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कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़: एक मौजूदा और एक पूर्व CM का नाम आगे क्यों नजर आ रहा रेस में..?

(गिरिजेय) कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर अब लोगों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। हालांकि एक तरफ राहुल गांधी पदयात्रा पर निकले हैं और आने वाले 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर उनकी इस पदयात्रा पर भी लोगों की नजर है। लेकिन इस यात्रा के आखिरी पड़ाव तक पहुंचने से पहले कांग्रेस के नए अध्यक्ष पर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। क्योंकि इस पर भी 2024 के लोकसभा चुनाव का दारोमदार टिका हुआ है।

फिलहाल कांग्रेस के भावी अध्यक्ष के रूप में 3 नाम प्रमुख रूप से चर्चा में आ रहे हैं। जिनमें राजस्थान के मौजूदा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और अपने जमाने में कांग्रेस के बड़े नेता रहे जगजीवन राम की पुत्री मीरा कुमार का नाम चर्चाओं में है।

जैसा कि मालूम है कि कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव अक्टूबर में होने वाला है। नामांकन की प्रक्रिया इसी सितंबर महीने में शुरू होगी और जरूरत पड़ने पर 17 अक्टूबर को मतदान होगा। इसके 2 दिन बाद नतीजे सामने आएंगे। कांग्रेस अध्यक्ष पद पिछले काफी अर्से से गांधी परिवार के पास ही रहा है। लोगों को यह भी मालूम है कि 2019 के पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था।

उसके बाद से पार्टी की कमान श्रीमती सोनिया गांधी के पास है। तब से ही लगातार यह सवाल सियासी फिजा में घूमता रहा है कि राहुल गांधी कब फिर से कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालेंगे….? या वे यह पल संभालेंगे भी या नहीं….?

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इस बार भी नए कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव की चर्चा के बाद से यह सवाल सियासी फिजां में घूमता रहा है। राहुल गांधी लगातार अपनी ओर से साफ करते रहे हैं कि वे कांग्रेस अध्यक्ष का पद नहीं संभालेंगे। पार्टी संगठन के चुनाव के दौरान जिस तरह वे भारत जोड़ो पदयात्रा पर निकल चुके हैं उससे भी यह संकेत साफ है कि राहुल गांधी अब फिलहाल पार्टी अध्यक्ष का पद संभालने के लिए तैयार नहीं है।

हाल के वर्षों में बीजेपी जिस तरह गांधी कांग्रेस के साथ परिवारवाद को जोड़ती रही है। उसके जवाब के बतौर भी माना जा रहा है कि कांग्रेस का नया अध्यक्ष गांधी परिवार से नहीं होगा। तब यह सवाल भी सुर्खियों में आ रहा है कि ऐसी सूरत में गांधी परिवार से बाहर किस नेता को कॉन्ग्रेस की कमान सौंपी जा सकती है।

इसे लेकर अब तक दर्जनभर नाम चर्चाओं में रहे हैं। लेकिन लग रहा है कि अब दावेदारों के नाम तीन की गिनती पर सिमट गए हैं। जिनमें पहला नाम राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का है। हाल ही में गहलोत के हवाले से यह खबर भी आई थी कि अगर सोनिया गांधी कहेंगी तो वे कांग्रेसट अध्यक्ष का पद संभालने को तैयार हैं।

खबर यह भी आ रही है कि अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री का पद नहीं छोड़ना चाहते। कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने पर वे या तो मुख्यमंत्री पद पर भी बने रहेंगे या अपनी पसंद से किसी को मुख्यमंत्री बनाना चाहेंगे। जाहिर सी बात है कि सचिन पायलट का नाम उनकी पसंद के रूप में नहीं देखा जा रहा है। ऐसी स्थिति में राजस्थान की राजनीति से अलग हटकर कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में किस तरह के समीकरण बनते हैं इस पर लोगों की नजर है।

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कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में दूसरा नाम मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का भी लिया जा रहा है। जो इस समय चल रही कांग्रेस की भारत जोड़ो पदयात्रा के प्रभारी भी हैं और उन्होंने ही इस पदयात्रा का खाका तैयार किया है। पिछले करीब तीन दशक से कांग्रेस की राजनीति में दिग्विजय सिंह की अपनी एक अलग पहचान है। वो लगातार 10 साल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे । 2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने एलान किया था कि अगर कांग्रेस सत्ता से बाहर होती है तो वे आने वाले 10 साल तक सत्ता के किसी पद पर नहीं रहेंगे।

2003 में कांग्रेस मध्य प्रदेश का विधान सभा चुनाव हार गई और दिग्विजय सिंह ने सत्ता से वनवास का वचन भी निभाया। इसके बाद वे केंद्र की राजनीति में रहे और अपने बयानों की वजह से सुर्खियों में भी रहे हैं। इस दौरान 2009 में के लोकसभा चुनाव के दौरान के समय वे यूपी के प्रभारी रहे और तब उनकी रणनीति का ही नतीजा था कि कांग्रेस को यूपी में 22 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई थी। 1984 के बाद यूपी में के किसी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का यह सबसे अच्छा प्रदर्शन था।

कुछ समय पहले दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश में नर्मदा यात्रा की थी। हालांकि उन्होंने अपनी इस यात्रा को गैर राजनीतिक बताया था। लेकिन उनकी इस यात्रा का असर 2018 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला था । जिन इलाकों में से उनकी पदयात्रा गुजरी थी ,वहां कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी । इस समय दिग्विजय सिंह गांधी परिवार के नजदीकी हैं और भारत जोड़ो यात्रा के प्रभारी के रूप में पार्टी उनकी भूमिका देख रही है। यदि उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंपी जाए तो हैरत की बात नहीं होगी।

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वैसे नए कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में एक नेत्री का नाम भी सामने आ रहा है। अपने जमाने के जान जाने-माने कांग्रेस नेता जगजीवन राम की पुत्री मीरा कुमार की भी अलग पहचान है। वह लोकसभा की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं ।सौम्य – सरल स्वभाव की धनि मीरा कुमार को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के पीछे यह रणनीति भी हो सकती है कि कॉन्ग्रेस अनुसूचित जाति समाज के अपने पुराने वोट बैंक को फिर से हासिल करने की गरज से यह फैसला कर सकती है। वैसे आजादी के बाद लंबे समय तक अनुसूचित जाति वर्ग कांग्रेस के साथ रहा है।

जगजीवन राम इस तबके से आते थे और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान रही है। समाज में इसका व्यापक असर भी रहा। लेकिन वक्त के साथ खासकर उत्तर भारत के हिस्से में बहुजन समाज पार्टी का दायरा बढ़ने से समाज का यह तबका कांग्रेस से दूर होता गया। जाहिर सी बात है कि कांग्रेस की कोशिश रहेगी कि वह फिर से इस तबके को अपने साथ फिर से जोड़ ले। मीरा कुमार को अध्यक्ष की कमान सौंपकर काफी कुछ हद तक यह हासिल करने की उम्मीद पार्टी को होगी.

अभी कांग्रेसी के नए अध्यक्ष के चुनाव में 1 महीने से अधिक का वक्त बाकी है। तब तक इन नामों में कुछ और नाम जुड़ेंगे या कोई और नया समीकरण बनेगा ….यह आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल जो तस्वीर नजर आ रही है उसमें इन नामों के बीच से ही कोई नाम चेहरा कांग्रेस की कमान संभाल सकता है।

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