीने पहले तक चायनीज खिलौने की बोली लगती थी। दाम भी अच्छे मिलते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। लद्दाख की घटना के बाद चायनीज खिलौना बाजार धड़ाम हो गया है। 80 प्रतिशत ग्राहकी में कमी आयी है। खिलौनो का खरीदार नहीं मिल रहा है। हम चाहते हैं कि कोई ना मिले। बेशक हमें नुकसान है। लेकिन हमें गर्व है कि हम सब चायनीज सामान का बहिष्कार कर चीनियों को औकात दिखा रहे हैं।

             देवांगन ने कहा चीनी सामान के ग्राहक 15 से 20 प्रतिशत तक सिमट कर रह गया है। घाटा बहुत है फिर भी हम खुश है। सबसे बड़ी बात कि अब अन्य जगह से बने खिलौने की बिक्री बढ़ गयी है। बाजार को रंग चढ़ रहा है भले चाहे चीनी खिलौना बाजार को रंग चढ़े या ना चढ़ें

चीनाी खिलौना की सप्लाई भी बन्द

          श्याम ट्वाय हाउस के संचालक शत्रुघन देवांगन ने कहा…यदि ऐसा ही रहा तो चीनी सामान के खरीदार भी नहीं मिलेंगे। हम आधे पेट रहने को तैयार हैं। लेकिन चीनी सामान को खरीदार नहीं मिले। अब चीनी खिलौने की सप्लाई पूरी तरह से बन्द हो गयी है। दुकानदारों के पास स्टाक में जो सामान है उसे ही रखे हैं। नया आर्डर भी नहीं दे रहे हैं। 90 प्रतिशत चीनी खिलौना का आवक रूक गया है। लेकिन अन्य सामानों की बिक्री बढ़ी है। इन सामानों में मार्जिन कम है..लेकिन खुशी ज्यादा मिल रही है। हम चाहते है कि इन खिलौनों पर भी केन्द्र सरकार प्रतिबन्ध लगाए।

बूढों के साथ बच्चों ने भी फेरा मुंह

        बृन्दावन परिसर के कुछ व्यापारियों समेत शत्रुघन ने कहा कि अब माता पिता बच्चों को फटकार लगाते हुए चीनी खिलौना खरीदने से बच रहे है। बहिष्कार तेज होने के बाद बच्चों ने भी चीनी खिलौनों से मुंह मोड़ लिया है। यह देखकर हमें अच्छा भी लगता है।

                     शत्रुघन देवांगन ने कहा टेडी वियर चीनी आपूर्ति नहीं है। इसलिए इसकी बिक्री अच्छी हो रही है।

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