छत्तीसगढ़/एमपी के शिक्षाकर्मियों पर सोशल मीडिया में नई बहस, रवीश कुमार ने मुख्यमंत्रियों को लिखी यह बात…

बिलासपुर/नईदिल्ली।टीवी चैनल पर बेरोजगारों और कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं को लेकर सीरीज चलाने की वजह से अब पत्रकार रवीश कुमार के रूप में लोगों को एक ऐसा मंच मिल गया है जहां लोग अपनी समस्याएं पहुंचाने लगे हैं। देश के जाने माने पत्रकार रवीश कुमार तक छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के शिक्षाकर्मियों से जुड़ा मसला भी पहुंच गया है । उन तक सोशल मीडिया के जरिए शिक्षाकर्मियों के कई महीने के लंबित वेतन और संविलियन जैसे मुद्दे पहुंचाए गए हैं‌। इस पर पत्रकार रवीश कुमार ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के नाम एक संदेश भी दिया है और सोशल मीडिया पर शिक्षकों के द्वारा भेजी गई पोस्ट भी साझा की है। इसे लेकर सोशल मीडिया में बहस चल रही है और लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही है।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

माननीय मुख्यमंत्री जी, छत्तीसगढ़से निवेदन है कि तुरंत ध्यान दें । दुखद है कि किसी को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। इन्हें वेतन तुरंत दें। तीन महीने से वेतन न मिले तो कोई पढ़ाएगा क्या और खाएगा क्या।

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मा श्री रवीश कुमार जी, सादर प्रणाम ! मैं छत्तीसगढ़ राज्य से हूँ, मैं यहाँ के जिला पंचायत में व्याख्याता पद पर कार्यरत हूँ, और मेरे जैसे लगभग 25000 की संख्या में लोग इस पद पर कार्य कर रहे हैं , सर बहुत दुख के बात है कि हमको 3-4 महीने से सैलरी नहीं मिली है, क्योंकि हम शिक्षक तो हैं पर अभी पंचायत के नाम पर हमलोगो को शिक्षाकर्मी के नाम से जाना जाता है ! सर, कई जिलों में भूखे मरने की नौबत है ! नई सरकार ने हमें 2 वर्ष पूर्ण करने के बाद शिक्षा विभाग में संविलियन करने का वायदा किया था परंतु सरकार बनने के बाद चुपचाप बैठ गयी है ! बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है रवीश सर ! ऊपर से अब नई भर्ती, सीधे शिक्षा विभाग में कर रहे हैं जिनकी वेतन 40000/- के आस पास है, परंतु हम लेक्चरर / व्याख्याता के पद पर होते हुए भी महीने का 12000 से 14000/- ही मिलता है !

हम 6-7 सालों से काम कर रहे हैं और आज हम जूनियर हो गए ! ऊपर से आज के जमाने मे इतनी कम वेतन में गुजारा भी नहीं हो पा रहा ! सर हम बीजापुर, बस्तर, सुकमा, नारायणपुर, दंतेवाड़ा जैसे घोर नक्सली क्षेत्रों में अपनी सेवायें देते हैं ,जान की दाँव लगाकर शिक्षा और ज्ञान का प्रकाश विगत कई वर्षों से फैला रहे हैं ! पर हमपर हो रहे अत्याचार का उजागर करने का काम 1-2 को छोड़कर कोई मीडिया या न्यूज़ चैनल करने का नाम नहीं ले रही अब आप से ही आशा है रवीश सर कृपया आप अपना कीमती समय देकर हमारी कुछ सहायता कीजिये !
मैं नीचे सैंकड़ो-हज़ारों लोगों का नाम, नम्बर और उनके पदस्थ स्कूलों के जिले का नाम आपको भेज रहा हूँ ! आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है कि आप हमारे हित में कुछ न्याय करें और बोलें अब कोई और रास्ता नहीं दिखाई दे रहा !

माननीय मुख्यमंत्री जी , मध्यप्रदेश, ये क्या हो रहा है?

प्रिय रवीश जी
क्षमा कीजिए आपको बार बार लिख रहे हैं
पर क्या करें कुछ समझ में भी तो नहीं आ रहा
हम मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक प्राध्यापक परीक्षा में चयनित होने के के बावजूद अभी तक हम नियुक्ति नहीं प्राप्त कर पाये हैं
यह दूसरी दिवाली है सर पर ये भी खाली ही जायगी
मंत्रीजी से मिल लिये आंदोलन भी किए सोशल मीडिया पर भी खूब लिखे फिर भी कुछ नहीं हो रहा
कॉलेज की हालत किसी से भी छुपी नहीं है पर फिर भी किसी को इस बात से कोई फर्क़ नहीं पड़ता
क्या करें सर
हम 2700 परिवार सिर्फ इन्तजार के लिए ही बने हैं ऎसा लगता है
घूम फिर के आपके पास आ जाते हैं इसलिए माफ कीजिये
धन्यवाद
सादर


रविश कुमार की शनिवार सुबह किए पोस्ट पर लोगो ने अपनी प्रतिकृया भी दी है।नवदीप खरे ने लिखा कि छत्तीसगढ़ सरकार के पास शिक्षको को देने के लिए पैसा हो या ना हो पर, पर नया रायपुर में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के निवास के लिए 591. 75 करोड़ की बंगले बनाने की योजना का भूमिपूजन हो गया धनतेरस को.
जितेंद्र कुमार साहू ने लिखा कि सहृदय धन्यवाद रवीश जी ..छ.ग.सरकार ने जन घोषणा में शिक्षाकर्मियों का संविलियन करनें का वादा किये है किंतु अब तक ना तो संविलियन किये है ना ही स्थानांतरण का लाभ मिला है और तो और तो दशहरा और दिवाली त्यौहार में कई महीनों से वेतन नहीं मिला है .शिक्षक साथी मानसिक रूप से टूट चुके है ..#संविलियनकरोसरकार

ज्योतिराज पंडा लिखते है कि आदरणीय !
1. छग मे शिक्षाकर्मी ऐसा शिक्षक का पद
है , जिसे सत्ताधारियो ने वर्षबंधन 1,2,3 वर्ष नही 8,8,बरस तक शोषण किया जा रहा है,
8 बरस तक नही डीए दिया जा रहा है,नही स्थानांतरण,और न ही चाइल्ड लीव,किसी भी प्रकार शासन द्वारा कोई महंगाई भत्ता नही दिया जाता है।2.वर्तमान सरकार के द्वारा जन घोषणा पत्र मे “दो वर्ष पूर्ण शिक्षाकर्मियो के संविलियन का उल्लेख है” मगर एक वर्ष बित जाने पर भी अमल नही किया जा रहा है।
हमारी मांग लगातार शासन अपने अपने तरीके से जारी है।आप महानुभाव से निवेदन है कि इस विषय के मर्म को समझते हुये उचित न्याय शिक्षाकर्मियो को प्रदान करने मे आपकी भूमिका अपेक्षित है।
सधन्यवाद।

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Comments

  1. By Chandra shekhar soni

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