फर्जी हस्ताक्षर कर खाया 30 लाख का चावल…पूछताछ में उजागर…पूर्व कमेटी के लोगों ने कहा दर्ज हो 420 का मामला

बिलासपुर— लुतरा ग्राम पंचायत पंच पीडीएस दुकान संचालक ने फर्जी हस्ताक्षर कर तीस लाख का सरकारी चावल खा गया। चावल शासन की तरफ से लुतरा शरीफ दरगाह आने वाले दर्शनार्थियों के लिए जारी किया गया था। राशन दुकान संचालक अब्दुल शाहनवाज मेमन खाद्य विभाग निरीक्षक को गोलमोल जवाब देता रहा। उसने स्वीकार किया कि वह लुतरा शरीफ इंतजामिया कमेटी के इन्चार्ज शेख अखलाख का फर्जी हस्ताक्षर कर सरकार से चांवल तो लिया। लेकिन कमेटी को चांवल नहीं देकर बेंच दिया। जांच पड़ताल के दौरान लुतरा शरीफ दरगाह इंतजामिया कमेटी के चेयरमैन हाजी अखलाक खान भी मौजूद थे। जांच पड़ताल के दौरान खाद्य निरीक्षक मनीष यादव ने राशन दुकान संचालक को निर्धारित समय के अन्दर चांवल का हिसाब किताब देने को कहा है।

                             बताते चलेंं कि लुतरा शरीफ दरगाह में आने वाले दर्शनार्थियों के लिए साल भर निशुल्क लंगर का आयोजन किया जाता है। तात्कालीन कमेटी की मांग पर तात्कालीन जिला प्रशासन ने दर्शनार्थियों के लिए प्रत्येक महीने 9 क्विंटल चांवल निशुल्क देने का फैसला किया। राशन दुकान से चांवल वितरण का काम साल 2009 से मार्च 2018 तक किया गया। इसके बाद खाद्य विभाग से किन्ही कारणों से चांवल की सप्लाई बन्द हो गयी।

चांवल घोटाले का हुआ खुलासा

                         इसी बीच लुतरा शरीफ में इंतजामिया कमेटी में नए चेहरे आ गए। इसमें एक चेहरा लुतरा ग्राम पंचायत का सरपंच अब्दुल शाहनवाज मेमन भी शामिल हुआ। अब्दुल शाहनवाज मेमन गांव का पच होने के साथ ही सरकारी राशन दुकान का संचालक भी है। इसी बीच पुरानी कमेटी के सदस्यों ने फैसला किया कि शासन से प्रयास किया जाए कि दूर देश से आने वाले जायरीनों के लिए शासन से निशुल्क चांवल दिए जाने का प्रयास किया जाए। मामले में कमेटी के वर्तमान सदस्य और राशन दुकान संचालक अब्दुल शाहनवाज मेमन ने कहा कि यदि कमेटी रजिस्ट्रेशन दस्तावेज दे तो शासन से निशुल्क चांवल मिल सकता है।

                         सरकारी राशन दुकान संचालक से पूछताछ के बाद स्थानीय लोगों ने निशुल्क चांवल की मांग को लेकर खाद्य विभाग के अधिकारी से सम्पर्क किया। इसी दौरान लोगों को जानकारी मिली कि लुतरा शरीफ दरगाह में आने वाले दर्शनार्थियों के लिए जिला प्रशासन साल 2009 से प्रति महीने 9 क्विंटल चांवल देता है। मार्च 2009 में चांवल दिया जाना बंन्द किया गया। इतना सुनते ही स्थानीय लोगों को सांप सूंघ गया। लोगों ने बताया कि खाद्य विभाग से चांवल दिया जाता है उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

कलेक्टर से हुई शिकायत

                 खाद्य विभाग से निशुल्क चांवल वितरण की जानकारी के बाद इंतजामिया कमेटी के पूर्व चैयरमैन और कार्यालय प्रभारी ने आश्चर्य जाहिर किया कि निशुल्क चांवल वितरण की जानकारी नहीं है। मामले में कभी भी वर्तमान पंच और कमेटी क सदस्य,राशन दुकान संचालक ने भी नहीं बताया । इसके बाद सभी लोगों ने मिलकर कलेक्टर ड़ॉ संजय अलंग से लिखित शिकायत कर मामले में जांच की मांग की। लोगों ने बताया कि उन्हें अभी तक जानकारी नहीं है कि शासन से चांवल दिया जाता है। एक हजार क्विंटल चांवल कहां गया। राशन दुकान संचालक से पूछा जाएा।

                                               शिकायत के बाद कलेक्टर के आदेश पर खाद्य विभाग निरीक्षक मनीष यादव लुतरा स्थित राशन दुकान पहुंचकर छानबीन शुरू की। पूछताछ के दौरान राशन दुकान संचालक ने बताया कि चांवल मिलने की जानकारी् तात्कालीन चेयरमैन और कार्यालय प्रभारी को है। उन्हीं के हस्ताक्षर से प्रति महीने तुलरा शरीफ का चांवल लिया गया।

फर्जी हस्ताक्षर से उठाया चांवल

                     इसके बाद खाद्य निरीक्षक मनीष यादव ने राशन दुकान संचालक और इंतजामिया कमेटी के पूर्व चैयरमैन हाजी अखलाख खान और कार्यालय प्रभारी शेख अब्दुल गफ्र्फार के सामने जब पूछताछ की । तो कमेटी के दोनों पूर्व पदाधिकारियों को देखते ही राशन दुकान संचालक ने जुर्म कबूल कर लिया। अब्दुल शाहनवाज ने बताया कि निशुल्क चांवल मिलने की जानकारी किसी को भी नहीं थी। चेयरमैन और कार्यलाय प्रभारी का फर्जी हस्ताक्षर कर पिछले 9 सालों में एक हजार क्विंटल चांवल उठाया। उठाए गए चांवल की कीमत करीब तीस लाख रूपए हैं।

                                               खाद्य निरीक्षक ने जब पिछले 9 साल का हिसाब किताब मांगा तो दुकान संचालक ने हाथ खड़े कर दिए। अब्दुल शाहनवाज ने बताया कि उसके पास साल 2016 से लेकर अभी तक का ही रिकार्ड है।

मामले में खाद्य निरीक्षक ने कुछ भी बताने से इंकार किया है। मनीष यादव ने बताया कि अभी जांच चल रही है। खाद्य संचालक को रिकार्ड पेश करने के लिए कहा गया है। जांच के बाद रिपोर्ट को शासन के सामने रखा जाएगा।

मामले में सख्त कार्रवाई की मांग

             जांच पड़ताल के दौरान कमेटी के पूर्व पदाधिकारियो ने बताया कि अब्दुल शाहनवाज ने 420 का अपराध किया है। आज खुलासा हुआ कि उसने फर्जी हस्ताक्षर कर तीस लाख का घोटाला किया है। गरीबों का एक हजार क्विंटल बेचकर आस्था के साथ खिलवाड़ किया है। शासन से मांग है कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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