जनता कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा…भाजपा सरकार ने किया आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन..कोर्ट जाने की दी धमकी

बिलासपुर—जनता कांग्रेस जे प्रदेश प्रवक्ता मनीशंकर पान्डेय ने भारत निर्वाचन आयोग और भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। पान्डेय ने कहा कि जब भारत निर्वाचन आयोग ने सुबह 11.30बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की बात कही थी तो अचानक बदलाव क्या किया गया। आखिर क्या कारण पत्रवार्ता दोपहर तीन बजे लिया गया। ऐसी कौन सी परेशानी आ गई 11.30 बजे होने वाले प्रेसवार्त को तीन बजे लिया गया। निर्वाचन आयोग स्पष्ट करना चाहिए।
          जनता कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता मणिशंकर पाण्डेय ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग और भाजपा सरकार के प्रभाव में कार्य कर रही है। कल 3 बजे तक प्रधानमंत्री का राज्यों में कार्यक्रम थे। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का भी कार्यक्रम था। छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री 12 बजे तक कैबिनेट की बैठक बुला कर विभिन्न चुनावी फायदे का निर्णय लिया। जो आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन है।
                              जनता कांग्रेस जे प्रदेशा प्रवक्ता मनीशंकर पान्डेय ने भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मांग किया है कि निष्पक्ष चुनाव कराने के निर्देश का पालन करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने एक दिन पहले जो फैसला लिया है उसे तत्काल रोका जाए। आदर्श आचार संहिता का पालन कर अपने निष्पक्ष होने का उदाहरण  पेश करे।
           पान्डेय ने बताया कि अगर भारत निर्वाचन आयोग सभी निर्णयों पर तत्काल रोक लगाते हुए निरस्त करने का आदेश जारी नहीं करता है तो हमें विवश होकर न्यायालय के शरण में जाना पड़ेगा ।
                      पान्डेय ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार को यह निर्णय  लेना था तो एक दिन पहले क्यो नही लिया। कल ही अचानक बैठक क्यो बुलाई गई।  जो निर्णय कल लिया गया वह निर्णय दो दिन पहले भी लिया जा सकता था। जब सरकार को मालूम था की 6 अक्टूबर को आचार संहिता लागू होने की पूरी संभावना है..फिर ताबड़तोड़ कार्रवाई करने की क्या जरूरत थी।
            जबकि कुछ दिनों से समाचार विभिन्न अखबार पोर्टलो में आ रहा था कि आदर्श चुनाव संहिता जल्द लगने वाली है। बावजूद इसके जानबूझ कर कैबिनेट की बैठक बुलाई गई और चुनावी फायदे के लिए निर्णय लिया गया…जो आदर्श आचार संहिता का उलंघन है। इस बात को संज्ञान में लेते हुए भारत निर्वाचन आयोग तत्काल सरकार के सभी आदेशों को निरस्त करने का आदेश जारी करे। अन्यथा हमे इस मामले को लेकर न्यायालय के शरण में जाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा ।
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