मेरा बिलासपुर

रसूखदार जमीन माफिया छोटा भोंदूदास का बड़ा खेल.. प्लाटिंग कर बेचा सरकारी जमीन..आरोपी नवल को बचाने .राजस्व और पुलिस अधिकारियों ने किया कोर्ट को गुमराह

बिलासपुर– कुछ महीनों बाद मोपका चिल्हाटी की तरह लिंगियाडीह में सरकारी जमीन बेचने का एक पुराना मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने जमीन माफिया के खिलाफ अपराध तो दर्ज किया। लेकिन आज तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि आरोपी जमीन माफिया नवल शर्मा को राजस्व विभाग के ही कुछ अधिकारी पिछले 6 साल से लगातार सक्रिय हैं। यही कारण है कि तत्कालीन पुलिस कप्तान के प्रयास के बाद भी राजस्व अधिकारियों ने आज तक पुलिस प्रशासन को मांगी गयी जानकारी को साझा ही नहीं किया  बहरहाल एक बार फिर सरकारी जमीन बेचने और पुलिस कार्रवाई नहीं किये जाने का मामला गर्म हो गया है। सिविल लाइन थानेदार के अनुसार आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

                   बताते चलें कि कुछ महीने पहले चिल्हाटी और मोपका में सरकारी जमीन बिक्री खरीदी मामलें में पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। यहां तक की एक सरकारी कर्मचारी को भी सलाखों के पीछे भेजा गया। लेकिन साल 2016 में सरकारी जमीन की प्लाटिंग कर बेचने के आरोपी पर पुलिस कार्रवाई करने से बचती नजर आ रही है। मामले को लेकर इन दिनों शहर में जमकर चर्चा है।    

                           बताते चलें कि 8 सितम्बर 2016 में न्यायालय के आदेश पर लिंगियाडीह स्थित सरकारी जमीन बेचने के आरोप में रसूखदार जमीन चोर नवल शर्मा के खिलाफ आईपीसी की धारा 420,467,468,471 और  120 बी के तहत सिविल लाइन पुलिस ने अपराध दर्ज किया। 6 साल बाद भी जमीन चोर के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होना संदेह को पैदा करता है। पुलिस भी रसूखदार भूमाफिया के खिलाफ जांच करने से कहीं ना कहीं बचती नजर आ रही है।

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 क्या है मामला

                       जानकारी देते चलें कि लिंगियाडीह में नवल शर्मा की खसरा नम्बर 15/ 63 एक एकड़ 90 डिसमिल पैतृक जमीन है। साल 1992 से 2007 के बीच नवल शर्मा ने प्लाटिंग कर दो एकड़ 61 डिसमिल जमीन ग्राहकों को बेच दिया। दरअसल नवल शर्मा ने पैतृक जमीन से लगी कोटवारी जमीन को भी प्लाटिंग कर बेच दिया। यानि अपनी पैतृक जमीन से 71 डिसमिल से अधिक जमीन का नवल शर्मा ने बिक्री किया। मामले में सोशल एक्टिविस्ट ने थाने में कई पर शिकायत किया। बावजूद इसके पुलिस ने एफआईआर दर्ज करना तो दूर शिकायत सुनने से इंकार कर दिया। 

न्यायालय के आदेश पर एफआईआर दर्ज

               पुलिस से सहयोग नहीं मिलने पर सोशल एक्टिविस्ट ने  कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने दस्तावेज देखने और फरियादी को सुनने के बाद पुलिस को भूमाफिया नवल शर्मा के खिलाफ अपराध दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन पुलिस ने 420, 467, 468,471 व 120 बी के तहत जमीन चोर नवल शर्मा के खिलाफ अपराध दर्ज किया। यह मानकर कि अपराध दर्ज होना और कार्रवाई में अन्तर होता है। 

खुलेआम घूम रहा आरोपी जमीन माफिया

                      कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन थाना में अपराध दर्ज होने के बाद रसूखदार भूमाफिया ने अधिकारियों से मिली भगत कर 18 दिसम्बर 2017 को किसी तरह पाइल बंद करवा लिया। मामलें की शिकायत तत्कालीन आईजी तक पहुंची। आईजी के आदेश पर 9 अगस्त 18 को केश को दुबारा खोला गया। आरोपी के खिलाफ 420, 467, 468,471 व 120 बी के तहत गंभीर धाराओं में दुबारा मुकदमा दर्ज हुआ। बावजूद इसके आज तक भूमाफिया नवल शर्मा के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। 

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लाखों की धोखाधड़ी..आजाद घूम रहा माफिया

               बताते चलें कि कुछ महीने पहले मोपका चिल्हाटी में सरकारी जमीन बेचने खरीदने और कूट दस्तावेज तैयार करने के आरोप में आधा दर्जन लोगों को जेल दाखिल कराया गया। लेकिन 6 साल पहले कोर्ट के आदेश पर दर्ज मामले में कोटवारी जमीन बेचने के आरोपी के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होना समझ से परे है। लोगों में चर्चा है कि जब पुलिस का न्याय दलित भोंदूदास के लिए हो सकता है.. तो .रसूखदार माफिया के खिलाफ क्यों नहीं हो सकता। बताया जा रहा है कि नवल शर्मा ने पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए हमेशा दोनों हाथों को खुला रखा। यही कारण है कि मामले को लेकर ना तो पुलिस गंभीर है और राजस्व प्रशासन ।

थानेदार और पुलिस कप्तान ने लिखा पत्र

                       कोर्ट के दबाव में सिविल लाइन थानेदार से लेकर तत्कालीन पुलिस कप्तान प्रशांत अग्रवाल ने राजस्व अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा। हर बार पत्र में सत्यापित दस्तावेज के साथ चार बिन्दुओं की जानकारी देने को कहा गया। बावजूद इसके ना तो तात्कालीन कलेक्टर ने ही पुलिस प्रशासन के पत्र का जवाब दिया। और ना ही एसडीएम और तहसीलदार ने ही दस्तावेज पेश किया। यद्यपि मामले मे तत्कालीन पुलिस कप्तान प्रशांत अग्रवाल ने अपने लेटरहेड में कलेक्टर को पत्र  लिखकर लिंगियाडीह स्थित खसरा नम्बर 15 /63 की  जानकारी उपलब्ध कराने को कहा। लेकिन राजस्व के अधिकारियों ने ना तो पुलिस कप्तान को पत्र का जवाब दिया। और ना ही जानकारियों को साझा ही किया।

अपनो पर रहम गैरों पर करम

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                    राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि नवल शर्मा के खिलाफ विभाग किसी भी प्रकार की कार्रवाई से बचना चाहता है। विभाग को अच्छी तरह से मालूम है कि पुलिस कार्रवाई में कई ईमानदार चेहरे बेनकाब हो जाएंगे। इसलिए विभाग के अधिकारी जानकारी देना नही चाहते हैं। यद्यपि कोर्ट के आदेश पर अपराध तो दर्ज हो चुका है। लेकिन आरोपी पर कार्रवाई मुश्किल है। पुलिस भी इस बात को समझती है। बेशक भोंदूदास और छोटा भोंदूदास नवल शर्मा के प्रकरण में बहुत समानता है। लेकिन दोनों की हैसियत मे बहुत अन्तर है। इस अन्तर को पुलिस अच्छी तरह से समझती है। इस बात को राजस्व के अधिकारी भी समझते हैं।

 जल्द ही होगी आरोपी की गिरफ्तारी

         मामला कुछ साल पुराना है। जानकारी के बाद मामले को संज्ञान में लिया गया है। कई बार राजस्व विभाग को पत्र लिखा गया। लेकिन समय पर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया। हमें जानकारी है कि कोर्ट के आदेश पर नवल शर्मा के खिलाफ अपराध दर्ज हुआ है। जल्दी ही दस्तावेज हासिल कर विवेचना के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया जाएगा। दोषी को हरगिज नहीं छोड़ा जाएगा।

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