VIDEO-PCC उपाध्यक्ष ने कहा..नेता प्रतिपक्ष ने दिया बेतुका बयान..देश में लोकतंत्र है..साहस दिखाएं..सांसद निधि वापस मांगे..केन्द्र ने बनाया अंधा कानून..भूपेश सरकार देश के किसानों के साथ

बिलासपुर—- पीसीसी उपाध्यक्ष अटल श्रीवास्तव ने कहा प्रदेश सरकार किसानों के साथ है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना से धरती पुत्रों के घर में घुसहाली आयी है। लेकिन देश के किसान परेशान और बदहाल हैं। दिल्ली सीमा पर अंधा कानून के खिलाफ अस्तित्व बचाने जंग लड़ रहे हैं। अटल ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष बेतुका बयान देने से बाज आएं। उन्हें कुछ बोलने से पहले गिरेवां झांककर देख लेना चाहिए। विधायक निधी पर बात करने से पहले सांसद निधि पर भी सोच लेते।

                             अटल श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश के किसान खुशहाल और मस्त हैं। भूपेश सरकार का संकल्प है कि किसानों के साथ जाने अंजाने किसी भी सूरत में अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। भूपेश सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किसानों को धान खरीदी के समय न्यायोचित फैसला कर क्रांतिकारी कदम उठाया है। प्रदेश के किसान खुश हैं। बेफिक्र होकर अपने किसानी में लगा है। लेकिन देश के किसानों की हालत बहुत ही खराब है।

              अटल ने कहा कि देश का किसान बहुत परेशान है। केन्द्र सरकार ने अंधा कानून के खिलाफ जंग लड़ रहे किसानों की चिंता नहीं की जा रही है। मोदी सरकार ने तीन काले कानून लाकर किसानों की जमीन को कार्पोरेट के हाथों बेचने का षड़यंत्र रचा है। इसके विरोध में कई राज्य के किसान पिछले 6 महीने से जंग लड़ रहे हैं। बावजूद इसके मोदी सरकार अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रही है। कांग्रेस पार्टी किसानों के आंदोलन का समर्थन करती है। 

              एक सवाल केजवाब में अटल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने बेतुका बयान देकर जनता को शर्मसार किया है। उन्हें पता होना चाहिए कि कोरोना में देश के प्रधानमंत्री ने शायद जनहित में पिछले दो साल से सांसद निधि रोक लगा दिया है। हम सब जानते हैं कि इस निधि का प्रयोग क्षेत्र के विकास में होता है। ऐसे में नेता प्रतिपक्ष विधायक निधि पर बयान बेतुकापन नहीं तो और क्या है। विधायक निधि पर रोक लगाए जाने पर बयान जारी करने से पहले उन्हें सांसद निधि पर भी कुछ बोलना चाहिए। देश में लोकतंत्र है..साहस दिखाएं..प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सांसद निधि से प्रतिबंध हटवाएं। इसके बाद ही विधायक निधि पर लिए गए निर्णय के खिलाफ मुंह खोलें। 

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