कोरोना के तीसरी लहर के बीच स्कूल का नया सत्र शुरू, सहायक शिक्षक फेडरेशन ने कहा- शिक्षकों को जबरिया स्कूल बुलाकर बारूद इकट्ठा करने की तैयारी कर रहे विभाग के अफसर

रायपुर । कोरोना के तीसरी लहर की आहट के बीच 16 जून से छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग का सत्र 2021-22 का आगाज हो चुका है। यह सत्र कोविड 19 के प्रोटोकॉल को देखते हुए छात्रों के बिना शुरू हुआ है। प्रदेश स्तर पर शिक्षकों की अनदेखी से शिक्षक कर्मचारी पहले ही दिन नाराज दिखाई दिए है । cgwall से हुई एक चर्चा से के दौरान जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष मनीष मिश्र ने बताया कि कोरोना ने प्रदेश के सैकड़ो शिक्षको की जान ली है। शिक्षा विभाग के आला अधिकारी इस विषय को गम्भीरता से नही लिये है न ही कोई सीख ली है। शिक्षको को कोविड 19 से बचाने के लिए कोई ठोस कार्य योजना नही बनाई है। पुराने ढर्रे पर ही काम किया जा रहा है। 

शिक्षक नेता मनीष मिश्रा का कहना है कि शिक्षको के लिये स्कूल शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के आधे अधूरे पुराने दिशा निर्देशों  को आधार मानते हुए गैर जिम्मेदारी का परिचय देते हुए यह सत्र वन वे ट्रैफिक जैसे शुरू हुआ है। शिक्षक सरकार की इस आधी अधूरी नीति से खुश नहीं है। विभाग कही भी अपने कर्मचारियों के लिये पालक की भूमिका में कही नही खड़ा है। अफसरशाही शासक बन कर छोटे कर्मचारियों पर शासन कर रही है।

शिक्षक नेता का कहना है कि इस कोरोना काल मे  कोविड 19 की वजह से हमने अपने कई शिक्षक साथियों को खोया है। जिसकी बड़ी वजह जिला ब्लाक और संस्था प्रमुखों की हठ धर्मिता रही है। विषम से विषम परिस्थितियों में भी शिक्षको की सेवाएं ली गई है। अब आवश्यकता न होते हुए भी प्रदेश के शिक्षक संवर्ग को दस से चार बैठने को मजबूर किया जा रहा है। दो व्यक्तियों के काम को दस से ले रहे है। 
शिक्षक नेता मनीष मिश्रा कहते है कि  कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना की तीसरी लहर से बचने की तैयारी शुरू कर दी गई है । उल्टे यहां पर शिक्षकों को जबरिया स्कूल बुलाकर बारूद इकट्ठा करने का काम किया जा रहा है । ग्रामीण छत्तीसगढ़ स्कूली छात्रों के ऐसे बहुत से कार्य हैं । जो बिन छात्रों के स्कूल में आए बगैर हो ही नहीं सकते है।  साइकल वितरण, पाठ्यपुस्तक वितरण, गणवेश वितरण, मध्यान्ह भोजन  छात्रों के स्कूल में आये बिना संभव नही है फिर भी शिक्षक घर -घर जाकर इस कार्य को कर रहे है। फिर स्कूल में उपस्थित रहने का क्या औचित्य है ..? नेटवर्क के आभाव में स्कूलों से आन लाइन पढ़ाई सम्भव नही है। यह वर्क फ्रॉम होम किय़ा ज़ा सकता है। जिसके लिए शासन से नए सत्र के अनुसार विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए जाने चाहिए।  फिलहाल कोविड 19 के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए जिला शिक्षा अधिकारियों के आदेश अमल में लाना टेढ़ी खीर जैसा है। 
सहायक शिक्षक फेडरेशन के शिक्षक नेता  मनीष मिश्रा ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने गर्भवती महिला शिक्षकों, स्तनपान कराने वाली महिला शिक्षकों,  कोविड-19 के टीके से वंचित शिक्षको के लिए विशेष नीति बनाए जाने की जरूरत है। ताकि हमारे शिक्षक साथी और उनका परिवार महफूज रह सके । शिक्षा विभाग पूरी जवाबदेही से शिक्षा सत्र के लिए विस्तृत  स्प्ष्ट गाइड लाइन जारी करे । ताकि जिला ब्लॉक और संस्था प्रमुख शिक्षको के मालिक न बन पाए।


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