धान कीमत मे बढ़ोत्तरी,कर्ज माफी और बिजली बिल हाफ करने के बाद भी सरकार ने पिछले तीन महीने मे दी 700 निर्माण कार्यो को मंजूरी


मक्का, टमाटर, चना ,मुख्यमंत्री भूपेश बघेल,कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीय (सीआईआई),संसाधनों, पर्यावरण,लोहा और कोयला,रायपुर।
छत्तीसगढ़ वित्त विभाग ने एक आंकड़ा जारी किया है।जिसमे कहा गया है कि वेतन समेत अन्य भुगतान मे किसी प्रकार की परेशानी नहीं है।सभी निर्माण कार्यों का नियमित भुगतान किय जा रहा है।प्रदेश सरकार ने विपक्ष के आशंकाओं को सिरे से खारिज किया है कि छत्तीसगढ़ की आर्थिक हालात ठीक नहीं है।धान की कीमत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर्ज माफी और बिजली बिल आधा करने जैसे अनेक जनकल्याणकारी कदमों के बावजूद पिछले 3 महीनों में छत्तीसगढ़ शासन ने सार्वजनिक उपयोग के 700 निर्माण कार्यों को शुरू करने की अनुमति दी है। जिनमें सड़क और सिंचाई सुविधा से जुड़े कार्य भी शामिल है। इतना ही नहीं दो दशक बाद राज्य सरकार ने हजारों शिक्षकों की नियमित भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।सीजीवालडॉटकॉम के Whatsapp ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

अधोसंरचना विकास की विलंबित और बड़ी परियोजनाओं को जल्दी पूरा करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार समीक्षा और अन्य कार्य किए जा रहे हैं।इस प्रकार स्पष्ट है की राज्य सरकार कुशल वित्तीय प्रबंधन के जरिए बहुत बड़े पैमाने पर राज्य को आगे बढ़ाने की दिशा में पूरी गंभीरता से काम कर रही है। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत है।शासन ने न तो भर्ती पर किसी तरह की रोक लगाई है और न ही निर्माण कार्यों का भुगतान रोका है। सामाजिक सुरक्षा आर्थिक सहायता और अनुदान, वेतन भत्ते आदि का भी भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा है। इन कार्यों के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध है।

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माह अप्रैल 2018 की तुलना में माह 2019 में लगभग डेढ़ गुना भुगतान शासकीय खजाने से किया गया।जहां तक कर्ज लेने का सवाल है तो सरकारी कामकाज के जानकारों को विदित है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है।जो संसाधन जुटाने और इसका प्रभावी उपयोग करने के लिए शासन के भीतर उपायों का हिस्सा है।संविधान के अनुच्छेद 293 (3) में स्वयं भारत सरकार द्वारा राज्यों को विकास कार्यों के लिए ऋण लेने की वार्षिक सीमा हर साल जारी की जाती है।छत्तीसगढ़ द्वारा निर्धारित सीमा का पालन किया जा रहा है।

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2018-19 के लिए भारत सरकार द्वारा राज्य को 12979 करोड़ रुपए का ऋण लेने की अनुमति दी गई थी.इसके विरुद्ध 12900 करोड रुपए का ऋण वित्त वर्ष के दौरान लिया गया। वर्ष 2019 के दौरान बजट में ₹10926 करोड़ रुपये रिन लेने का प्रावधान किया गया है।वही अप्रैल माह में 2019 में ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी है। माह अप्रैल 2019 में पिछले साल अप्रैल की तुलना में जीएसटी और फ्लैट से प्राप्त राजस्व में 21% वृद्धि हुई है।अनुमान है कि मई 2019 में भी ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।भर्ती प्रक्रिया को लेकर जारी किए गए परिपत्र को कतिपय तत्वों द्वारा भ्रामक रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है।

वास्तव में वित्तीय और प्रशासनिक अनुशासन के लिए यह एक सामान्य प्रक्रिया है।ताकि अनावश्यक और अनियमित भर्तियों की रोकथाम की जा सके। साथ ही आवश्यक पदों पर भर्ती में कोई व्यवधान ना हो। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्षों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जाने वाली भर्तियों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर जन आक्रोश नजर आया करता था।राज्य में सभी निर्माण कार्यों का भुगतान लगातार और नियमानुसार किया जा रहा है।पहले शासन निर्णय लिया था कि दिसंबर 2018 की स्थिति में जो निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं।

उनकी लागत और उपयोगिता के आधार पर समीक्षा के बाद अनुमति दी जाएगी।शासन द्वारा 700 निर्माण कार्यों की मंजूरी दी जा चुकी है। आचार संहिता समाप्त होने के बाद बाकी निर्माण कार्यों की जल्द स्वीकृति दी जाएगी।शासन द्वारा 15000 शिक्षक,800 नर्स,1500 सहायक अध्यापकों की भर्ती की प्रक्रिया जारी है।पूर्व के वर्षों में दी गई भर्तियों की अनुमति यों को रोकने का निर्देश नहीं है।

रिजर्व बैंक इंडिया की रिपोर्ट 2018 के अनुसार राज्य का कुल ऋण दायित्व जीडीपी का 17.4% है जो बाकी राज्यों के औसत 24.3% से कम है।इसी प्रकार राज्य सरकार द्वारा लिए गए ऋण पर ब्याज भुगतान का दायित्व राजस्व प्राप्तियों का 4.6% है।जो कि बाकी राज्यों के औसत 11.6% से काफी कम है।

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