शिक्षाकर्मियों को सुको का सहारा…हरियाणा में समान कार्य पर समान वेतन…संघ नेता संजय ने कहा प्रदेश सरकार को भी देना होगा

BHASKAR MISHRA
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SHIKSHAKARMI...बिलासपुर— लम्बे समय से समान कार्य समान वेतन की मांग कर रहे छत्तीसगढ़ शिक्षाकर्मी संघों को सुप्रीम कोर्ट का सहारा मिल गया है। पंजाब एवं हरियाणा के कर्मचारियों की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने समान कार्य,समान वेतन पर मुहर लगाया है। आदेश के बाद हरियाणा सरकार ने समान कार्य समान वेतन का आदेश भी पारित कर दिया है। अब छत्तीसगढ के शिक्षाकर्मोयों ने कोर्ट के आदेश और हरियाणा सरकार के फैसले को आंदोलन का हिस्सा बनाने का एलान किया है। शिक्षाकर्मी संघ के नेता संजय शर्मा ने बताया कि हरियाणा की तरह प्रदेश में भी कोर्ट के आदेश को अमल में लाने अनिश्चितकालीन हड़ताल के माध्यम से दबाव बनाया जाएगा।
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                             sanjay_schoolपिछले दो दशक से अधिक समय से अविभाजित मध्यप्रदेश से लेकर वर्तमान छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मी लगातार समान कार्य समान वेतन की मांग कर रहे हैं। आंदोलन और अन्य माध्यमों से सरकार पर लगातार दबाव भी बना रहे हैं। 30 अक्टूबर 2017 को प्रदेश के सभी 146 ब्लाक में एकदिवसीय हड़ताल कर सरकार पर 9 सूत्रीय मांग को लेकर दबाव बनाया। 20 नवम्बर को अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाने का एलान भी किया । इधर हरियाणा सरकार ने पंजाब बनाम जगजीत सिंह की याचिका पर 26 अक्टूबर 2016 के फैसले पर 1 नवम्बर 2017 से राज्य में समान कार्य समान वेतन देने का एलान कर दिया है। हरियाणा के फैसले से प्रदेश शिक्षाकर्मी संघ को संजीवनी मिल गयी है।
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फैसला हरियाणा का…स्वागत छत्तीसगढ़ में…
प्रदेश  शिक्षाकर्मी संघ के कई पदाधिकारियों ने हरियाणा सरकार के फैसले का स्वागत किया है। शिक्षाकर्मी पदाधिकारियों ने बताया कि  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दोनों राज्यों के विभिन्न इकाइयों में कार्यरत कर्मचारियों ने आवेदन दाखिल किया था। हाईकोर्ट ने लम्बी सुनवाई के बाद कर्मचारियों के हित में समान काम. समान वेतन का फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने भी समान काम और समान वेतन का आदेश 26 अक्टूबर 2016 को दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 3 नवम्बर2017 को हरियाणा सरकार ने 1 नवम्बर 2017 से समान काम के लिए समान वेतन देने का एलान किया है।

शिक्षाकर्मियों में जग गयी उम्मीद

shikshakarmi..                    सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हरियाणा सरकार के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में लम्बे समय से संघर्ष कर रहे शिक्षाकर्मियों में उम्मीद की किरण जग गयी है। शिक्षाकर्मी नेता संजय शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में शिक्षा और पंचायत विभाग दो अलग-अलग कर्मचारी वर्ग काम कर रहे हैं। एक छत के नीचे सभी शिक्षक एक ही तरह का अध्यापन कार्य करते हैं। लेकिन वेतन में जमीन आसमान का अन्तर है। पिछले दो दशक से अधिक समय से सरकार शिक्षाकर्मियों का शोषण कर रही है। प्रदेश सरकार को हरियाणा सरकार की तरह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अमल में लाना ही होगा। हरियाणा सरकार के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ शासन पर दबाव बढ़ गया है। शिक्षाकर्मी संगठन अनिश्चित कालीन हड़ताल के माध्यम से प्रदेश सरकार पर कोर्ट के आदेश को अमल में लाने के लिए दबाव बनाएंगे।

कोई पहला आदेश नहीं-संजय शर्मा
सुप्रीम कोर्ट का यह कोई पहला आदेश नहीं है। पहले भी कई आदेश और निर्देश मिल चुके हैं। लेकिन शासन लागू तो करे। हमारे साथियों ने हाईकोर्ट में इस तरह के कई मामले लगा रखे हैं। फैसला भी जल्द आ जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हरियाणा सरकार का फैसला स्वागतयोग्य और उत्साहजनक है। छत्तीसगढ़ के हाईकोर्ट को भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए। ना केवल निर्णय बल्कि सख्त आदेश भी देना होगा। हम दो दशक से अधिक समय से समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग कर रहे हैं। संविलियन मांग की मुख्य वजह भी यही है। यहां तो समान कार्य समान वेतन की बात दूर…शिक्षाकर्मियों को सम्मानजनक स्थान भी हासिल नहीं है। सरकार कुछ समझने को तैयार नहीं है। एक लाख 84 हजार शिक्षाकर्मी परिवार का शोषण किया जा रहा है। हरियाणा सरकार के फैसले के बाद प्रदेश सरकार को  बैकफुट पर आना ही होगा। 9 सूत्रीय मांग भी पूरी होगी।

चार सप्ताह में हाईकोर्ट ने मांगा जवाब–बनाफर
बनाफर ने बताया कि स्कूलों में शिक्षाकर्मियों का भरपूर शोषण किया जा रहा है। कई स्कूलों मे सालों से सरकारी प्रधानपाठक नहीं हैं। पद की जिम्मेदारी शिक्षाकर्मियों को उठाना पड़ रहा है। फिर भी समान काम के लिए समान वेतन नही दिया जाता है।हम लोग सरकार की रूख पर नजर बनाकर रखे हैं। सुप्रीम कोर्ट का आदेश और हरियाणा सरकार के फैसले को छतीसगढ़ शासन को सकारात्मक ढंग से लेना होगा। देखते हैं कि सरकार का रूख किस तरह का रहता है। हमारे साथियों ने छत्तीसगढ हाईकोर्ट में समान काम समान वेतन को लेकर दायर की है। कोर्ट ने मामले में शासन से चार हफ्ते के अन्दर जवाब मांगा है ।

अब लागू करना ही होगा
संदीप त्रिपाठी नाम के एक शिक्षाकर्मी ने बताया कि धीरे धीरे सभी राज्यों में समान काम समान वेतन की पहल शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ में मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर है। विश्वास है कि फैसला हमारे ही पक्ष में आएगा। जब हरियाणा समेत कई राज्यों में समान कार्य समान वेतन दिया जा सकता है तो छत्तीसगढ़ में क्यों नहीं। फिलहाल छत्तीसगढ़ शासन दबाब में है।

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