हमार छ्त्तीसगढ़

आंसुओं को छिपाते रहे विधायक..दीवार को निहारते रहे..राज्यपाल उइके ने कहा…संस्कारित बच्चों को देखते ही होता है गर्व

कालेज के दिनों की यादों को ताजा करते रहे। छलकते आंसुओं को छिपाते भी रहे विधायक।

बिलासपुर—-जॉब और पैकेज महत्वपूर्ण लेकिन इससे भी बड़ी चीज संस्कारिक होना है। बीआईटी ने अपने मूल्यों को भी संभालकर रखा है। यह बातें 1997 बैच के सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन कार्यक्रम को संबोधन के दौरान मुख्य अतिथि राज्यपाल अनुसुईया उइके ने कही। राज्यपाल ने कहा कि बीआईटी में नवाचारों को बढ़ावा दिया जाता है। यही कारण है कि बरसों बाद भी संस्थान की साख जस की तस है। कार्यक्रम में नगर विधायक शैलेष पाण्डेय ने भी शिरकत किया। इस दौरान विधायक पाण्डेय बहुत ही भावुक नजर आए। उन्होने बताया कि इसी बैंच पर बैठता था। आज उनके मित्र कहां…पता करने में समय लग गया। शैलेष ने बताया कि आज मानों दिवारे बोलने को तैयार हैं। इस दौरान शैळेष पाण्डेय ने छलकते आंसुओं को छिपाने का भी प्रयास किया।
दुर्ग स्थित बीआईटी  1997 बैच के सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन को बतौर मुख्यअतिथि प्रदेश की राज्यपाल अनुसुईया उइके ने संबोधित किया। राज्यपाल ने कहा आपको मिलने वाला पैकेज महत्वपूर्ण है। लेकिन इससे भी बड़ी चीज है संस्कार। आपने जिन लोगों से शिक्षा प्राप्त किया। जिन्होंने आपके निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें आपने याद रखा है। उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त किया है। यह अपने आप में बहुत बडी बात है।
 राज्यपाल ने कहा कि जब गुरुजनों के पूर्व छात्रों का आदर देखती हूं …तो मुझे बहुत ही गर्व होता है। और अहसास होता है कि बच्चों ने करियर में तरक्की किया है। आपने संस्कारों को संभालकर रखा है। अनुसुईया उइके ने बीआईटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधन के दौरान कहा कि युवावस्था अपने आप को निखारने का स्वर्णिम समय होता है। जहां ऊर्जा को सकारात्मक रूप दिया जाता है। वह संस्थान पुण्यभूमि से कम नहीं होता है। राज्यपाल ने कहा कि गुरुजनों को हमेशा सम्मान दें। मेरी पढ़ाई जहां हुई, वहां अक्सर जाती हूँ। गुरुजनों की सीख की वजह से आज मैं यहां हूँ। मैंने अपने जीवन से यह सीखा है कि जब भी कोई शुभ संकल्प लेते हैं । उसे पूरा करने कड़ी मेहनत करते हैं।  तो संकल्प पूरा होता है।
  उन्होंने कहा कि बीआईटी में नवाचारों को हमेशा प्रोत्साहन दिया जाता है। यही वजह है कि 36 बरसों से यह संस्थान लगातार अपनी छवि को कायम रखने में सफल रहा है। इसके पीछे इसके पूर्व विद्यार्थियों का भी बड़ा हाथ है। जिन्होंने देश-विदेश में सभी क्षेत्रों में ऊंचा नाम कमाया।
संस्थान के मेंबर सेक्रेटरी आईपी मिश्रा ने बताया कि हमारी कोशिश रही है कि पढ़ाई की गुणवत्ता ऊँची दर्जे की रहे। अनुशासन के साथ जब विद्यार्थी यहां से पढ़कर निकले तो पूरी तरह अपनी विधा में पारंगत हो। संस्थान के डायरेक्टर डा. अरुण अरोरा ने कहा कि बीआईटी के विद्यार्थी दुनिया भर में नाम कमा रहे हैं। यहां तक कि अमेरिका में भी इनका एलुमनी एसोसिएशन बना हुआ है। प्राचार्य मोहन गुप्ता ने भी संबोधित किया। वाइस प्रिंसिपल डा. मनीषा शर्मा की इस दौरान विशेष उपस्थित रहीं। 1997 बैच के छात्र के रूप में बिलासपुर विधायक शैलेश पांडेय ने भी कार्यक्रम में शिरकत किया। बिलासपुर विधायक ने अनुभवों को साझा भी किया।
दोस्तों ने 25 साल पहले बना दिया था विधायक
बिलासपुर कांग्रेस विधायक शैलेश पांडेय ने कहा कि 1993 में 12वीं पास करने के बाद बीआईटी में दाखिला लिया । बतौर हाॅस्टलर उन्होंने अपनी पढ़ाई शुरु की। चार साल तक सुख-दुख अपने सहपाठियों से बांटा। कार्यक्रम में शिरकत कर शैलेश पांडेय ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि 1997 में सोवेनियर में दोस्तों ने उन्हें आज का विधायक टाइटल दिया था। कार्यक्रम में होने के बाद आज दोस्तों की बहुत याद आ रही है। इस दौरान विधायक ने दोस्तों के साथ के साथ हुए कुछ प्रसंगों को सबके साथ साझा भी किया। पांडेय ने कहा कि ईश्वर की कृपा माता-पिता के आशीर्वाद और गुरुजनों की शिक्षा से ही आज इस स्थान पर हैं।
राज्यपाल ने की विधायक शैलेष की तारीफ
             सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन के दौरान राज्यपाल अनुसुईया उइके ने विधायक शैलेश पांडेय की जमकर तारीफ की। मंच संचालक ने इस दौारन विधायक पांडेय को मंच पर बुलाया। लेकिन शैलेष ने अपने सहपाठियों के बीच बैठकर सेलिब्रेशन का आनन्द लिया। शैलेश पांडेय ने साथियों के साथ मिलकर पुराने दिनों को जीने का प्रयास किया। जीवन के अनुभव को साझा भी किया।
आसंसुओं को छिपाते रहे विधायक शैलेष
दशकों बाद कालेज की बेंच पर बैठे, शैलेष पूरे समय दीवारों को निहाराते रहे। पुराने मित्रों के साथ कालेज के दिनों की यादों को ताजा भी करते रहे। साथ ही आंखों से छलकते आंसुओं को छिपाते भी रहे। उन्होने बताया कि कालेज से निकलने के बाद कौन कहां गया और अब कहां है, यह जानने में ही काफी वक्त बीत गया।  आज साथियों को पाकर गर्व महसूस कर रहा हूं। 1997 बैच को राज्यपाल ने मंच से सम्मानित किया। नगर विधायक शैलेष पाण्डेय को भी राज्यपाल उइके ने ना केवल सम्मानित किया। बल्कि उन्हें ऊर्जावान और लोकतंत्र का अनुशासित सिपाही बताया। राज्यपाल ऊइके ने कहा..शैलेष पाण्डेय ने अपने आचरण से ना केवल संस्थान बल्कि राजनीति को भी नई ऊचाइयों तक पहुंचाया है।
देश विदेश में बीआईटी की धमक
               विधायक शैलेष पांडेय ने कहा 12 अप्रैल 1986 को 180 बच्चों के साथ भिलाई इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी प्रारंभ हुआ। वर्तमान में यहां लगभग 3000 बच्चे हैं। अमेरिका, भोपाल, पुणे सहित अन्य जगहों में बीआईटी एसोसिएशन कार्य कर रही है। वर्ष 1997 में भिलाई इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दुर्ग से बी.ई की शिक्षा हासिल किया।

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