दिल्ली के ज्ञानोत्सव में सीयू की स्वावलंबी छत्तीसगढ़ योजना की धमक,एनईपी क्रियान्वयन के लिए साथ आएं उच्च शिक्षण संस्थान- कुलपति प्रो. चक्रवाल

बिलासपुर। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल दिल्ली के आईसीएआर में 17-19 नवंबर तक आयोजित तीन दिवसीय ज्ञानोत्सव-2079 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल, सक्रिय एवं समग्र रूप में क्रियान्वयन पर प्रस्तुतिकरण किया। प्रस्तुतिकरण के दौरान मंचस्थ अतिथियों में डॉ. सुभाष सरकार राज्य मंत्री शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार, विनय सहस्त्रबुद्धे अध्यक्ष आईसीसीआर, डॉ. भूषण पटवर्धन चेयरमैन नैक एक्सिक्टिव, डॉ. आर.के. मित्तल कुलपति चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय भिवानी हरियाणा एवं प्रो. पंकज मित्तल महासचिव एआईयू उपस्थित रहे।
ज्ञानोत्सव 2079 के मंच से कुलपति प्रो. चक्रवाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के संबंध में गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे सक्रिय, समन्वित एवं समग्र प्रयासों के बारे में अपना प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन का दायित्व सरकार और समाज दोनों पर बराबर है। ऐसे में सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को एक मंच पर आकर सामूहिक प्रयास करने होंगे ताकि युवाओं को इस लोकोपकारी नीति का संपूर्ण लाभ प्राप्त हो सके।
प्रो. चक्रवाल ने बताया कि किस प्रकार गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, स्वावलंबी छत्तीसगढ़ योजना के माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रदेश एवं देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बना हुआ है। स्वावलंबी छत्तीसगढ़ योजना शिक्षा से आत्मनिर्भर भारत के सपने को चरणबद्ध तरीके से साकार करने की पहल है। हमें युवाओं के मध्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अनुभवजन्य शिक्षा के साथ रोजगारपरक एवं कौशल विकास के महत्व को प्रसारित करना होगा। इसके लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में जारी विभिन्न पाठ्यक्रमों में अनुभवजन्य शिक्षा के अवयवों को पचास प्रतिशत तक शामिल करने का लक्ष्य ह


कुलपति प्रो. चक्रवाल ने कहा कि गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के नेतृत्व में देश के प्रतिष्ठित 12 केन्द्रीय विश्वविद्यालय एक साथ मिलकर अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट योजना पर एक मत होकर सक्रियता के साथ कार्य कर रहे हैं। जिसमें विद्यार्थी किसी एक संस्थान से अर्जित क्रेडिट को किसी अन्य संस्थान में पढ़ते हुए डिग्री पूरा करने के लिए कभी भी प्रयोग में ला सकता है। इस हेतु उन्होंने सभागार में उपस्थित देश के समस्त केन्द्रीय एवं राज्य, तकनीकी, चिकित्सा तथा उच्च शिक्षण संस्थानों के कुलपतियों एवं निदेशकों से आव्हान किया कि छात्रों को व्यापक अवसर प्रदान करने के लिए अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट लागू करने के लिए साथ आएं।
प्रो. चक्रवाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख लक्ष्य सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को बेहतर बनाने की दिशा में एबीसी को गेम चेंजर बताया। इसके माध्यम से विद्यार्थी रोजगार के साथ शिक्षा अर्जित कर सकता है, अधूरी शिक्षा को कभी भी पूरी कर सकता और जीवन पर्यात्न अनवरत अपनी शिक्षा का कार्यक्रम जारी रख सकता है। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने अल्प समय में देश एवं विदेश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों से साथ एमओयू किये हैं जिसके माध्यम से युवाओं को उद्योगों के साथ जोड़कर इंटर्नशिप प्रोग्राम, उद्यमिता एवं कौशल विकास एवं शिक्षा के साथ धनोपार्जन के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
इस अवसर पर भारत सरकार के शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष सरकार ने अपने उद्बोधन में कुलपति प्रो. चक्रवाल के द्वारा गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में किये गये नवाचार के प्रयोगों की सरहना करते हुए अन्य शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों को प्रेरणा लेने के लिए आवाह्न किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सफल एवं संपूर्ण क्रियान्वयन के लिए यहां उपस्थित सभी संस्थान प्रमुखों को आपस में सामान्जस्य एवं सतत संपर्क बनाए रखना होगा।
उल्लेखनीय है कि ज्ञानोत्सव-2079 के तीसरे संस्करण में विद्यालयीय शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, कृषि शिक्षा एवं विधि शिक्षा के अलावा नियामक संस्थानों जिनमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयीय संस्थान, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, भारतीय विश्वविद्यालय संघ से संबंधित देश एवं विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों के प्राचार्य, कुलपति एवं निदेशक के साथ-साथ शिक्षाविद्, शिक्षक, छात्र एवं अभिभावक तथा प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।

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