मेरी नज़र में...

वंदेभारत पर एक्सपर्ट उठा रहे सवाल-क्या केवल “रैक” मिली….“स्पीड” नहीं…? किराया शताब्दी से अधिक और रफ़्तार कम.. !

छत्तीसगढ़/बिलासपुर इलाक़े में बसने वाले लोगों के लिए इतवार – सोमवार को रेल्वे के हवाले से अच्छी ख़ब़र आई कि बिलासपुर – नागपुर के बीच वंदेभारत एक्सप्रेस रेलगाड़ी शुरू हो गई है। फलां तारीख़ से…. फलां तारीख़ के बीच फलां – फलां रेलगाड़ी रद्द रहेगी…. इस तरह के ज़ुमले के साथ छपने वाली ख़बरों को देख-देखकर पक गए लोगों को यह ख़बर राहत देती है कि रेल्वे ने कोई तेज रफ़्तार गाड़ी चालू की है। हालांकि पहले रद्द की गई गाड़ियों के बारे में अच्छी ख़ब़र कब आएगी, यह कोई नहीं बता पाएगा । लेकिन अरसे के बाद शुरू हुई नई ट्रेन की सभी ने अच्छे से आगवानी की ।

बिलासपुर रेल्वे ज़ोन के लिए वाक़ई यह बड़ी उपलब्धि है औऱ इसका स्वागत होना ही चाहिए । हालांकि जो लोग अक़्सर रेल से सफ़र करते हैं, वे बेसब़्री से इंतज़ार कर रहे हैं कि रेलगाड़ियों की आवाजाही कब नार्मल होगी । मगर जो लोग सफ़र ही नहीं करते … या कम सफ़र करते हैं, वे भी यह सोचकर ख़ुश हैं कि अपने ज़ोन को नई गाड़ी की सौगात मिल गई है। उध़र ऐसे समय में रेल्वे के जानकार सुपर फ़ास्ट ट्रेन का एक तोहफ़ा हाथ में रखकर यह भी सोच रहे हैं कि आख़िर हमें मिला क्या है…. ? तो उन्हे यह साफ़ नज़र आता है कि माल लदान और ढुलाई में रिकॉर्ड पर रिक़र्ड बनाने वाले इस कमाऊपूत ज़ोन को फ़िर से स्पीड वंदेभारत की जगह पर रैक वंदेभारत थमा दिया गया है।मुसाफ़िरों को सिर्फ वंदेभारत की रैक में बैठने का रुतब़ा तो मिलेगा ।लेकिन वैसी स्पीड नहीं मिलेगी। किराया भी शताब्दी एक्सप्रेस से अधिक है औऱ स्पीड उतनी भी नहीं है।

पिछले दो दिन से मीडिया में छाए रहे वंदेभारत ट्रेन के बारे में लोगों को सबकुछ मालूम हो गया है। बिलासपुर – नागपुर के बीच चलने वाली यह ट्रेन कितनी दूरी – कितने समय में तय करेगी और इसका किराया कितना होगा। सबकुछ लोगों के सामने है। लेकिन गंतव्य से इसकी दूरी और किराए को भारतीय रेल्वे की दूरी गाड़ियों से तुलना करने पर एक अलग ही तस्वीर सामने आती है। मसलन इसका किराया तो शताब्दी एक्सप्रेस से करीब पचीस से तीस फ़ीसदी अधिक है। लेकिन शताब्दी के मुक़ाबले इसकी रफ़्तार धीमी है।

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बिलासपुर रेल्वे जोन छात्र युवा जोन संघर्ष समिति से जुड़े सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव बताते हैं कि दिल्ली से झ़ाँसी के बीच शताब्दी एक्सप्रेस करीब़ 410 किलोमीटर की दूरी पौने पांच घंटे में तय करती है। इसी तरह दिल्ली से कानपुर के बीच शताब्दी एक्सप्रेस 437 किलोमीटर की दूरी पांच घंटे में तय कर लेती है।हावड़ा से मुंबई और हावड़ा से पुणे के बीच चलने वाली दुरंतो एक्सप्रेस भी बिलासपुर से गुज़रती है। ये गाड़ियां बिलासपुर से नागपुर के बीच़ करीब़ 5 घंटा 40 मिनट का समय लेती हैं। लेकिन बिलासपुर – नागपुर के बीच चलाई गई वंदेभारत एक्सप्रेस 411 किलोमीटर का सफ़र साढ़े पांच घंटे में पूरा कर रही है।

इस गाड़ी का किराया तो शताब्दी से अधिक है । लेकिन स्पीड उससे भी कम है। हाई स्पीड ज़ोन का केवल नाम है। वंदेभारत के नाम पर केवल रैक है। मगर वंदेभारत की स्पीड नहीं है। इज़ीनियरों के मुताब़िक काली मिट्टी वाले इस इलाके में रेल्वे ट्रैक पर 160 किलोमीटर की स्पीड देना मुश्किल है। फ़िलहाल 130 किलोमीटर की स्पीड तय की गई है। वह भी पूरे सेक्शन में नहीं है। सेक्शन के कुछ हिस्से में ही 130 किलोमीटर की स्पीड है। बाकी हिस्से में 110 किलोमीटर की स्पीड से ही गाड़ियां चल सकती हैं।

फ़िलहाल तेज़ रफ्तार चलने वाली ट्रेनों में बिलासपुर – नागपुर के बीच गीतांज़ली एक्सप्रेस 6 घंटा 25 मिनट और ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस 6 घंटा 30 मिनट का समय लेती है।सुदीप श्रीवास्तव आगे कहते हैं कि केवल पब्लिक को दिखाने के लिए इसे चालू किया गया है। इसकी बज़ाय रेल्वे को चाहिए कि वह पिछले महीनों में रद्द की गई ट्रेनों को जल्द से जल्द फ़िर से चालू करे।

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रेल्वे के जानकार और कई बार रेल्वे उपभोक्ता सलाहकार समिति के सदस्य रह चुक़े बजरंग लोहिया कहते हैं कि यह तो पहले ही हो जाना था । काफ़ी दिनों बाद बिलासपुर ज़ोन का ख़्याल किया गया है। पहले काफ़ी मांग की जाती रही। लेकिन इस ओर ध़्यान नहीं दिया गया और सबसे अधिक कमाई देने वाला जोन उपेक्षित रहा। वंदेभारत के रूप में कम से कम एक ट्रेन तो मिली है। लेकिन यदि 160 किलोमीटर की रफ़्तार से चलती तो नागपुर से बिलासपुर की दूरी केवल तीन घंटे में पूरी हो सकती थी। माल ढुलाई के साथ यात्री सुविधाओं का भी ख़्याल रखा जाना चाहिए। जहां तक किराए का सवाल है- बेहतर सुविधाओं के लिए किराया तो देना पड़ेगा। रेल्वे में कई दर्ज़े हैं और अपनी क्षमता के हिसाब़ से लोग किराया देकर सफ़र करते हैं ।

वंदेभारत में कई आधुनिक सुविधाएं हैं। इसका रखरखाव भी इसके अनुरूप होना चाहिए और आगे भी इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि कम से कम अभी जो इस गाड़ी की रफ़्तार तय की गई है, वह आगे भी बरकरार रहे। इसमें कोई शक नहीं है कि छत्तीसगढ़ और बिलासपुर इलाक़े को नागपुर के लिए तेज़ रफ़्तार ट्रेन मिली है। नागपुर के साथ इस इलाक़े का रिश्ता काफ़ी पुराना है और आज़ भी यह रिश्ता बना हुआ है। कारोब़ार- शिक्षा – ईलाज़ आदि के लिए लोग नागपुर आते – जाते रहे हैं। अभी भी यह सिलसिला बना हुआ है। इस लिहाज़ से नई रेलगाड़ी से लोगों को सहूलियत मिलेगी । लेकिन इस गाड़ी की शुरूआत के साथ ही कई सवाल भी उठ रहे हैं । सियासत की दुनिया से जुड़े लोगों की होड़ से अलग हटकर बिलासपुर – नागपुर के बीच दूरी , नई ट्रेन की रफ़्तार और किराए पर गौऱ कर अगर कोई ऐसा इंतज़ाम हो सके , जिससे लोगों को लगे कि बिलासपुर रेल्वे ज़ोन लदान – ढुलाई के साथ यात्री सुविधाओं में भी कीर्तिमान बना रहा है तो इन सवालों का जवाब़ भ़ी सहज ही सामने आ जाएगा।

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