क्या छत्तीसगढ़ में खुलेंगे बेरोजगारों के लिए रोज़गार के रास्ते…26 साल बाद शुरू हुई सरकारी भर्ती के मायने

कॉलेज के सब लड़के चुप हैं….. कागज की एक नाव लिए…चारों तरफ दरिया की सूरत…. फैली हुई बेकारी है। मशहूर शायर मरहूम राहत इंदौरी की ये लाइनें बरसों पहले लिखीं गईं हैं। लेकिन आज के दौर के नौजवानों के हालात पर भी यह फिट बैठती है। जहां डिग्रीधारी, पढ़े – लिखे नौजवान नौकरी के लिए भटकते नजर आ रहे हैं। पढ़े-लिखे बेरोजगारों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। नौकरी में भर्ती को लेकर ना किसी तरह की सुगबुगाहट दिखाई देती है और ना किसी तरह की तैयारी नजर आ रही है।ऐसे दौर में जब रोजगार दो…. हेस्टैक सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा हो। करीब-करीब हर घर में किसी न किसी  बेरोजगार की मौजूदगी दर्ज हो रही हो। और बेकारी के अंधेरे से बाहर निकलने का कोई रास्ता दिखाई न दे रहा हो । ऐसे समय में अगर खबर आती है कि छत्तीसगढ़  के स्कूल शिक्षा विभाग में 26 साल बाद शिक्षक पदों पर सीधी भर्ती की शुरुआत हो गई है। स्कूलों में नए लेक्चरर के अपॉइंटमेंट का आर्डर जारी हो गया है ।  और छत्तीसगढ़ पीएससी की ओर से हायर एजुकेशन में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए भी इंटरव्यू की तैयारी शुरू हो गई है। तो यह खबर रोजगार की तलाश में भटक रहे लोगों को नौजवानों को और उनके पेरेंट्स को भी सुकून दे सकती है।

देश के बाकी हिस्सों की तरह छत्तीसगढ़ में भी शिक्षित बेरोजगारों को पिछले कई बरसों से  दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक तो  सरकारी पदों पर भर्ती को लेकर प्रक्रिया ही शुरू नहीं की गई। कहीं पर प्रक्रिया शुरू भी हुई तो विवादों में फंस गई। नतीजा यह निकला कि कंपीटीटिव्ह  एग्जाम्स में अपनी किस्मत आजमाने वाले पढ़े – लिखे नौजवानों की उम्मीदें टूटती गई। छत्तीसगढ़ की मौजूदा भूपेश बघेल सरकार जिन वादों को सामने रखकर सत्ता में आई थी , उसमें बेरोजगारों का भी मुद्दा शामिल था । लिहाजा सरकार बनने के बाद से ही लोग सीएम भूपेश बघेल को नौकरियों में भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने के लिए उनके चुनावी वादों की याद दिलाते रहे हैं। सरकार में बैठे लोगों के सोशल मीडिया एकाउंट  पर कमेंट बॉक्स में ऐसे कमेंट अक्सर देखे जाते रहे हैं।  इस मामले में सरकार ने अब तक क्या तैयारी की है …..? सरकारी महकमों में किस स्तर के कितने पद खाली हैं…….?  इन खाली पदों पर भर्ती शुरू करने में दिक्कतें क्या है…..?  इन सवालों पर अक्सर बातें होती रही हैं।

लेकिन जिस तरह से स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक पदों पर सीधी भर्ती की शुरुआत हुई है, उसे देखकर उम्मीद की जा सकती है कि भूपेश सरकार आने वाले समय में इस रास्ते पर कदम बढ़ा सकती है और बरसों से  इस रास्ते की तलाश में उम्मीद बांधे छत्तीसगढ़ के बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के रास्ते पर हमसफर बना सकती है। छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग में 1994 के बाद से सीधी भर्ती बंद थी। शासन से अनुमति मिलने के बाद 3 दिन के भीतर शिक्षा विभाग ने गणित विषय के 500 से अधिक व्याख्याताओं की नियुक्ति का आदेश जारी किया। साथ ही सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि 1 हफ्ते के भीतर सभी विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश जारी हो जाएगा। चयनित व्याख्याता 3 साल के प्रोबेशन पीरियड पर रहेंगे। इसी तरह छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की ओर से उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्राध्यापक अर्थशास्त्र के 61 विज्ञापित पदों के लिए आयोग द्वारा चिन्हांकित उम्मीदवारों का साक्षात्कार 23 मार्च से 26 मार्च के बीच आयोजित किया जा रहा है। इन पदों के इंटरव्यू के लिए योग्य पाए गए उम्मीदवारों के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन इंटरव्यू की तारीख के 1 दिन पहले किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ पीएससी की ओर से उच्च शिक्षा विभाग के लिए अर्थशास्त्र के 61 पदों के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन  पिछले साल 5 और 6 नवंबर को किया गया था । परीक्षा के नतीजे इस साल 21 जनवरी को जाए जारी किए गए । लिखित परीक्षा में मिले अंकों के नंबर के आधार पर 170 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए चिन्हांकित किया गया है। सरकार की ओर से की गई यह पहल उम्मीद तो  जगाती है कि सरकारी पदों में भर्ती को लेकर बरसों  से बना हुआ अवरोध अब हट सकता है। जिससे रोजगार दो के हैज़टैक के बीच छत्तीसगढ़ के पढ़े-लिखे डिग्रीधारी नौजवानों  के लिए नौकरी का रास्ता खुल सकता है। लेकिन इस रास्ते पर बेरोजगारों को हमसफर बनाए रखने के लिए सरकार को पूरी पारदर्शिता बरतते हुए इच्छाशक्ति और शिद्दत के साथ इस सिलसिले को लगातार जारी रखना पड़ेगा। यही वक्त की मांग भी  है और ……छत्तीसगढ़ में आज की नौजवान पीढ़ी का यही सबसे बड़ा सहारा भी नज़र आता है।

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