संविदा बिजली कर्मचारी बन गए लाश, नियमितीकरण व अनुकंपा नियुक्ति है मांग,16 दिनों से हड़ताल जारी,विरोध के लिए ओढा कफन

रायपुर।संविदा विद्युत कर्मचारी संघ शुक्रवार को 16वे दिन अनिश्चितकालीन आंदोलन में रहा। संविदा कर्मियों ने कफन ओढ़ कर पावर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि 16 दिन के आंदोलन के बाद भी शासन प्रशासन ने अब तक कोई सुध नहीं ली है। इससे विद्युत संविदा कर्मियों में आक्रोश है। विद्युत कर्मी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं और उन्हें कफ़न भी नसीब नहीं होता। इसी तर्ज पर कफन ओढ़ कर प्रदर्शन किया गया।राज्य शासन और पावर कंपनी प्रबंधन का ध्यान मांगों की ओर आकृष्ट कराने संविदा कर्मियों ने शुक्रवार को कफन ओढ़ कर प्रदर्शन किया।संविदा कर्मियों का कहना है कि ना उन्हें नियमित किया जा रहा है और ना पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है।

छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी पिछले 14 दिनों से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं।मामले में अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।इससे निराश होकर आक्रोशित होकर कर्मचारी CM हाउस घेराव करने के लिए निकले थे, लेकिन पुलिस ने बीच में ही रास्ते में ही रोक लिया। बुधवार को कर्मचारियों के नियमितीकरण के संबंध में छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी महासंघ ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी के अध्यक्ष को पत्र लिखा है। जारी पत्र में उल्लेख है कि महासंघ ने पत्रो व द्विपक्षीय वार्ता में पावर कंपनी में कार्यरत लगभग तीन हजार संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की मांग रखते हुए तर्क रखे थे लेकिन प्रबंधन की ओर से कहा गया कि सीधी भर्ती में संविदा कर्मचारियों को विशेषांक प्रदान कर इन्हें ही समाहित कर लिया जाएगा।

महासंघ द्वारा प्रबंधन की इस नीति पर शंका जाहिर करते हुए इसे कानूनी तौर पर स्वीकार करने योग्य करार दिया था।लेकिन प्रबंधन द्वारा इस नीति पर आगे बढ़ते हुए विज्ञापन जारी किया गया और कालांतर में पदों की संख्या में बढ़ोतरी करते हुए संविदा कर्मचारियों के अनुभव के आधार पर 20 और 30 अंक अतिरिक्त प्रदान करते हुए भर्ती में वरीयता देने की बात विज्ञापन में की गई।

पावर कंपनी द्वारा भर्ती विज्ञापन जारी करने के बाद से ही महासंघ को यह प्रतीत हो रहा था कि इस प्रक्रिया में दिक्कत आने की संभावना है क्योंकि 3000 पदों पर सीधी भर्ती के विज्ञापन जारी होने के बाद लगभग डेढ़ लाख बेरोजगारों ने आवेदन शुल्क तीन सौ का भुगतान पावर कंपनी को करते हुए आवेदन प्रेषित किया। इस तरह डेढ़ लाख आवेदकों से लगभग तीन करोड़ से ज्यादा की राशि पावर कंपनी को मिली।जबकि स्पष्ट ही था इन आवेदकों में से किसी को नौकरी प्राप्त होना ही नहीं था। उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ में एक व्यक्ति द्वारा पावर कंपनी के इस भर्ती विज्ञापन 12 अगस्त 2021 को चुनौती दी गई। उच्च न्यायालय का परीक्षण करने के बाद पूरी प्रक्रिया को अनुचित करार देते हुए निरस्त कर दिया है।

महासंघ ने कहा कि इस तरह संविदा कर्मचारियों को नियमित किए जाने की प्रक्रिया छलावा ही साबित हुई है और संविदा कर्मचारी स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि पावर कंपनी में लाइन कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और वर्तमान में यही संविदा कर्मचारी ही विद्युत वितरण व्यवस्था को सुचारू रखते हुए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह कर रहे हैं ऐसे में इन्हें अति न्यून वेतन पर अति जोखिम पूर्ण और कार्य लिया जाना निश्चित तौर पर न्याय पूर्ण नहीं है। पिछले साल में बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी दुर्घटना के शिकार हुए जीने ना तो चिकित्सा सुविधा प्रदान किया गया और ना ही आश्रित परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति।

महासंघ ने कर्म संविदा कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करने और मृत कर्मचारियों के एक आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान किए जाने का मामला प्रबंधन के सामने रखा है लेकिन इस पर अभी भी ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा आदेश क्रमांक 3528 ,23 नवंबर को एक संविदा कर्मचारी के परिजन को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने संभवतः इसकी शुरुआत कर दी है लेकिन बड़ी संख्या में मृत संविदा कर्मियों के किसी आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिली है।

संघ की जानकारी में संविदा कर्मचारी के परिजन को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाने के संबंध में कोई नीतिगत परिपत्र नहीं आया है। महासंघ ने संविदा कर्मचारी के परिजन को दी गई अनुकम्पा नियुक्ति का स्वागत करते हुए मांग किया है कि भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने का आदेश जारी कर संविदा कर्मचारियों को नियमित करें।भर्ती विज्ञापन के अनुक्रम में सभी आवेदन कर्ताओं को उनके द्वारा जमा किए गए आवेदन शुल्क वापस किया जाए तथा सभी मृत और विकलांग संविदा कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए और ऐसे सभी संविदा कर्मचारी जो कि दुर्घटना के शिकार हुए हैं उन्हें सार्वजनिक अवकाश स्वीकृत करते हुए उनके इलाज में हुए व्यय की शतप्रतिशत प्रतिपूर्ति की जाए।

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