मेरी नज़र में… Archive

सरायपाली थाना स्टाफ़ ने पेश की जन सेवा की मिसाल, गरीब महिला को बिटिया की शादी के लिए तोहफ़े में दिया पलंग,टीवी,राशन

बिलासपुर । देशभक्ति जनसेवा लिखी हुई पट्टिका शुरू से हर थाने में देखते आ रहे हैं। इस सूत्र वाक्य को सर माथे पर रखकर पुलिस विभाग अपना काम करता है। यह महक़मा दिन रात कानून की रखवाली के लिए जुटा रहता है। इस दौरान कई ऐसी खबरें भीं आती हैं, जिन्हें देखकर इस सूत्र वाक्य

पौरूष – परमार्थ के प्रभुः परशुराम डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा

रामनवमीं तथा अक्षय तृतीया ,लगातार चैत्र तथा बैशाख में दो महाप्रभुओं की जयंती के उत्सव है।  दाशरथि राम का मध्यान्ह चैत्र मास याने मधुमास में अभिजित नक्षत्र में अवतरण हुआ। विप्र धेनु, सुरसंत हित लीन्ह मनुज अवतार। निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गोपार।।             वातावरण और पर्यावरण के प्रदूषण को नापने के लिए विप्र

“कका अभी ज़िंदा हे..”स्लोगन को मिली नई ख़ुराक…छत्तीसगढ़िया बोरे-बासी की ताक़त से देश की सबसे बड़ी सियासी ताक़त को चुनौती.. !

(रुद्र अवस्थी)मजदूर दिवस पर अगर बोरे – बासी सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रहा हो ……फेसबुक और व्हाट्सएप पर बोरे – बासी खाते नेताओं, आईएएस- आईपीएस अफसरों और आम लोगों की तस्वीरें छाई हुई हो तो यह ख़बर छत्तीसगढ़ ही नहीं देश के दूसरे हिस्सों के लिए भी बड़ी बन ही जाती है। लेकिन सोशल

डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्माः जन्मदिन पर अदब के मजदूर मुसाफ़िर को “आखर के अरघ “

1 मई 1928 के दिन जांजगीर पुरानी बस्ती स्थित बड़े दुबे के घर चिर प्रतीक्षित बालक का जन्म हुआ । माता सेवती देवी और पिता श्याम लाल दुबे (शर्मा ) सहित पूरे परिवार को प्रसन्नता हुई ।संयुक्त परिवार था तो घर में चार बड़े भाई तीन बड़ी बहनों का दुलार पाकर बालक का बचपन समृद्ध

अब ऐसे बेनक़ाब हो रहे हैं घूसख़ोर… आप भी हिम्मत कीजिए..!सिस्टम को लेना पड़ेगा एक्शन

बिलासपुर(रुद्र अवस्थी)।स्कूल के दिनों में हिंदी कक्षा का निबंध लेख़न पाठ सभी को याद होगा….। ज़िसके पर्चे में यह सवाल इंपार्टेंट माना जाता था और अक्सर दोहराया भी जाता था कि – “विज्ञान वरदान या अभिशाप..” विषय पर एक निबंध लिखो। निबंध के सवाल पर हमेशा दो चार विकल्प भी होते थे…। जैसे मेरा स्कूल,

परसा कोल ब्लॉक : पेड़ कटाई का सोशल मीडिया में विरोध, पढिए मार्मिक पोस्ट… कैसे उजड़ जाएगा सरगुजा, सूरजपुर, कोरबा का जंगल..? और हमसब मौन क्यों हैं..?

क़ोयला ख़दान के नाम पर सरगुजा-सूरज़पुर – कोरबा इलाके में करीब साढ़े आठ सौ हेक्टेयर जंगल की कटाई की चर्चा इन दिनों सोशल मीडिया पर भी बनी हुई है। छत्तीसगढ़ के लोग इस सिलसिलें में लगातार लिख रहे हैं और पेड़ों की कटाई का विरोध भी कर रहे हैं। जिसमें प्रमुख़ बात यह है कि

ऋतुराज बसंत की तरह यादों में आते रहेंगे बसंत शर्मा…प्रतिमा का अनावरण करेंगे CM भूपेश बघेल

बिलासपुर।डीएलएस स्नातकोत्तर महाविद्यालय बिलासपुर के संस्थापक और बिलासपुर नगर निगम में पूर्व नेता प्रतिपक्ष शिक्षाविद बसंत शर्मा की पहली पुण्यतिथि पर 25 अप्रैल सोमवार को उनकी प्रतिमा का अनावरण डीएलएस कॉलेज परिसर अशोक नगर सरकंडा में किया जा रहा है। स्वर्गीय बसंत शर्मा की प्रतिमा का अनावरण छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे। प्रतिमा के

छत्तीसगढ़ के दिलचस्प उपचुनाव( चार)- उपचुनाव में ही पहली बार विधायक बने थे बलराम सिंह..पढ़िए- 1995 के खैरागढ़ उपचुनाव में क्या रहा नतीज़ा..?

छत्तीसगढ़ में विधानसभा के उपचुनावों का इतिहास दिलचस्प रहा है। अविभाज़ित मध्यप्रदेश के समय से लेकर छत्तीसगढ़ बनने के बाद भी छत्तीसगढ़ की विधानसभा सीटों पर कई ऐसे उपचुनाव हुए हैं, जिनमें मुख्यमंत्रियों की किस्मत का फैसला भी हुआ है। कई ऐसे चुनाव हैं, जिसमें सत्तापक्ष के उम्मीदवार को भी हार का सामना करना पड़ा

Chhattisgarh के दिलचस्प उपचुनाव(तीन)–जब जरहागांव सीट में वोट की गिनती से पहले ही नारा गूँज गया था- “जीत गया भई जीत गया…निरंजन भैया जीत गया…”

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में विधानसभा के उपचुनावों का इतिहास दिलचस्प रहा है। अविभाज़ित मध्यप्रदेश के समय से लेकर छत्तीसगढ़ बनने के बाद भी छत्तीसगढ़ की विधानसभा सीटों पर कई ऐसे उपचुनाव हुए हैं, जिनमें मुख्यमंत्रियों की किस्मत का फैसला भी हुआ है। कई ऐसे चुनाव हैं, जिसमें सत्तापक्ष के उम्मीदवार को भी हार का सामना करना पड़ा

छत्तीसगढ़ के दिलचस्प उपचुनाव (दो) आज भी याद है..खरसिया में अर्जुन सिंह और जूदेव के बीच काँटे का वह मुक़ाब़ला

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में विधानसभा के उपचुनावों का इतिहास दिलचस्प रहा है। अविभाज़ित मध्यप्रदेश के समय से लेकर छत्तीसगढ़ बनने के बाद भी छत्तीसगढ़ की विधानसभा सीटों पर कई ऐसे उपचुनाव हुए हैं, जिनमें मुख्यमंत्रियों की किस्मत का फैसला भी हुआ है। कई ऐसे चुनाव हैं, जिसमें सत्तापक्ष के उम्मीदवार को भी हार का सामना करना पड़ा

सुधीर खंडेलवाल की कलम से..कैसे बना – बिलासपुर की राज़नीति का बगीचा

होली के दिन प्रसाद में मिली भंग चढ़ी तो चढ़ते गई। उस भांग की तरंग में हमने अपनी कल्पना में अपने कुछ चर्चित नगरवासियों को राजनीति की ब़गिया में पेड़- पौधों का अवतार लेते गुए देख़ा । सनातन मान्यता के अनुसार पिछले जन्म का असर इस जन्म में ही रहता है। ज़ो कर्मफल कहलाता है।

रंग पंचमी पर शब्दों की पिचकारीः सुधीर खंडेलवाल की कलम से बिलासपुर को पहचानिए….

होली के मौक़े पर बरसों पहले से ही दूसरे शहरों की तरह बिलासपुर में भी होलियाना और मज़ाकिया मूड में लोगों को उपाधियां ( टाइटिल ) से विभूषित करने की परंपरा रही है। आज़ के दोर में यह परंपरा भले ही गुम हो गई हो। लेकिन बिलासपुर के गोलबाज़ार में बरसों तक “होली की गोली”

PHOTO-बिलासपुर की होली का अद्भुत नज़ारा…दो साल बाद फ़िर झूम उठा गोलबाज़ार

यह नजारा बिलासपुर के गोल बाजार का है….। जहां रंगारंग- आनंद उत्सव मनाया जा रहा है। यहां रंग भी है.. तरंग भी है… मस्ती भी है ….और उमंग भी है…। गोल बाजार की गली आज रंग और उमंग से सराबोर है..। पूर्व महापौर राजेश पांडे की अगुवाई में उनकी पूरी टीम ने यहां इस आनंदोत्सव

तिफरा फ्लाईओवर पर सधे कदमों से पैदल चलकर,बिलासपुर की तरक़्क़ी को नई तेज़ रफ़्तार का संदेश दे गए भूपेश बघेल

बिलासपुर।बिलासपुर में काफी लंबे समय से बन रहे तिफरा फ्लाईओवर का लोकार्पण करने पहुंचे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को लोकार्पण करने के बाद कुछ दूर तेज़ कदमों से पांव पांव चलकर तरक्की की इस खूबसूरती को दिल से महसूस किया….. तो बिलासपुर वालों के लिए इसके पीछे यह मैसेज भी था कि

Chhattisgarh:बात बीते बरस की – BJP की सियासत में अरुण साव के नाम रहा 2021

बीते बरस 2021 में छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सियासत पार्टी को रिचार्ज़ करने की कोशिशों के बीच गुजरी। जिसके चलते अलग-अलग स्तर पर बदलाव भी नजर आते रहे। पार्टी ने पिछले साल की शुरुआत के समय से ही अपना प्रदेश प्रभारी बदला और इस ब़दलाब के बाद छत्तीसगढ़ में बीजेपी को जिस सांचे में ढालने

“चप्पल” को हैडिंग बनाकर… ख़बर लिखने की नौबत क्यों..? क्या मुंगेली की नेतृत्व शून्यता की वज़ह से बदल रहे हालात…?

मुंगेली जिला पंचायत की महिला सभापति और सीईओ के बीच विवाद की खबर इन दिनों सुर्खियों में है। सीधे तौर पर इस घटना के बाद जिला पंचायत की महिला सभापति को ट्रोल कर दिया गया और माहौल बना दिया गया है कि जनप्रतिनिधियों के इस तरह के रवैये की वजह से सरकारी सिस्टम को काम

छत्तीसगढ़ सरकार तक क्यों नहीं पहुंच पा रही है… एक लाख़ महिलाओं की आवाज़…?

( गिरिज़ेय ) छत्तीसगढ़ के किसी भी छोटे बड़े गांव में चले जाइए……। वहां आंगनबाड़ी केंद्र जरूर मिलेगा….। जहां  3 साल से 6 साल की उम्र वाले छोटे-छोटे नन्हे-मुन्ने बच्चों की देखभाल करते महिलाएं भी मिल जाएगी । हरएक  बच्चे को स्वस्थ और खुशहाल जिंदगी जीने का हक होता है। हर मां बाप उसे यह

बादल सरोज की कलम से- ध्रुवीकरण, विभाजन और उन्माद ही भाजपा के अंतिम अस्त्र

उर्दू के शायर सदा नेवतनवी साहब का शेर है कि : “अब है तूफ़ान मुक़ाबिल तो ख़ुदा याद आया हो गया दूर जो साहिल तो खुदा याद आया !!” 🔴 इन दिनों यह शेर पूरी तरह यदि किसी पर लागू होता है, तो वे हैं नरेंद्र मोदी के बाद भाजपा में – गिनती जहाँ पूरी

छत्तीसगढ़ के उस गाँव में एक-एक घर तक पहुंचा दिवाली का नायाब तोहफ़ा.. बिटिया बनी डिप्टी कलेक्टर तो झूम उठा पूरा गाँव..

यह तस्वीर छत्तीसगढ़ में  जांजगीर – चांपा जिले के छोटे से गांव धुरकोट की है । यहां के सरकारी हाई स्कूल के सामने गाजे- बाजे के साथ यह जश्न मनाया जा रहा है । क्योंकि इसी स्कूल में पढ़ी- लिखी पिंकी मनहर  सीजीपीएससी में बेस्ट पोजीशन लाकर डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुई है।

संदर्भ महासमुंद मारपीट प्रकरणः क्या ऐसे ही प्रशासन चलाकर अपनी ‘घुड़सवारी’ पर इठला रहे हैं मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता-जनप्रतिनिधि?

( अनिल पुरोहित, पत्रकार ) – कभी, जब छत्तीसगढ़ के मौज़ूदा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के नाते विपक्ष की राजनीति करते थे, प्रदेश के पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी शासनकाल में ‘घुड़सवारी’ के जुमले के साथ तत्कालीन प्रदेश सरकार पर इस बात के लिए तानाक़शी करते थे कि भाजपा के लोगों को प्रशासन