संगठन से ही मिली बेटियों को ताकत…भाजपा नेत्री का बयान…मीडिया ने बनाया तिल का ताड़

बिलासपुर— भाजपा नेत्री बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की मंडल प्रमुख किरण सिंह ने कहा कि मैने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग किया है। मैने अपनी आवाज किसी के कहने पर बुलंद नहीं की है। संगठन ने खुद कहा है कि किसी को  कुछ कहना है तो अपनी बातों को फोरम में रखे। मैने भी अपनी महत्वाकांक्षा को फोरम में रखा। जब पार्टी ने ही मांगा तो आवेदन देने में क्या हर्ज है। टिकट मिले या नहीं मिले…इस पर फैसला संंगठन को करना है। मैने आवेदन देकर कौन सी बड़ी तीर मार दी। पार्टी के लोगों ने मेरे आवेदन को ना केवल स्वीकार भी किया है। सभी ने तारीफ भी की है।

                       भाजपा नेत्री किरण सिंह ने बिलासपुर से टिकट मांंगकर सनसनी फैला दी है। मामले में किरण सिंह का कहना है कि उन्होने सनसनी फैलाने जैसी कुछ भी काम नहीं की है। भाजपा में लोकतांत्रिक मूल्यों का स्वागत किया जाता है। मुझे लगा कि मैं भी आवेदन करूं…और कर दिया। संगठन के नेताओं और निकाय मंत्री ने भी खुशी जाहिर की। सभी ने मेरे आवेदन को स्वस्थ्य परंपराओं का हिस्सा माना। लेकिन लोगों ने इसे बढ़ाचढ़ाकर बताना शुरू कर दिया। इस बात का मुझे दुख रहेगा।

                                किरण सिंह ने बताया कि जिले के किसी नेता या संगठन से मेरी कोई नाराजगी नहीं है। मेरी इच्छा थी मैने आवेदन कर दिया। टिकट मिले या नहीं मिले..यह संगठन का काम है। मेरे आवेदन को तिल का ताड़ बना दिया गया । जबकि मैने ना तिल का काम किया…और ताड़ बनाने वाली बात ही नहीं है। मेरा वजूद संगठन से हटकर नहीं है। मंत्री और संगठन के कारण ही मैने यहां तक का सफर किया है।

                 किरण के अनुसार मुझे बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ की जिम्मेदारी दी गयी है। जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन भी कर रही हूं। मैने आवेदन देकर बताना का प्रयास किया है कि बेटी अब मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। लेकिन मीडिया ने तिल का ताड़ बना दिया ।

         क्या संगठन से कोई नाराजगी है…यदि है तो कोई मनाने आया…सवाल के जवाब में किरण ने बताया कि नाराज होने या मनाने का सवाल ही नहीं उठता। संगठन का मैं हिस्सा हूं। हमारे यहां स्वस्थ्य लोकतंत्र की परम्परा है। लोगों ने… यहां तक कि खुद मंत्री ने भी आवेदन दिए जाने के बाद मेरी तारीफ की है। फिर कहीं से कोई नाराजगी का सवाल ही नहींं उठता है। जब मनीष राय दावेदारी कर सकते हैं..तो हमारे जैसी बेटियां आवेदन क्यों नहीं कर सकती। यही बताने के लिए ही मैने आवेदन किया है। लेकिन बताना जरूरी है कि मंत्री की अगुवाई में बेहतर काम किया जा रहा है।

                     किरण ने बताया कि बेटियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। मंत्री से लेकर आला नेताओं ने मेरे काम को सराहा है। आवेदन दिए जाने का अर्थ यह कतई नहीं होता कि मैं नाराज हूं..या फिर मेरा अपमान किया गया है। लेकिन इतना सच है आने वाले समय में बेटियों को गंभीरता से लिया जाएगा।

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