पर्यावरण विभाग पर एक्टिविस्ट का गंभीर आरोप.. कहा..अधिकारी और कम्पनी पर दर्ज करें धोखाधड़ी का अपराध..उद्योग प्रबंधन को पहुंचा रहे फायदा

 बिलासपुर—एरन इस्पात संयत्र लोक जनसुनवाई के खिलाफ प्रसिद्ध समाजसेवी और एक्टिविस्ट राधेश्याम शर्मा ने भी मोर्चा खोल दिया है। राधेश्याम शर्मा ने कलेक्टर बिलासपुर को ई पत्र भेजकर लोक जनसुनवाई को नियम बिरूद्ध बताया है। साथ ही जनसुनवाई को निरस्त किए जाने की मांग को दुहराया है। राधेश्याम शर्मा ने कलेक्टर को भेजे गए ई. पत्र में स्पष्ट किया है कि पर्यावरण अधिकारी उद्योग प्रबंधन को अवांछित लाभ पहुंचाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय के निर्देशों के खिलाफ जाकर काम किया है। इसलिए जनसुनवाई को रोका जाना जरूरी है।
                  सिलपहरी औद्योगित क्षेत्र स्थित हर्दी में एरन इस्पात संयत्र लोक जनसुनवाई के खिलाफ प्रसिद्ध समाजसेवी और एक्टिविस्ट राधेश्याम शर्मा की इन्ट्री हो गयी है। राधेश्याम शर्मा ने कलेक्टर को पत्र लिखकर जनसुनवाई के खिलाफ एक्शन की मांग को दुहराया है।
                            अपने पत्र में राधेश्याम शर्मा ने लिखा है कि 18 अगस्त को मेसर्स एरन स्टील एन्ड पावर लिमिटेड विस्तार की पर्यावरणीय जनसुनवाई सिलपहरी औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित है। जनसुनवाई वन एवम पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना 4/9/2006 के प्रावधानों का खुला उलंघन है।  पीठासीन अधिकारी और क्षेत्रिय पर्यावरण अधिकारी ने उद्योग प्रबंधन को अवाँछित लाभ पहुंचाने के उद्देश्यों की पूर्ति का बीड़ा उठाया है। 
                  राधेश्याम शर्मा के अनुसार जनसुनवाई के लिए तैयार पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्रतिवेदन की प्रति जनता को अवलोकन के लिए जनपद पंचायत बिल्हा, नगर पंचायत बिल्हा और प्रभावित क्षेत्र के 3 दर्जन से अधिक प्रभावित गांवों को उपलब्ध नहीं कराया गया है। पंचायतों को भी जानकारी नहीं है। 
                      यह जानते हुए भी कि प्रस्तावित क्षेत्र के 10 किलोमीटर वायु सीमा में बिलासपुर नगर निगम शामिल है। नगर निगम में भी पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्रतिवेदन की कॉपी चुने हुए  जनप्रतिनिधियों और नगरवासियों को दिया जाना चाहिए। लेकिन जनता तो दूर जनप्रतिनिधियों को भी मामले से अवगत नहीं कराया गया है।
             एरन स्टील एंड पावर लिमिटेड के प्रस्तावित परियोजना के लिए तैयार किया गया पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्रतिवेदन तैयार करने वाली कंसलटेंट कंपनी ने घर बैठे रिपोर्ट तैयार किया है। किन ग्राम पंचायतों से जल वायु मिट्टी और ध्वनि का नमूना लिया गया है।  संबंधित ग्राम पंचायत के लोगों का पंचनामा संलग्न नहीं है। इससे प्रमाणित होता है कि परीक्षण में नमूनों की जांच का रिपोर्ट पूर्णतया मन गढंनत और फर्जी हैं।
               राधेश्याम शर्मा ने कलेक्टर को लिखे पत्र में बताया है कि प्रभावित ग्रामों में कितने रकबों में किस प्रकार के फसल लिए जाते हैं। क्षेत्र में बालक नौजवान वृद्ध महिला और पुरुषों की जनसंख्या के अलावा पालतू पशुओं वृक्षों की प्रजाति और संख्या भी पर्यावरण  प्रभाव मूल्यांकन प्रतिवेदन में नहीं दर्शाया गया है।
                         अध्ययन क्षेत्र के 10 किलोमीटर वायु सीमा में पूर्व में कितने किस श्रेणी के उद्योग संचालित है। इसका भी जिक्र पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्रतिवेदन में दर्ज नहीं है। पहले  के अनुबंध अनुसार कम्पनी को हरित पट्टिका के तहत पौधा लगाना था। प्रतिवेदन के अनुसार 4600 पौधे पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन में बताया गया है। जबकि मौके पर मुश्किल से 1000 से अधिक पौधे नहीं है।
              राधेश्यम ने  लोक जनसुनवाई को नियम विरूद्ध बताया। उन्होने लिखा है कि क्षे्त्र के 48 गांव में प्रशासन को मुनादी नही कराया गया है। मुनादी के माध्यम से प्रशासन को अशिक्षित अनपढ़ लोगों को प्रस्तावित परियोजना के लाभ और हानि के  बारे में जानकारी दिया जाना जरूरी है। यह जानते हुए भी सारी प्रक्रियाओं की वीडियोग्राफी भी होती है। लेकिन ऐसा कुछ एक भी गांव में नहीं किया गया। मकसद साफ है कि  ग्रामीणों से वास्तविक स्थिति को छिपाना है।
                     संविधान और कानून का पालन किया जाना बहुत जरूरी है। 18 अगस्त को प्रस्तावित एरन स्टील एंड पावर लिमिटेड विस्तार की जनसुनवाई को तत्काल निरस्त किया जाए। प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले कंपनी प्रबंधन के जिम्मेदार, कंसलटेंट के खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी और पीठासीन अधिकारी के खिलाफ जानकारी को छिपाने फर्जी दस्तावेजों का निर्माण और उपयोग करने के साथ शासन प्रशासन से धोखाधड़ी किए जाने का अपराधिक दर्ज किया जाए।

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