मेरा बिलासपुर

प्राचार्य को भारी पड़ा अपना ही आदेश..104 बच्चों का निलंबन वापस..पालकों ने कहा..चंदाखोरी को दबाने आनन फानन में फैसला

पालकों ने कहा..कम योग्य को बनाया प्राचार्य..बड़े अधिकारी डाल रहे पर्दा

भाटापारा— अनुशासनहीनता मामले में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल भाटापारा के 104 बच्चों के निलंबन आदेश को प्राचार्य ने दूसरे दिन वापस ले लिया है। आदेश वापस लिए जाने के बाद मामला एक बार फिर गरमाने लगा है। पालकों की माने तो..पहले तो निलंबन का आदेश ही गलत था। फिर आधे बच्चों के अभिभावकों से मिलकर सभी बच्चों को बहाल किया जाना भी गलत है। मामले में अन्दर से आ रही जानकारी को सही माने तो बच्चों को निलंबित किए जाने की मुख्य वजह अनुशासनहीनता से कही ज्यादा  चंदा विवाद है। यही कारण है कि सच्चाई सामने आने से पहले ही प्राचार्य ने आनन-फानन में बीच का रास्ता निकाला।  और सभी बच्चों के पालकों से मिलने से पहले ही निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया।
बताते चलें कि आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम भाटापारा प्राचार्य के.देवांगन ने एक दिन पहले 104 बच्चों को जारी निलंबित आदेश को दूसरे दिन वापस ले लिया है। जानकारी के अनुसार करीब 55 पालको को प्राचार्य ने स्कूल बुलाया। बच्चों की शिकायत करने और पालकों की सहमति के बाद नया आदेश जारी कर निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही सवाल उठने लगा है कि जब 55 अभिभावकों से ही अनुशासनहीनता नही दोहराने की सहमति ली गयी है तो 104 बच्चो को बहाल क्यों किया गया । क्या प्राचार्य का टारगेट सिर्फ 55 पालक उनके बच्चे ही थे।
 मामले में एक अभिभावक ने बताया कि दरअसल बच्चों से ज्यादा प्राचार्य को अनुशासन का पाठ पढ़ना चाहिए। पहली बात तो कमतर योग्यता का व्यक्ति प्राचार्य बन गया है। फिर फेयरवेल के लिए चंदा नहीं मिलने के कारण उन्होने अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर 104 बच्चों को निलंबित कर दिया। जब उन्हे अहसास हुआ कि गलती बड़ी हो गयी है तो दूसरे दिन आनन फानन में कुछ पालकों से मुलाकात की रस्म अदायगी कर निलंबन आदेश वापस ले लिया।
अभिभावनकों ने बताया कि संभव है बच्चे गलत हों..लेकिन सिर्फ 55 पालकों को ही निशाना बनाया  जाना तकलीफ है।  प्राचार्य के फैसले में अधकचरापन की झलक मिलती है। दरअसल सुलझा हुआ प्राचार्य 104 बच्चों को कभी निलंबित कर ही नहीं सकता है। जब पोल खुलने लगी तो प्राचार्य ने निलंबन बहाली का आदेश जारी कर पर्दा डालने का काम किया है। इसमें विभाग के आलाधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है।
बहरहाल  विद्यार्थियों के निलंबन करने और बहाल होने के आदेश को लेकर शिक्षा विभाग के बीईओ, डीईओ की स्थिति सांप छछूंदर जैसी हो गयी है। अधिकारियों को ना तो हां कहते बन रहा है और ना ही ना कहते बन रहा है। सवाल पूछने पर अधिकारी कमजोर बच्चों की तरह अगल बगल झांकने लगते हैं। या फिर चुप रहकर तूफान के गुजरने का इंतजार कर रहे हैं।
घटना के बाद नाराज पालकों ने आत्मानंद विद्यालय प्राचार्य की योग्यता पर सवाल दागना शुरू कर दिया है। पालकों ने बताया कि जूनियर और कम योग्य व्यक्ति को आत्मानन्द जैसे उच्चस्तरीय स्कूल का प्राचार्य बनाकर योग्य और सीनियर शिक्षकों का अपमान किया जा रहा है। 104 बच्चों और सैकड़ों परिवार को पहले अपमानित किया गया। अब निलंबित किये गए आधे पालकों से बिना मुलाकात और जांच के निलंबन वापस लेना प्राचार्य की अदूरदर्शिता को जाहिर करता है। 

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