हमार छ्त्तीसगढ़

भ्रष्ट बीईओ की शिकायत सूचना आयुक्त तक पहुंची..शासन ने बीईओ को पद से हटाया..उठने लगी कलेक्टर जांच की मांग

भाटापारा के विवादास्पद बीईओ को हटाकर प्रशासन ने पल्ला झाड़ा, रामजी पाल नए बीईओ बने*

बिलासपुर—-राज्य शासन ने पिछले दिनों आदेश जारी कर  भाटापारा विकास खंड शिक्षा अधिकारी के के यदु को हटाकर व्याख्याता के मूल पद पर वापस लौटा दिया है। यदु के खिलाफ शासन प्रशासन को लगातार भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर शिकायत मिल रही थी। बताया जा रहा है कि मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचने के बाद प्रशासन ने आनन फानन में यदु को हटाया गया। बताया तो यह भी जा रहा है कि यदु ने उच्च अधिकारियों की जमकर सेवा किया है। इसलिए उच्च अधिकारी भी के.के.यदु को बचाने का ना केवल भरपूर प्रयास कर रहे है। बल्कि जांच कार्रवाई से बचाने को लेकर कोई कोर कसर भी नहीं छोड़ रहे हैं।
 जानकारी देते चलें कि महीनों  पहले सीजी वाल में प्रकाशित खबर में यह बताया था कि भाटापारा में जुगाड़ से प्रभारी बीईओ बने के के यदु शिक्षा विभाग की दुकान चला रहे हैं।स्थानीय नेताओं के दम पर भाटापारा में खुले बाजार शिक्षा विभाग की बोली लगाने से भी बाज नहीं आ रहे है। यदु के महज चौदह महीने कार्यकाल में विभागीय योजनाओं ने दम तोड़ दिया। 
  यदु के कार्यकाल में ही मध्यान्ह भोजन शाखा में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा षड्यंत्र चल रहा था। जानकारी राज्य सूचना आयोग तक पहुंची। लेकिन शिकायत कर्ता ने यदु से समझौता कर मामले को रफा दफा कर दिया। कोरोना काल में भंडार क्रय नियमों के खिलाफ कागज पर खरीद समिति बनाकर कागज में ही लाखों की सफाई सामाग्री बंद स्कूलों में  खपाने का कारनामा करने वाले प्रभारी बीईओ किसी भी अधिकारी की कुर्सी की नाक को नीचा नहीं होने दिया। इसलिए शासन की मनाही के बावजूद शिक्षकों को मनचाही जगहों में अध्ययन व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपए की बंदरबांट किया। कई बार कलेक्टर और डीईओ के अधिकार क्षेत्र वाले कार्यों में भी यदु ने बेधड़क आदेश निकाला।
           विभाग के अन्दर से  यदु के खिलाफ विशेष जांच की मांग उठने लगी है। एक शिक्षक ने बताया कि यदि कलेक्टर विषेष समिति का गठन कर जांच का आदेश दें तो यदु का काला सच सबके सामने आ जाएगा। रिश्तेदारों और चाटुकारो से घिरे प्रभारी  बीईओ के  कार्यकाल में किए गए समस्त आहरण  और फैसलों की कलई खुल जाएगी।
शिक्षकों से ट्रांसफर के नाम पर उगाही
प्रभारी बीईओ यदु ने ब्लॉक में पदस्थ होने के बावजूद शिक्षकों से ट्रांसफर के नाम पर उगाही में माहिर थे। जिला संभाग और  इंद्रावती भवन से शिक्षा विभाग में होने वाले तबादलों के एजेंट बनकर कई लोगों किया।
प्रधान पाठक पदोन्नत शिक्षकों को नहीं किया
 रिलीव*-पदोन्नत हुए सहायक शिक्षक से  प्रधान पाठकों में अन्य ब्लॉक में स्थानांतरित हुए अनेक शिक्षकों को यदु ने आज भी रिलीव नहीं किया है। पूछे जाने पर भी उन्होने हर बार शिक्षकों की कमी का हवाला देकर बचने का प्रयास किया। अन्दर से मिली जानकारी के अनुसार मोटी वसूली से  निकट भविष्य मार्च तक 2023 तक  रिटायरमेंट होने वाले शिक्षकों की जगह चहेते  शिक्षकों को स्थानीय ब्लाक में खपाने का यदु ने प्लान तैयार किया था। 
अपात्र को बना दिया बीआरसी
प्रभारी बीईओ यदु ने अपने  कार्यकाल में एक से कारनामों को अंजाम दिया। पूर्व माध्यमिक शाला  सुरखी के एक स्कूल से एक शिक्षक को बीआरसी और एक शिक्षक को समन्वय बना दिया।  पूरे राज्य में यह अपनी तरह का पहला मामला है जब एक ही स्कूल से दो शिक्षकों में एक बीआरसी और एक संकुल समन्वयक बना। बीआरसी के पद पर नियुक्त व्यक्ति संकुल समन्वयक के योग्यताओं पर भी खरा नहीं उतरा था। शिक्षकों का मानना है कि बीईओ और बीआरसी ने फर्जी प्रशिक्षण कार्यक्रमों को कराकर उपयोगिता भेजते हुए शासन से जारी राशि की बंदरबांट की जा रही थी। यदि कलेक्टर जांच कराएं सो सच भी सामने आ जाएगा। 
कोरोना के नाम पर चंदेबाजी..लाखो  का फंड साफ
 कोरोना काल मे  शिक्षकों से  चंदा लेकर दस लाख  रुपए से ज्यादा का फंड इकट्ठा किया गया। महामारी के नाम पर शासकीय सेवा में रहने के बावजूद अनाधिकृत फंड एकत्रित करने और खर्च का हिसाब किताब नहीं देने के कारण प्रभारी बीईओ सुर्खियों में थे। 
हर काम का ..दाम
बीईओ यदु ने अपने कार्यकाल में छुट्टी, अनुकंपा नियुक्ति, पितृत्व अवकाश, मातृत्व अवकाश, मेडिकल भुगतान, पेंशन पेंशन भुगतान, एरियर्स भुगतान,सर्विस बुक संबंधी कार्य ,छात्रवृत्ति, परीक्षा अनुमति समेत तमाम कार्म काम के लिए अपने घर को भ्रष्टाचार का केन्द्र बनाया। जिससे शिक्षकों को कार्यालय में अपना समय व्यर्थ ना गवाना पड़े।
धड़ल्ले से किया हो रहा काम
                 बहरहाल यदु के मामले में जिले के अधिकारी जांच की बात तो करते है। लेकिन यदु कि राजनीतिक पकड़ से डरे भी है। यही कारण है कि आश्वासन के बाद भी पूर्व बीईओ से जुड़े मामले को लेकर कोई खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। बहरहाल यदु के हटने की जानकारी के बाद ईमानदारी से काम करने वाले शिक्षकों में खुशी है। लेकिन हटाए जाने के बावजूद यदु को रिलीव नहीं किए जाने से लोगों में नाराजगी भी है। शिक्षा विभाग से जुडे एक अधिकारी ने बताया कि साहब अभी भी धड़ल्ले से बैक डेट पर आदेश जारी कर रहे हैं।
            मामले में नव पदस्थ बीईओ रामजी पाल ने बताया कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार हमारी प्राथमिकता है। राज्य शासन के आदेश के अनुसार ही स्कूलों का संचालन होगा। बच्चों का बेहतर भविष्य गढ़ना ही हमारा काम है। पूर्व में आ रही समस्याओं की पहचान कर उचित कदम उठाया जाएगा। विभाग के सभी कर्मचारी टीम वर्क में अपने काम को अंजाम देंगे। 

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