शिक्षाकर्मियों के तबादले से पनप रहा असंतोष,नेताओ ने कहा-परेशान करने के लिए न हो स्थानांतरण

बिलासपुर।स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक  LB, E और T  संवर्ग के स्थानांतरण में एक तो मंत्रीयो द्वारा अनुमोदन आवेदनों और दूसरा प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण हुये है। इस प्रक्रिया में आम शिक्षक बहुत प्रभावित हुए है। शिक्षको में रोष है । वे ट्रांसफर के लिए सालो का इंतजार करते जब आया मौका तो शिक्षक मंत्रियों के घर खोज नही पाए वही जो शिक्षक स्थानांतरण चाहते ही नही थे वे प्रशासनिक आदेशों की भेंट चढ़ गए।इस विषय पर प्रदेश के कई शिक्षक नेताओ से सीजीवाल डाट काम ने चर्चा कि शिक्षक नेता संजय शर्मा ने बताया कि  स्थानांतरण सुविधा के लिए होना चाहिए न कि, परेशान करने के लिए  सरकार से शिक्षकों को अपेक्षा होती है, अतः शिक्षक नेता हो या शिक्षक स्थानांतरण स्वेच्छा से होना चाहिए, प्रशासनिक व राजनैतिक स्थानांतरण नही होना चाहिए, शासन द्वारा स्थानांतरण की नीति स्वयं की इच्छा से स्थानांतरण चाहने वालो की सुविधा के लिए बनाया जाता है।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

इसका दुरुपयोग करना सर्वथा अनुचित व अव्यवहारिक है, संजय शर्मा ने कहा है कि यह स्वस्थ परम्परा नही है, इससे शिक्षकों की कार्य क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

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शिक्षक नेता केदार जैन ने बताया कि देश की सरकारें  शिक्षक और अन्य कर्मचारियों में  फर्क और शिक्षक के महत्व को भलीभाँति समझे। शासन अपने निर्णयों में शिक्षको की कार्यक्षमता का बेहतर उपयोग करे ।घर परिवार से दूर रहने वाले शिक्षको का बेहतर से बेहतर परिणाम की उम्मीद विभाग करता है। जो छत्तीसगढ़ के शिक्षा देते आये है। पर जब सुविधाओं की बात आती हैं । मामला टाल दिया जाता हैं। बिना कारण जाने प्रशासनिक स्थानांतरण शिक्षको पर थोपा गया है।

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शिक्षक नेताओ को भी अपने अधिकारों की आवाज बुलंद करने पर लगाम लगाने की परिपाटी अच्छी नही। शिक्षक का स्थानांतरण शिक्षक की मर्जी से होना चाहिए।प्रशासनिक स्थानांतरण पर सोशल मिडिया भी एक्टिव हो गया है। शिक्षक प्रदीप जायसवाल ने सोशल मिडिया में पोस्ट किया कि प्रशासनिक आधार पर ट्रांसफर आम शिक्षकों के साथ छलावा और धोखा है, जिसे  रद्द किया जाना चाहिए साथ ही साथ इस विषय  की उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए जिससे ऐसी गंभीर त्रुटि के राज से पर्दा उठ सके.

Comments

  1. By Rakesh dhruw

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